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मॉस्को में अघोषित यात्रा पर पहुंचे सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ, रूसी खुफिया अधिकारियों संग की उच्च स्तरीय बैठकदुनिया
26 अग॰ 2026, 5:08 pm (19 दिन पहले)· 4

मॉस्को में अघोषित यात्रा पर पहुंचे सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ, रूसी खुफिया अधिकारियों संग की उच्च स्तरीय बैठक

सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने मॉस्को में रूसी खुफिया सेवाओं के साथ अघोषित उच्च स्तरीय बैठक की, हालांकि क्रेमलिन ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उनकी कोई मुलाकात नहीं हुई।

अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने मंगलवार को रूस की राजधानी मॉस्को का अघोषित दौरा किया और रूसी खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कीं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान वाशिंगटन और मॉस्को के बीच सुरक्षा मामलों को लेकर हुई यह सबसे महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय यात्राओं में से एक मानी जा रही है। क्रेमलिन ने इस गोपनीय यात्रा और सुरक्षा एजेंसियों के बीच हुई वार्ताओं की आधिकारिक पुष्टि की है।

मॉस्को में खुफिया एजेंसियों के बीच वार्ता की पुष्टि

क्रेमलिन के आधिकारिक प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मॉस्को में आयोजित अपनी दैनिक प्रेस ब्रीफिंग में इस यात्रा की पुष्टि की। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए पेसकोव ने बताया कि सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ की यात्रा के दौरान रूसी खुफिया सेवाओं के साथ सीधा संपर्क और संवाद स्थापित हुआ। हालांकि, क्रेमलिन के प्रवक्ता ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि बंद कमरे में हुई इन बैठकों के दौरान किन विशिष्ट मुद्दों या संवेदनशील विषयों पर चर्चा की गई।

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हाल के वर्षों में अमेरिका और रूस के बीच बढ़े कूटनीतिक तनाव को देखते हुए अमेरिकी खुफिया प्रमुख का यह दौरा बेहद असामान्य माना जा रहा है। आमतौर पर इस प्रकार की उच्च स्तरीय खुफिया बैठकें अत्यंत गोपनीय रखी जाती हैं। यह दौरा दर्शाता है कि गंभीर मतभेदों के बावजूद दोनों देश रणनीतिक सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सीधी बातचीत के रास्ते खुले रखना चाहते हैं।

पुतिन को दी गई तुरंत जानकारी, संबंधों पर क्रेमलिन का रुख

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ किसी बैठक की संभावना पर स्पष्टीकरण देते हुए पेसकोव ने बताया कि जॉन रैटक्लिफ और राष्ट्रपति पुतिन के बीच कोई सीधी मुलाकात नहीं हुई है। हालांकि, पेसकोव ने यह साफ किया कि राष्ट्रपति पुतिन को विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और रूसी खुफिया एजेंसियों के बीच होने वाली हर बातचीत और गतिविधि की तुरंत और पूरी जानकारी दी जाती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को इस पूरे घटनाक्रम की लगातार अपडेट दी जा रही थी।

अमेरिका और रूस के बीच उपजे गंभीर संकट और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल पर पेसकोव ने सतर्क प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि इन वार्ताओं से दोनों देशों के संबंधों में सुधार होगा या नहीं। फिर भी, उन्होंने माना कि दोनों देशों की खुफिया एजेंसियों के बीच संवाद बना रहना एक सकारात्मक प्रक्रिया है। पेसकोव के अनुसार, कठिन से कठिन दौर में भी खुफिया स्तर पर बातचीत के रास्ते बने रहना कूटनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण होता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और पिछली यात्राओं का संदर्भ

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों का मॉस्को दौरा इतिहास में बहुत कम देखने को मिला है। रैटक्लिफ से पहले, नवंबर 2021 में सीआईए निदेशक विलियम बर्न्स ने मॉस्को की यात्रा की थी। उस समय बर्न्स ने रूसी नेतृत्व से मुलाकात कर यूक्रेन के खिलाफ किसी भी सैन्य कदम को लेकर चेतावनी दी थी। उस यात्रा के कुछ हफ्तों बाद ही यूक्रेन में सैन्य संघर्ष शुरू हो गया था, जिसके बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे और रूस वैश्विक मंच पर कूटनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गया था।

वर्ष 2021 के बाद से वाशिंगटन और मॉस्को के बीच प्रत्यक्ष कूटनीतिक संपर्क बेहद सीमित हो गए थे। व्यापारिक और वित्तीय प्रतिबंधों के कारण दोनों देशों के संबंध ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गए थे। ऐसे माहौल में जॉन रैटक्लिफ की यह मॉस्को यात्रा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की उस नीति की ओर इशारा करती है, जिसके तहत रूस के साथ रणनीतिक और सुरक्षा स्तर पर संवाद बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।

