इटली के तटीय क्षेत्र में पुरातात्विक खोजों के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। देश के गोताखोरों ने सिसिली के समुद्र तट के पास लगभग दो हजार साल पुराने एक ऐतिहासिक रोमन पोत का पता लगाया है। यह खोज भूमध्य सागर के भीतर मौजूद प्राचीन अवशेषों के अध्ययन में एक बेहद महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रही है, क्योंकि यह अपने साथ उस दौर के व्यापार और संस्कृति से जुड़े कई अनछुए पहलू लेकर आई है।
मटकों और कंटेनरों से भरा मिला डूबा हुआ पोत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह प्राचीन जहाज बड़ी संख्या में अच्छी स्थिति में संरक्षित कंटेनरों और जार से पूरी तरह लदा हुआ मिला है। इन बर्तनों का उपयोग उस प्राचीन काल में वाइन यानी शराब और जैतून का तेल जैसी कीमती वस्तुओं के परिवहन के लिए किया जाता था। इतने लंबे समय तक पानी के नीचे रहने के बावजूद इन बर्तनों का इस तरह सुरक्षित मिलना शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए एक बड़ा आश्चर्य और खुशी का विषय बना हुआ है।
मछुआरों की सूचना पर सामने आया मामला
इस ऐतिहासिक मलबे तक पहुंचने का सफर एक इत्तेफाक और स्थानीय मछुआरों की सतर्कता से शुरू हुआ। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मछुआरों की तरफ से मिले एक अहम सुराग के आधार पर विशेष पुलिस गोताखोरों ने इस डूबे हुए जहाज की तलाश शुरू की थी। यह पोत समुद्र की तलहटी में लगभग 46 मीटर यानी 150 फीट की गहराई में स्थित पाया गया है। माप के मुताबिक, इस प्राचीन अवशेष की लंबाई 21 मीटर यानी 69 फीट और चौड़ाई 6 मीटर यानी 20 फीट है।
दूसरी या पहली शताब्दी ईसा पूर्व का है इतिहास
देश के संस्कृति मंत्रालय की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, यह पोत दूसरी या पहली शताब्दी ईसा पूर्व के काल का है। इस ऐतिहासिक खोज के महत्व को रेखांकित करते हुए इटली के संस्कृति मंत्री एलेसेंड्रो गिउली ने इसे हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी पानी के भीतर की जाने वाली पुरातात्विक खोजों में से एक करार दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के अवशेष हमारे प्राचीन इतिहास को गहराई से समझने में मदद करते हैं।
फ्री-डाइवर की नजरों में आया अद्भुत नजारा
इस मलबे को सबसे पहले देखने वाले मछुआरे और फ्री-डाइवर गियाकोमो डी मोला थे, जो मज़ारा डेल वल्लो के पास समुद्र के नीचे सर्वे का काम कर रहे थे। सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि स्कैनर पर एक बड़ी चट्टान जैसी आकृति दिखने पर उन्होंने मामले की गहराई से जांच करने का फैसला किया था। जैसे ही वे उसके करीब पहुंचे, उनका दिल धड़कना बंद हो गया क्योंकि वह कोई चट्टान नहीं बल्कि प्राचीन काल के सिरेमिक जार थे, जिन्हें एम्फोरा कहा जाता है। इन जार का इस्तेमाल मुख्य रूप से अनाज, तेल या शराब को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता था। उन्होंने इसे अपनी जिंदगी की सबसे अविश्वसनीय खोज बताते हुए कहा कि लगभग बीस शताब्दियों में उस स्थान को देखने वाले शुरुआती इंसानों में शामिल होना शब्दों में बयां करने जैसा नहीं है।
समुद्री जीवों का ठिकाना बन चुका है मलबा
इस गोताखोर ने मलबे का एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें जार के बीच इल यानी बाम मछली, स्नैपर और अनगिनत अन्य समुद्री जीव रहते हुए दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने अपनी टिप्पणी में कहा कि समुद्र कभी भी हमें हैरान करना बंद नहीं करता है और इस बार उन्हें केवल एक मलबा नहीं, बल्कि हमारे इतिहास का एक अमूल्य हिस्सा मिला है।
विशेष पुलिस दल और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
इस बहुमूल्य पुरातात्विक स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देश की पुलिस की एक विशेष सांस्कृतिक विरासत संरक्षण शाखा कराबिनीरी आर्ट स्क्वाड के विशेष गोताखोरों को मौके पर भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक इस स्थल की पूरी जांच की जाती है और इसके कार्गो यानी सामान के बारे में सटीक जानकारी जुटाई जाती है, तब तक इसकी सुरक्षा के लिए पुख्ता कदम उठाए जाएंगे। भूमध्य सागर की तलहटी में इस तरह के कई अन्य प्राचीन मलबे छिपे होने की प्रबल संभावना जताई जाती है, जो आने वाले समय में इतिहास के कई और रहस्यों से पर्दा उठा सकते हैं।



















