हाल ही में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन द्वारा मेहमानों को दिए गए एक विशेष उपहार ने वैश्विक स्तर पर उत्सुकता पैदा कर दी है। अंकारा में आयोजित इस समिट में हिस्सा लेने वाले सभी 32 नाटो सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों को एर्दोगन ने उनके नाम के साथ पर्सनलाइज्ड रिवॉल्वर और कारतूसों का एक बक्सा भेंट स्वरूप दिया। इस असाधारण उपहार के वितरण के बाद से ही कूटनीतिक गलियारों में यह बहस छिड़ गई है कि क्या सभी नेताओं ने इन रिवॉल्वर को स्वीकार कर अपने देशों में ले जाने का फैसला किया है।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री का निर्णय और कानूनी पेच
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की हो रही है। उन्हें भी अपने नाम की उत्कीर्ण रिवॉल्वर दी गई थी, लेकिन वह उसे अपने साथ ब्रिटेन नहीं ले जा सके। वर्तमान में, यह रिवॉल्वर तुर्की में ब्रिटिश अधिकारियों की कस्टडी में सुरक्षित रखी गई है। इसका मुख्य कारण ब्रिटेन का सख्त घरेलू कानून है, जिसके तहत किसी भी लाइव फायरआर्म को बिना पूर्व अनुमति और औपचारिक प्रक्रियाओं के देश में लाना गैरकानूनी माना जाता है। हालांकि तुर्की ने इस उपहार को ले जाने के लिए एक्सपोर्ट कंट्रोल में छूट देने वाला एक आधिकारिक पत्र भी प्रदान किया था, फिर भी ब्रिटिश कानून का पालन करना अनिवार्य था। अब योजना यह है कि इस रिवॉल्वर को पहले डीकमिशन किया जाएगा, ताकि इसे निष्क्रिय बनाकर इसे इस्तेमाल के अयोग्य बनाया जा सके। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसे ब्रिटेन भेजा जाएगा। फिलहाल, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस हथियार की कोई भी तस्वीर सार्वजनिक नहीं की है।
कनाडा का रुख और अन्य नेताओं की स्थिति
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस उपहार को निजी संपत्ति मानने के बजाय सीधे रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस यानी आरसीएमपी के सुपुर्द कर दिया। कनाडाई प्रशासन का स्पष्ट मत है कि प्रधानमंत्री न तो इस रिवॉल्वर को अपने आधिकारिक आवास पर ले जाएंगे और न ही इसे व्यक्तिगत तौर पर अपने पास रखेंगे। फिलहाल इसे सुरक्षा एजेंसी के पास डीकमिशनिंग की प्रक्रिया के लिए भेजा गया है। वहीं, उपहार के साथ मिले गोला-बारूद के बारे में स्पष्ट किया गया है कि वे तुर्की में ही छोड़ दिए जाएंगे।
वैश्विक नेताओं की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी उनके नाम अंकित रिवॉल्वर और एक्सपोर्ट छूट वाला दस्तावेज दिया गया था। हालांकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने इसे अपने साथ अमेरिका ले जाने का निर्णय लिया है या नहीं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज सहित अन्य नाटो नेताओं को भी बिल्कुल इसी तरह के उपहार मिले थे, लेकिन इन नेताओं ने अपने तोहफों के साथ क्या किया, इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई है।
उपहार की प्रकृति और सुरक्षा कानून
एर्दोगन ने समिट में शामिल सभी नेताओं को एकसमान रिवॉल्वर भेंट की थीं। इन हथियारों पर प्रत्येक संबंधित नेता का नाम खुदा हुआ था और साथ में लाइव गोलियां भी दी गई थीं। हालांकि यह एक प्रतीकात्मक उपहार हो सकता है, लेकिन विभिन्न देशों में हथियारों से जुड़े कड़े कानूनों ने इसे एक प्रशासनिक चुनौती में बदल दिया है। इसी कारण से ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों ने एहतियात बरतते हुए इन रिवॉल्वर को अपने सुरक्षा तंत्र के हवाले करना ही उचित समझा।











