वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ता हुआ तनाव अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर आकर केंद्रित हो गया है। अमेरिका की प्राथमिकता यह है कि ईरान आधिकारिक रूप से विश्व समुदाय के सामने इस समुद्री मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित और खुला घोषित करे, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर हमलों की आशंका खत्म हो सके। अमेरिका के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस मांग के पीछे का मुख्य उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक समुद्री गतिविधियों को दोबारा पटरी पर लाना है।
ईरान में आंतरिक सत्ता संघर्ष और अमेरिकी मांग
अमेरिकी अधिकारियों का विश्लेषण है कि इस सप्ताह हुए ताज़ा हमलों के पीछे ईरान के कट्टरपंथी धड़ों का हाथ है, जो वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बनी अंतरिम युद्धविराम की स्थिति को कमजोर करने में जुटे हैं। उनके अनुसार, ईरान के भीतर इस समय सत्ता को लेकर एक गहरा संघर्ष चल रहा है, जिसकी वजह से किसी भी समझौते को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखना अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया है। अमेरिका का मानना है कि ईरान के सर्वोच्च नेता रहे आयतुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उपजी रिक्तता ने वहां अलग-अलग गुटों को विभिन्न दिशाओं में सक्रिय कर दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया है कि वे वर्तमान अंतरिम युद्धविराम समझौते को अब समाप्त मान चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका ईरान के साथ एक स्थाई शांति समझौते की दिशा में बातचीत जारी रखने के लिए तैयार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने वार्ताकारों को एक समय-सीमा दी है। यदि यह कूटनीतिक प्रयास विफल रहते हैं, तो राष्ट्रपति के पास अन्य सख्त विकल्प भी खुले हुए हैं।
होर्मुज की वैश्विक अहमियत
यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों में गिना जाता है। युद्ध पूर्व के आंकड़ों के अनुसार, विश्व की कुल प्राकृतिक गैस और तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज के रास्ते ही गुजरता था। युद्ध के समय इस मार्ग पर ईरान के नियंत्रण ने वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दिया था, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, हालांकि अब ये कीमतें उस उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ चुकी हैं।
ईरान का कूटनीतिक जवाब
संयुक्त राष्ट्र में तैनात ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से संबंधित किसी भी निर्णय, जैसे कि रास्ते को खोलना या वहां से बारूदी सुरंगों को हटाना, का एकमात्र अधिकार केवल ईरान के पास सुरक्षित है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई बाहरी शक्ति इस क्षेत्र में हस्तक्षेप करती है, तो यह अंतरिम समझौते का स्पष्ट उल्लंघन होगा और इससे समुद्री सुरक्षा पर नकारात्मक असर पड़ेगा। ईरान का स्टैंड यह है कि उस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को तेहरान को शुल्क अदा करना चाहिए, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे मुक्त जलमार्ग मानता है।
मिसाइल हमलों का सिलसिला
शुक्रवार को हवाई हमलों की खबरें सामने आईं, हालांकि किसी भी देश ने इनकी जिम्मेदारी नहीं ली। CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि युद्धविराम की आधिकारिक घोषणा के बाद भी सैन्य स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि ईरान ने बीते गुरुवार को बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और कतर को निशाना बनाकर बड़े स्तर पर मिसाइलें दागीं। ईरान की संसद के सदस्य इस्माइल कौसारी ने संयुक्त अरब अमीरात पर अमेरिकी मदद का आरोप लगाते हुए उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है।
मध्यस्थता और भविष्य की संभावना
इस संकट को हल करने के लिए कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। ओमान इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जहां ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरगची और ओमान के प्रतिनिधि की मुलाकात होनी है। तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने उम्मीद जताई है कि सप्ताहांत तक कोई समाधान निकल सकता है। वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप से बात की है, और इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि दोबारा संघर्ष शुरू हुआ, तो इजरायल की प्रतिक्रिया पहले से कहीं अधिक आक्रामक होगी। अमेरिका वर्तमान में जहाजों को ओमान के दक्षिणी समुद्री मार्ग का उपयोग करने की सलाह दे रहा है ताकि ईरानी जलक्षेत्र से बचा जा सके।











