नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में 22 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि लगभग 300 विदेशी पर्यटक लापता बताए जा रहे हैं। लापता पर्यटकों में कम से कम 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा 90 से अधिक नेपाली नागरिक भी जलप्रलय की चपेट में आने के बाद से सुरागहीन हैं। संकट की इस घड़ी में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से टेलीफोन पर बातचीत की और स्थिति की जानकारी ली। प्रधानमंत्री मोदी ने संकटग्रस्त पड़ोसी देश को भारत की तरफ से तत्काल सहायता और राहत सामग्री भेजने का पूरा आश्वासन दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताई संवेदना, राहत सामग्री की तैयारियां तेज
नेपाल में बाढ़ के कारण हुए जान-माल के भारी नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के शीर्ष नेतृत्व से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस कठिन समय में अपने पड़ोसी देश के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार नेपाल को तत्काल मानवीय सहायता और जरूरी आपदा राहत सामग्री भेजने की तैयारियों में जुट गई है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत नेपाल में अपने भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने उल्लेख किया कि दोनों देशों की बचाव और राहत टीमें जमीनी स्तर पर मिलकर काम कर रही हैं। प्रधानमंत्री के इस संदेश का आधिकारिक लिंक X पर देखा जा सकता है, जिसमें उन्होंने संकटग्रस्त क्षेत्र के लिए मानवीय मदद की प्रतिबद्धता दोहराई।
सीमा पर एसएसबी की 18 टीमें तैनात, बिहार में अलर्ट घोषित
आपदा के गंभीर स्वरूप को देखते हुए सीमा सुरक्षा बल यानी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने तत्परता दिखाई है। एसएसबी ने नेपाल से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों का संचालन करने के लिए 18 विशेष टीमों की तैनाती की है। इसके अतिरिक्त 1,751 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित अपनी सभी यूनिटों और चौकियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
नेपाल में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने और प्रलयंकारी सैलाब के कारण भारत के सीमावर्ती राज्य बिहार में भी प्रशासनिक सतर्कता बढ़ा दी गई है। निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा देखते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
भोटेकोशी नदी क्षेत्र में सर्वाधिक तबाही, बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित
बाढ़ का सबसे घातक असर भोटेकोशी नदी के तटीय क्षेत्रों में देखा गया है। उफनती नदी के बहाव में दर्जनों इमारतें, वाहन और पुल बह गए। उत्तरी रसुवा में सीमा पर स्थित बॉर्डर आउटपोस्ट पर तैनात नेपाल आर्म्ड पुलिस फोर्स के चार जवान भी बाढ़ के तेज बहाव में लापता हो गए हैं। अचानक आए इस सैलाब ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
आपदा से बुनियादी ढांचे को भी भारी क्षति पहुंची है। नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के मुताबिक, बाढ़ के कारण देश की छह बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं और कई प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनों को नुकसान हुआ है। इसके अलावा मलबे और पानी के तेज बहाव के कारण नेपाल के कई राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गए हैं, जिससे यातायात और राहत पहुंच मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं।



















