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राम मंदिर दान चोरी मामला: कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि महाराज ने चंपत राय का किया बचाव, अनिल मिश्रा पर जांच के हवाले छोड़ा फैसलाउत्तर प्रदेश
8 जुल॰ 2026, 3:22 pm (45 दिन पहले)· 2

राम मंदिर दान चोरी मामला: कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि महाराज ने चंपत राय का किया बचाव, अनिल मिश्रा पर जांच के हवाले छोड़ा फैसला

राम मंदिर के दानपात्र से चोरी के मामले में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देवगिरि महाराज ने चंपत राय की ईमानदारी पर भरोसा जताया है, जबकि डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका पर फैसला SIT की जांच पर छोड़ दिया है।

अयोध्या में राम मंदिर के दानपात्र से धन चोरी होने का मामला लगातार गहराता जा रहा है, जिससे मंदिर न्यास के सदस्यों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इस संवेदनशील मामले की जांच वर्तमान में SIT द्वारा की जा रही है, हालांकि जांच एजेंसी को अब तक न्यास के किसी सदस्य की सीधी संलिप्तता के बारे में कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देवगिरि महाराज ने अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने मंदिर प्रबंधन में शामिल चंपत राय का पुरजोर बचाव किया है, जबकि अन्य प्रमुख सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के संदर्भ में कहा है कि उनके साथ उनका परिचय काफी नया है और उनकी भूमिका का निर्धारण पूरी तरह से SIT की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

चोरी की घटना से आहत और लज्जित हैं कोषाध्यक्ष

सैकड़ों वर्षों के कठिन संघर्ष और असंख्य राम भक्तों के सर्वोच्च बलिदान के बाद निर्मित हुए भव्य राम मंदिर में चोरी की इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। स्वामी गोविंद देवगिरि महाराज ने इस विषय पर अपनी आंतरिक वेदना को साझा करते हुए कहा कि पांच शताब्दियों के लंबे आंदोलन, साधु-संतों की तपस्या और अनगिनत लोगों के समर्पण के बाद इस मंदिर का निर्माण संभव हो पाया है। यह मंदिर केवल एक ढांचा नहीं बल्कि समस्त सनातन धर्मावलंबियों की अमूल्य निधि है। उन्होंने स्वीकार किया कि ऐसे पावन और ऐतिहासिक स्थान पर दानपात्र से धन चोरी होने जैसी घटना की उन्होंने कभी स्वप्न में भी कल्पना नहीं की थी। महाराज ने कहा कि जब उन्हें पहली बार इस अप्रत्याशित चोरी की सूचना मिली, तो वह अत्यंत दुखी, लज्जित और स्तब्ध रह गए थे। कुछ समय के लिए उन्हें और अन्य न्यासियों को यह समझ ही नहीं आ रहा था कि इस गंभीर स्थिति में क्या कदम उठाया जाए, लेकिन वर्तमान में उनका मुख्य कर्तव्य इस व्यवस्था को पूरी तरह से सुधारना और दोबारा ऐसी गलती न होने देना है।

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वित्त प्रबंधन और सुरक्षा ऑडिट की प्रक्रिया

इस चोरी के समय पर उजागर न होने और कोषाध्यक्ष की भूमिका पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए स्वामी गोविंद देवगिरि महाराज ने मंदिर के वित्तीय प्रबंधन की प्रक्रिया को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष जून के प्रथम सप्ताह में उन्हें पहली बार इस वित्तीय विसंगति और चोरी की भनक लगी थी। मंदिर के कोष में एकत्र होने वाले प्रत्येक पैसे और दान का हिसाब-किताब रखने का मुख्य दायित्व उनका ही है। अपनी इस जिम्मेदारी को पूरी पारदर्शिता से निभाने के लिए उन्होंने एक मजबूत व्यवस्था स्थापित की है। इस व्यवस्था के अंतर्गत वह स्वयं अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट को हर महीने लगभग पांच दिनों के लिए विशेष रूप से अयोध्या भेजते हैं। यह विशेषज्ञ टीम मंदिर के संपूर्ण खातों, रसीदों और जमा राशि की बारीक जांच करती है। महाराज ने स्पष्ट किया कि आंतरिक लेखा-जोखा और अकाउंट्स में किसी भी प्रकार की त्रुटि या संदेह की गुंजाइश नहीं थी, क्योंकि वहां सब कुछ नियमानुसार चल रहा था, परंतु दानपात्र के स्तर पर हुई इस हेराफेरी ने सभी को चौंका दिया।

