बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन ने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में खासी हलचल पैदा कर दी है। इस महत्वपूर्ण मंच पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ नजर आए। इन तीनों वैश्विक नेताओं की यह तिकड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर हमेशा से चर्चा का केंद्र रही है, क्योंकि इनके एक साथ आने से वैश्विक शक्ति संतुलन पर गहरा असर पड़ता है। सम्मेलन के दौरान नेताओं का यह दोस्ताना अंदाज और आपसी गर्मजोशी मीडिया की सुर्खियों में छा गई।
शंघाई सहयोग संगठन का वैश्विक महत्व और कूटनीतिक दायरे
शंघाई सहयोग संगठन में वर्तमान में कुल दस सदस्य देश शामिल हैं। यह शक्तिशाली संगठन वैश्विक जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा प्रतिनिधित्व करता है। इसके सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों के तहत आपसी हितों के क्षेत्रों में भाईचारे, दोस्ती और सहयोग के दीर्घकालिक संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस बहुपक्षीय मंच के जरिए क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी और आपसी कूटनीतिक संवाद को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे वैश्विक स्तर पर नई साझेदारियों का मार्ग प्रशस्त होता है।
शीर्ष नेताओं की मुलाकात के कूटनीतिक मायने
शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग की यह उपस्थिति कई मायनों में अहम है। इस सम्मेलन की बैठक इसलिए भी खास होती है क्योंकि यहां पर दुनिया की प्रमुख ताकतें एक मंच पर इकट्ठा होती हैं। जानकारों के अनुसार, इस तरह के उच्च स्तरीय संवाद से द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत करने का खुला अवसर मिलता है। बिश्केक में आयोजित इस ऐतिहासिक आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में क्षेत्रीय संगठनों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो गई है।



















