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बलूचिस्तान में हिंदू व्यापारी राकेश कुमार की गोली मारकर हत्या, नुश्की बाजार में फैली दहशतदुनिया
22 अग॰ 2026, 11:30 pm (23 दिन पहले)· 4

बलूचिस्तान में हिंदू व्यापारी राकेश कुमार की गोली मारकर हत्या, नुश्की बाजार में फैली दहशत

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में अज्ञात हमलावरों ने दुकान में घुसकर एक हिंदू व्यापारी की गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद अल्पसंख्यकों में भारी डर और रोष का माहौल है।

पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों की एक और दर्दनाक घटना सामने आई है। बलूचिस्तान के नुश्की कस्बे में अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने दिनदहाड़े एक हिंदू व्यापारी की उनकी ही दुकान के भीतर गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। इस सनसनीखेज वारदात के बाद से इलाके में रह रहे हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के बीच गहरा खौफ और दहशत का माहौल बना हुआ है।

नुश्की बाजार के कासिराबाद स्टॉप पर हुई वारदात

यह खौफनाक घटना बलूचिस्तान प्रांत के नुश्की कस्बे में स्थित व्यस्त नुश्की बाजार के कासिराबाद स्टॉप पर हुई। घटना के वक्त बाजार में सामान्य दिनों की तरह चहल-पहल थी, तभी बेखौफ हमलावर साजिश के तहत इलाके में दाखिल हुए। मृतक हिंदू व्यापारी की पहचान राकेश कुमार के रूप में हुई है, जो इसी बाजार में अपनी दुकान चलाकर किसी तरह अपने परिवार का गुजर-बसर कर रहे थे। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हमलावर सीधे राकेश कुमार की दुकान के अंदर जबरन घुस गए।

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विरोध करने पर बदमाशों ने बरसाईं गोलियां

जब दुकान के अंदर अचानक घुसे हथियारबंद बदमाशों की मंशा भांपकर राकेश कुमार ने उनका विरोध करने की हिम्मत दिखाई, तो हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं। गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा बाजार गूंज उठा और अफरा-तफरी मच गई। राकेश कुमार को संभलने का मौका तक नहीं मिला और गोलियों से छलनी होकर उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी हमलावर मौके से आसानी से फरार होने में कामयाब रहे। घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया और उसे जिला अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई और छानबीन शुरू कर दी है।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

इस कायराना और बर्बर हमले के बाद बलूचिस्तान से लेकर खैबर पख्तूनख्वा तक तीखा आक्रोश फैल गया है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांतीय विधानसभा के सदस्य और प्रमुख सिख नेता गुरपाल सिंह ने इस जघन्य हत्याकांड की कड़ी शब्दों में भर्त्सना की है। गुरपाल सिंह ने इस हमले को राज्य विरोधी और बलूचिस्तान विरोधी तत्वों की कायराना करतूत बताया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि हिंदू समुदाय सदियों से बलूचिस्तान का एक अभिन्न हिस्सा रहा है और इस समुदाय ने समय-समय पर पाकिस्तान तथा बलूचिस्तान के प्रति अपनी वफादारी और योगदान को पूरी तरह साबित किया है।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के हालात

कुछ समय पहले ही पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने यह दावा किया था कि उनके देश में अल्पसंख्यक बेहद सुरक्षित और खुशहाल हैं, लेकिन इस घटना ने उनके दावों की पोल खोल दी है। पाकिस्तान में हिंदू आबादी पहले से ही घटकर मात्र चार प्रतिशत रह गई है, और उस पर भी आए दिन ऐसी लक्षित हत्याओं और हमलों की खबरें सामने आती रहती हैं। बलूचिस्तान में मौजूदा समय में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं, जहां स्थानीय जनता अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है। आरोप है कि क्षेत्र के कई हिस्सों में पाकिस्तानी सेना द्वारा निहत्थे नागरिकों को जबरन अगवा किए जाने और अगले दिन उनकी लाश मिलने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। बुनियादी हक जैसे बिजली, पानी और राशन की मांग करने वाले आम नागरिकों को भी गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ता है। इन दमनकारी नीतियों और हमलों के बावजूद बलोच लड़ाकों और स्थानीय लोगों ने पाकिस्तानी सेना के इस रवैए के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया है और अपने संघर्ष पर अडिग हैं।