कीव के साथ समन्वय और परिचालन सुरक्षा उपाय

मॉस्को की इस उच्च स्तरीय यात्रा को गोपनीय रखने के साथ-साथ परिचालन सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया। प्रतिनिधिमंडल के मॉस्को रवाना होने से पहले अमेरिकी अधिकारियों ने यूक्रेन की सरकार को इस यात्रा की अग्रिम जानकारी दी थी। सुरक्षा कारणों से वाशिंगटन ने कीव से अनुरोध किया था कि जब तक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल मॉस्को में मौजूद है और वहां से सुरक्षित निकल नहीं जाता, तब तक रूसी ठिकानों पर सैन्य हमलों को अस्थायी रूप से रोक दिया जाए।

यूक्रेन के साथ इस प्रकार का समन्वय दर्शाता है कि संघर्ष क्षेत्र के करीब अमेरिकी अधिकारियों की यात्रा के दौरान सुरक्षा जोखिमों को कम करना कितना आवश्यक था। उच्च अधिकारियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हवाई रक्षा और सैन्य अभियानों में यह अस्थायी विराम आवश्यक माना गया।

विशेषज्ञों का आकलन और रणनीतिक महत्व

कूटनीतिक और सैन्य मामलों के विशेषज्ञों ने इस अघोषित यात्रा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। वर्ष 2019 से 2022 के बीच मॉस्को में ब्रिटिश सैन्य विशेषज्ञ के रूप में सेवा दे चुके जॉन फोरमैन ने कहा कि बिना किसी पूर्व घोषणा के इतने उच्च पदस्थ अमेरिकी अधिकारी का मॉस्को पहुंचना सामान्य बात नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि जब भी ऐसा कोई अचानक दौरा होता है, तो उसके पीछे कोई बड़ा रणनीतिक या सुरक्षा कारण अवश्य होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब पारंपरिक कूटनीतिक रास्ते बंद या बेहद सीमित हो जाते हैं, तब खुफिया एजेंसियां ही गुप्त संवाद का सबसे प्रभावी माध्यम बनती हैं। सीआईए निदेशक की यह यात्रा दोनों देशों के बीच गलतफहमियों को दूर करने, रणनीतिक सुरक्षा चिंताओं को साझा करने और अंतरराष्ट्रीय संकट के समय संचार के सीधे माध्यम बनाए रखने में मददगार साबित हो सकती है।

सवाल-जवाब

मॉस्को की अघोषित यात्रा पर कौन गया था?
अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने मॉस्को का अघोषित दौरा किया और रूसी खुफिया अधिकारियों के साथ बातचीत की।
क्या जॉन रैटक्लिफ ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की?
नहीं, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पुष्टि की कि जॉन रैटक्लिफ और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच कोई बैठक नहीं हुई, हालांकि पुतिन को तुरंत जानकारी दी गई थी।
इससे पहले किसी सीआईए निदेशक ने मॉस्को का दौरा कब किया था?
रैटक्लिफ से पहले नवंबर 2021 में तत्कालीन सीआईए निदेशक विलियम बर्न्स ने मॉस्को की यात्रा की थी।
क्या इस यात्रा के बारे में यूक्रेन को पहले से सूचित किया गया था?
हां, अमेरिकी पक्ष ने यात्रा से पहले यूक्रेन को सूचित किया था और प्रतिनिधिमंडल के मॉस्को में रहने के दौरान हमलों को अस्थायी रूप से रोकने का अनुरोध किया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·19 दिन पहले

डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ का यह अघोषित मॉस्को दौरा वाशिंगटन और क्रेमलिन के बीच रणनीतिक संवाद की बहाली की ओर इशारा करता है। हालांकि राष्ट्रपति पुतिन से सीधी मुलाकात नहीं हुई, लेकिन खुफिया चैनलों का खुला रहना यह बताता है कि गहरे भू-राजनीतिक तनाव के बीच भी दोनों महाशक्तियां सुरक्षा और कूटनीति के मोर्चे पर सीधे संपर्क के विकल्प को पूरी तरह बंद नहीं करना चाहतीं। आने वाले दिनों में यह चैनल वैश्विक सुरक्षा नीति पर क्या प्रभाव डालेगा, यह देखना अहम होगा।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·19 दिन पहले

यह अघोषित यात्रा दर्शाती है कि ट्रंप प्रशासन के तहत खुफिया कूटनीति को प्राथमिकता दी जा रही है। जब पारंपरिक राजनयिक मार्ग अवरुद्ध हों, तब बैक-चैनल वार्ताएं ही ऊर्जा गलियारों, तेल बाज़ार की स्थिरता और क्षेत्रीय संघर्षों से जुड़े जोखिमों को कम करने का एकमात्र व्यावहारिक माध्यम बचती हैं।

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