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हरिद्वार जमीन घोटाला: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा एक्शन, दागी IAS वरुण चौधरी को बर्खास्त करने की सिफारिशउत्तराखंड
20 जून 2026, 8:27 pm (129 दिन पहले)· 2

हरिद्वार जमीन घोटाला: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा एक्शन, दागी IAS वरुण चौधरी को बर्खास्त करने की सिफारिश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम के ₹15 करोड़ की जमीन को ₹54 करोड़ में खरीदने के घोटाले में आरोपी IAS वरुण चौधरी को बर्खास्त करने की सिफारिश की है।

उत्तराखंड में प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है। हरिद्वार नगर निगम के जमीन खरीद घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी को सेवा से बर्खास्त करने की सिफारिश की है। वह एक IAS अधिकारी हैं। इस जांच की आंच प्रशासन के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों तक भी पहुंच चुकी है।

वरुण चौधरी के अलावा, तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट करमेंद्र सिंह के खिलाफ भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई और विभागीय अनुशासन का डंडा चला है। वह भी एक IAS अधिकारी हैं और उनके खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई के तहत उन्हें पद से डिमोट किया जा सकता है या फिर नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। इन दोनों अधिकारियों के मामले में आगे की कार्रवाई के लिए फाइल कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भेजी जा रही है क्योंकि दोनों ही देश की शीर्ष प्रशासनिक सेवा के सदस्य हैं।

करोड़ों का घोटाला: ₹15 करोड़ की जमीन ₹54 करोड़ में खरीदी

पूरा मामला हरिद्वार नगर निगम द्वारा कचरा डंपिंग यार्ड बनाने के लिए जमीन खरीदने से जुड़ा हुआ है। जब इस खरीद की जांच कराई गई, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। जांच में पता चला कि अधिकारियों ने मिलकर 2.3070 हेक्टेयर की जमीन, जिसकी वास्तविक कीमत लगभग ₹15 करोड़ थी, उसे करीब ₹54 करोड़ की भारी-भरकम कीमत पर खरीदा था।

इस पूरे सौदे में नियमों और तय प्रक्रियाओं को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया था। अधिकारियों ने वित्तीय और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन करते हुए इस हेराफेरी को अंजाम दिया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।

पूर्व निलंबन और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति

जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद, मुख्यमंत्री धामी ने 3 जून, 2025 को बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट, नगर आयुक्त और SDM समेत कुल सात लोगों को निलंबित कर दिया था। अब इस कड़ी में सजा देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।

इसी मामले में घिरे हरिद्वार के तत्कालीन SDM अजयवीर सिंह को भी भारी खामियाजा भुगतना पड़ा है। उनके खिलाफ सर्विस रिकॉर्ड में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की गई है और उनके तीन सालाना इंक्रीमेंट भी रोक दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। सरकार के इस बड़े फैसले से उत्तराखंड के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। इससे यह साफ संदेश गया है कि जनता के पैसे का दुरुपयोग करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

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सवाल-जवाब

हरिद्वार जमीन घोटाला क्या है?
यह हरिद्वार नगर निगम द्वारा कचरा डंपिंग यार्ड के लिए ₹15 करोड़ की वास्तविक कीमत वाली जमीन को ₹54 करोड़ की बढ़ी हुई कीमत पर खरीदने का मामला है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किस IAS अधिकारी को बर्खास्त करने की सिफारिश की है?
मुख्यमंत्री धामी ने तत्कालीन नगर आयुक्त और IAS अधिकारी वरुण चौधरी को नौकरी से बर्खास्त करने की सिफारिश की है।
तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट करमेंद्र सिंह के खिलाफ क्या कार्रवाई शुरू की गई है?
तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट और IAS अधिकारी करमेंद्र सिंह के खिलाफ बड़ी सजा वाली अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है, जिसके तहत उनका पद घटाया जा सकता है या उन्हें बर्खास्त किया जा सकता है।
इस मामले में तत्कालीन SDM अजयवीर सिंह को क्या सजा मिली है?
तत्कालीन SDM अजयवीर सिंह के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की गई है और उनके तीन सालाना इंक्रीमेंट रोक दिए गए हैं।
इन दागी अधिकारियों को पहले कब निलंबित किया गया था?
जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद, मुख्यमंत्री धामी ने 3 जून, 2025 को तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट, नगर आयुक्त और SDM समेत सात लोगों को निलंबित किया था।
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