सवाल-जवाब

बलूचिस्तान में हिंदू व्यापारी पर हमला कहां हुआ?
यह हमला बलूचिस्तान प्रांत के नुश्की कस्बे के नुश्की बाजार स्थित कासिराबाद स्टॉप पर हुआ।
मृतक हिंदू व्यापारी का नाम क्या था?
मृतक हिंदू व्यापारी का नाम राकेश कुमार था, जो अपनी दुकान पर काम कर रहे थे।
इस घटना की निंदा किसने की?
खैबर पख्तूनख्वा प्रांतीय विधानसभा के सदस्य और प्रमुख सिख नेता गुरपाल सिंह ने इस हमले की कड़ी निंदा की।
घटना के बाद पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल पहुंचाया और अज्ञात हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·22 दिन पहले

बलूचिस्तान में हिंदू व्यापारी राकेश कुमार की दिनदहाड़े हत्या ने राज्य में कानून-व्यवस्था और कमजोर होती प्रशासनिक पकड़ को उजागर कर दिया है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के उस दावे पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं, जिसमें उन्होंने अल्पसंख्यकों के पूरी तरह सुरक्षित होने की बात कही थी। घटती हिंदू आबादी और इस तरह की लक्षित हिंसा से स्पष्ट है कि क्षेत्रीय सुरक्षा हालात और सुरक्षा एजेंसियों की विफलता अल्पसंख्यक समुदायों के अस्तित्व के लिए बड़ा संकट बन चुकी है।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·22 दिन पहले

बलूचिस्तान के नुश्की में राकेश कुमार की हत्या क्षेत्रीय सुरक्षा और अल्पसंख्यकों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। राष्ट्रपति जरदारी के सुरक्षा दावों के उलट, इस घटना से व्यापारिक वर्ग और हिंदू समुदाय में डर का माहौल गहरा गया है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और जनसांख्यिकी दबाव का संकट और बढ़ सकता है।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·22 दिन पहले

उमर अल मंसूरी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, बलूचिस्तान के अशांत माहौल में इस तरह की लक्षित हिंसा केवल एक मानवीय त्रासदी नहीं, बल्कि राज्य की प्रशासनिक विफलता का स्पष्ट प्रमाण है। जब स्थानीय व्यापारी दिनदहाड़े इस प्रकार निशाना बनाए जाते हैं, तो यह न केवल बलूचिस्तान के आर्थिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करता है, बल्कि शेष बची अल्पसंख्यक आबादी के पलायन के संकट को भी और अधिक तीव्र कर देता है।

Li Wei@li-wei·23 दिन पहले

यह घटना पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में कानून व्यवस्था की विफलता और अल्पसंख्यकों की असुरक्षा को दर्शाती है। नुश्की बाजार में हुई इस लक्षित हत्या से वहां रह रहे हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों में गहरा खौफ पैदा हो गया है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के उस दावे पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं, जिसमें उन्होंने अल्पसंख्यकों के सुरक्षित होने की बात कही थी। इस क्षेत्र में घटती हिंदू आबादी और लगातार हो रहे हमलों से क्षेत्रीय स्थिरता और मानवाधिकारों की स्थिति पर गंभीर असर पड़ रहा है, जिससे भविष्य में अल्पसंख्यकों का पलायन और बढ़ सकता है।

Sophie Laurent@sophie-laurent·23 दिन पहले

इस घटना का कूटनीतिक और आर्थिक प्रभाव अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की छवि को और धूमिल कर सकता है। जब तक राज्य आंतरिक सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा में विफल रहेगा, यूरोपीय संघ और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थान व्यापारिक समझौतों या आर्थिक सहायता के दौरान अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के मुद्दों को सख्ती से उठाएंगे। इससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ेगी।

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