तुर्की में बारह प्रांतों में एक बड़े पुलिस अभियान के तहत दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें प्रमुख LGBTQ+ कार्यकर्ता और समलैंगिक बार में मौजूद लोग शामिल हैं। सरकारी अधिकारियों और नागरिक संगठनों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने सप्ताहांत के दौरान कई सामाजिक स्थलों और निजी आवासों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई देश में यौन अल्पसंख्यकों और नागरिक समाज संगठनों के खिलाफ सरकारी नीतियों में एक बड़े तनाव को दर्शाती है, जिससे पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों की रक्षा के नाम पर की जा रही प्रशासनिक कार्रवाइयों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस सघन अभियान ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है।
इस्तांबुल और अंकारा में दोहरी पुलिस कार्रवाई
इस्तांबुल के मुख्य अभियोजक कार्यालय ने पुष्टि की है कि सुरक्षा बलों ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर सघन छापेमारी की, जिसके बाद छब्बीस लोगों को हिरासत में ले लिया गया। इस अभियान के दौरान पुलिस ने डिजिटल उपकरण, अवैध मादक पदार्थ, तस्करी की गई शराब और एक हथियार जब्त करने का दावा किया है। अभियोजक कार्यालय ने कहा कि जिन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई है, वे बिना वैध लाइसेंस के शराब परोस रहे थे और वहां कई संदिग्ध गतिविधियां संचालित हो रही थीं। जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि संभावित संगठित नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
दूसरी ओर, देश की राजधानी अंकारा में एक प्रमुख अधिकार संगठन केओस जीएल को निशाना बनाकर कार्रवाई की गई। अंकारा के मुख्य अभियोजक कार्यालय ने बताया कि संगठन की गतिविधियों से जुड़ी एक जांच के सिलसिले में इक्कीस लोगों को हिरासत में लिया गया है। इस प्रकार सरकारी आंकड़ों के अनुसार कुल सैंतालीस लोग पुलिस की हिरासत में हैं। हालांकि, केओस जीएल संगठन का कहना है कि हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं की वास्तविक संख्या कम से कम पचास है, जिनमें से दस से अधिक लोगों को पुलिस ने उनके घरों पर रात में छापेमारी करके जबरन उठाया है।
डिजिटल सेंसरशिप और अश्लीलता के संगीन आरोप
शारीरिक रूप से लोगों को हिरासत में लेने के अलावा, तुर्की प्रशासन ने यौन अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी संगठनों की इंटरनेट पर मौजूदगी को भी निशाना बनाया है। अधिकारियों ने कई वेबसाइटों और सोशल मीडिया खातों को ब्लॉक कर दिया है। सरकार ने केओस जीएल और अन्य संगठनों पर इंटरनेट पोस्ट के माध्यम से अश्लीलता फैलाने का आरोप लगाया है, जो बच्चों के लिए भी उपलब्ध थीं। इसी आधार पर कानूनी अधिकारियों ने केओस जीएल के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मौजूद मुख्य खाते के साथ-साथ लगभग पंद्रह अन्य समान विचारधारा वाले संगठनों के खातों को बंद करने की मांग की है। अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस डिजिटल नाकेबंदी का उद्देश्य समुदाय को पूरी तरह से अलग-थलग करना और उन्हें कानूनी सहायता प्राप्त करने से रोकना है। डिजिटल स्पेस पर इस तरह के प्रतिबंधों से कार्यकर्ताओं के बीच भय का माहौल और गहरा हो गया है।
पारिवारिक सुरक्षा अभियान के नाम पर प्रशासनिक नकेल
इस पूरे अभियान को तुर्की सरकार ने 'माई फैमिली इज सेफ' (मेरा परिवार सुरक्षित है) नाम दिया है। सरकारी प्रवक्ताओं के अनुसार, यह कार्रवाई उनके व्यापक 'डिकेड ऑफ द Family' (परिवार का दशक) कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक सामाजिक और पारिवारिक ढांचे को सुरक्षित रखना है। तुर्की के न्याय मंत्री अकिन गुरलेक ने स्पष्ट किया कि इस नीति के तहत देश भर में एक सौ साठ से अधिक लोगों, निजी कंपनियों और नागरिक संगठनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। अकिन गुरलेक ने अपने बयान में संकेत दिया कि यह कार्रवाई केवल प्रशासनिक जुर्मानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें शामिल लोगों को लंबी जेल की सजा भी हो सकती है। इस अभियान के दायरे में वे कंपनियां भी शामिल हैं जिन्होंने अपने विज्ञापनों या सामाजिक अभियानों में विविधता का समर्थन किया है। हालांकि न्याय मंत्री ने हिरासत में लिए गए लोगों की सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि ये कदम राष्ट्रीय मूल्यों और सामाजिक मर्यादाओं की रक्षा के लिए आवश्यक हैं।
बढ़ती सामाजिक शत्रुता और गौरव यात्राओं पर प्रतिबंध
यद्यपि तुर्की के आधुनिक कानूनों में समलैंगिक संबंधों को स्पष्ट रूप से अपराध की श्रेणी में नहीं रखा गया है, लेकिन वहां सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर इस समुदाय के प्रति विरोध बहुत गहरा है। राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के शासनकाल में इस समुदाय के लिए नागरिक अधिकारों का दायरा लगातार सिमटता गया है। राष्ट्रपति ने सार्वजनिक मंचों से कई बार इस समुदाय के खिलाफ कठोर टिप्पणियां की हैं, उन्हें अप्राकृतिक और विकृत बताया है और गिरती जन्म दर के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया है। इसके अतिरिक्त, देश में गौरव यात्राओं (प्राइड परेड) पर लगातार प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं, और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को तितर-बितर करने के लिए दंगारोधी पुलिस अक्सर बल प्रयोग और आंसू गैस का उपयोग करती है। एक समय इस्तांबुल की प्राइड परेड पूरे क्षेत्र में अपनी तरह का सबसे बड़ा आयोजन मानी जाती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
तुर्की के मानवाधिकार संघ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए लिखा कि इस अभियान का असली मकसद पारिवारिक सुरक्षा नहीं, बल्कि राज्य प्रायोजित भेदभाव, भय की राजनीति और स्वतंत्र नागरिक समाज को समाप्त करना है। इस संगठन का तर्क है कि सरकार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए समाज के एक कमजोर हिस्से को बलि का बकरा बना रही है।
कानूनी अनिश्चितता और मानवाधिकारों का भविष्य
तुर्की में समलैंगिक विवाह को कोई कानूनी मान्यता नहीं प्राप्त है, और न ही ऐसे जोड़ों को किसी प्रकार का कानूनी संरक्षण मिला हुआ है। पुलिस की कार्रवाई का घरों तक पहुंचना यह दर्शाता है कि अब केवल सार्वजनिक प्रदर्शनों को रोकना ही सरकार का लक्ष्य नहीं है, बल्कि निजी स्तर पर चलने वाले अभियानों पर भी नकेल कसी जा रही है। वर्तमान में हिरासत में लिए गए लोग औपचारिक आरोपों और अदालती सुनवाई का सामना कर रहे हैं। डिजिटल प्रतिबंधों के कारण कानूनी सलाहकारों को भी काम करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। देश में मानवाधिकारों के भविष्य और नागरिक संगठनों की स्वायत्तता के लिहाज से इस मामले के कानूनी परिणाम बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं। वैश्विक मानवाधिकार समूह इस पूरी अदालती प्रक्रिया पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।



