चंपत राय की ईमानदारी पर अटूट विश्वास

न्यास के वरिष्ठ सदस्यों और VHP तथा RSS से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों पर उठ रहे आरोपों पर बात करते हुए कोषाध्यक्ष ने चंपत राय का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चंपत राय के साथ उनका परिचय और कार्य करने का अनुभव लगभग 30 से 32 वर्षों का है। इतने लंबे समय के व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन के अनुभव के आधार पर वह पूरे विश्वास और जिम्मेदारी के साथ यह कह सकते हैं कि चंपत राय की ईमानदारी पर कोई संदेह नहीं किया जा सकता। महाराज के अनुसार, यदि चंपत राय के संज्ञान में इस प्रकार की चोरी, हेरफेर या गबन की थोड़ी सी भी भनक लगती, तो वे इसे एक क्षण के लिए भी बर्दाश्त नहीं करते और तुरंत कड़ी कार्रवाई करते। उनका संपूर्ण जीवन संगठन और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहा है, इसलिए उनकी संलिप्तता का प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता।

डॉ. अनिल मिश्रा और कमीशनखोरी के आरोपों पर SIT का फैसला

दूसरी ओर, राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के समय अपनी पत्नी के साथ प्रधान यजमान की भूमिका निभाने वाले डॉ. अनिल मिश्रा पर लग रहे आरोपों पर स्वामी गोविंद देवगिरि महाराज ने बेहद नपा-तुला रुख अपनाया। मंदिर निर्माण के अन्य कार्यों में कमीशनखोरी और दान चोरी में डॉ. मिश्रा की संलिप्तता के दावों पर उन्होंने कहा कि उनके साथ उनका परिचय बहुत पुराना नहीं है। जब से उन्होंने अयोध्या में ट्रस्ट के कामकाज को देखना और संभालना शुरू किया है, तभी से उनका परिचय डॉ. अनिल मिश्रा से हुआ है। महाराज ने स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण में डॉ. मिश्रा दोषी हैं या नहीं, अथवा उनकी कोई भूमिका है या नहीं, इसका अंतिम और निष्पक्ष निर्णय केवल SIT ही करेगी। वे स्वयं इस विषय पर जांच पूरी होने से पहले कोई भी व्यक्तिगत निष्कर्ष या निर्णय देने की स्थिति में नहीं हैं और कानून को अपना काम करने देना चाहिए।

सवाल-जवाब

राम मंदिर दान चोरी मामले में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि महाराज का क्या रुख है?
उन्होंने चंपत राय की ईमानदारी पर पूरा भरोसा जताया है, लेकिन डॉ. अनिल मिश्रा पर लगे आरोपों का फैसला SIT की जांच पर छोड़ दिया है।
चोरी की घटना पर कोषाध्यक्ष ने क्या प्रतिक्रिया दी?
उन्होंने कहा कि पांच शताब्दियों के संघर्ष से बने मंदिर में ऐसी घटना होना बेहद दुखद है और वे इस घटना से आहत और लज्जित हैं।
मंदिर के ट्रस्ट में दान और खातों की जांच की क्या व्यवस्था है?
कोषाध्यक्ष हर महीने अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट को पांच दिनों के लिए अयोध्या भेजते हैं, जो मंदिर के सभी खातों की विस्तृत जांच करते हैं।
कोषाध्यक्ष को चोरी की घटना के बारे में सबसे पहले कब पता चला?
उन्हें इस वित्तीय अनियमितता और चोरी की जानकारी सबसे पहले जून के प्रथम सप्ताह में मिली थी।
डॉ. अनिल मिश्रा पर क्या आरोप लगे हैं?
उन पर राम मंदिर के दानपात्र से धन चोरी करने और मंदिर निर्माण से जुड़े अन्य कार्यों में कमीशनखोरी के आरोप लगे हैं।
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