पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के संवेदनशील क्षेत्रों में स्थिति एक बार फिर बेहद चिंताजनक और तनावपूर्ण हो गई है। स्थानीय प्रशासन और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के प्रतिनिधियों के बीच चल रहे वार्ता के सभी प्रयास पूरी तरह से विफल हो चुके हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए कमेटी ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी जायज मांगों पर अमल नहीं किया गया, तो पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जन-आंदोलन छेड़ दिया जाएगा।
48 घंटे का समय समाप्त और मांगों की अनदेखी
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तान सरकार को कुल 38 प्रमुख मांगों का एक चार्टर सौंपा था, जिन्हें पूरा करने के लिए 48 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दिया गया था। इन मांगों में महंगाई पर लगाम लगाना, कानून-व्यवस्था में सुधार लाना, स्थानीय संसाधनों पर वहां के निवासियों का हक सुनिश्चित करना और बिना वजह गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं को तत्काल प्रभाव से रिहा करना शामिल था। तय की गई समय सीमा बीत जाने के बाद भी सरकार की तरफ से कोई ठोस प्रतिक्रिया न मिलने पर आक्रोश और बढ़ गया है।
15 जुलाई से मुजफ्फराबाद की ओर कूच
अपनी मांगों पर दबाव बनाने के लिए कमेटी ने 15 जुलाई से रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक एक लॉन्ग मार्च शुरू करने की घोषणा की है। रावलाकोट जिला प्रशासन ने भी इस प्रस्तावित मार्च की पुष्टि की है, हालांकि अधिकारी फिलहाल इसे केवल एक घोषणा मानकर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। प्रदर्शन शुरू होने के बाद ही सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिहाज से प्रशासन कोई ठोस कदम उठाने की बात कह रहा है। 15 जुलाई की तारीख अब पीओके में सरकार और जनता के बीच संभावित टकराव के एक बड़े बिंदु के रूप में देखी जा रही है।
बातचीत का दौर खत्म
आंदोलनकारी नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अब शांतिपूर्ण संवाद के दरवाजे बंद हो चुके हैं। उनका स्पष्ट आरोप है कि पाकिस्तान सरकार और वहां की सेना लोगों की जायज आवाज को सुनने के बजाय ताकत के दम पर दबाने की कोशिश कर रही है। नेताओं ने कहा कि वे समाधान के लिए लगातार शांतिपूर्ण रास्ते अपना रहे थे, लेकिन सरकारी तंत्र द्वारा की जा रही दमनकारी नीतियों ने उन्हें इस कठिन रास्ते पर चलने के लिए मजबूर किया है।
छापेमारी और धरपकड़ का दौर
इस बीच, पीओके के विभिन्न हिस्सों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा दमनकारी कार्रवाई तेज कर दी गई है। विशेष रूप से तत्ता पानी इलाके में व्यापक छापेमारी की खबरें हैं। कमेटी ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि विरोध प्रदर्शनों को विफल करने के लिए महिलाओं और बच्चों को भी हिरासत में लिया जा रहा है, और कई प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारियां की गई हैं। प्रशासन इसे कानून व्यवस्था का मामला बताकर सही ठहरा रहा है, जबकि प्रदर्शनकारियों के अनुसार यह सिर्फ जनता को डराने की एक रणनीति है।
वैश्विक चिंता और विशेषज्ञों की राय
पीओके में गहराते इस संकट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोगों का ध्यान खींचा है। ब्रिटेन के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सरकार द्वारा बल प्रयोग की खुलकर आलोचना की है और ब्रिटिश प्रशासन से इसमें दखल की मांग की है। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान सरकार के सामने एक बड़ी दुविधा है। यदि वह सख्ती बरतती है, तो जनता का गुस्सा और भड़केगा। वहीं, यदि वह मांगें मानती है, तो देश के अन्य हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शनों का एक नया सिलसिला शुरू होने का डर बना रहेगा। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी अपने रुख पर अडिग है और आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।











