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रसुवा में भोटेकोशी नदी के कहर के बाद अभिनेता सोनू सूद ने नेपाल बाढ़ पीड़ितों के लिए बढ़ाया सहायता का हाथदुनिया
26 अग॰ 2026, 11:08 pm (19 दिन पहले)· 2

रसुवा में भोटेकोशी नदी के कहर के बाद अभिनेता सोनू सूद ने नेपाल बाढ़ पीड़ितों के लिए बढ़ाया सहायता का हाथ

मध्य नेपाल के रसुवा में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से भारी तबाही हुई है, जिसमें 105 भारतीयों सहित सैकड़ों लोग लापता हैं। इस संकट के बीच बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद और अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना और सहायता का संकल्प व्यक्त किया है।

तिब्बत सीमा से सटे मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार की सुबह एक विनाशकारी प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है। रसुवा जिले के कई इलाकों में नदियों के उफान पर आने से जलप्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। बाढ़ के पानी ने तटीय बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे कई लोगों की जान चली गई है और सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। संकट की इस भीषण घड़ी में बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने एक बार फिर आगे आकर बाढ़ पीड़ितों की मदद करने की घोषणा की है।

भोटेकोशी नदी में उफान से नेपाल के रसुवा जिले में जनजीवन अस्त व्यस्त

आपदा प्रबंधन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, तिब्बत के पर्वतीय क्षेत्रों से निकलने वाली भोटेकोशी नदी का जलस्तर बुधवार सुबह तकरीबन 9 बजे अचानक बहुत तेजी से बढ़ना शुरू हुआ। देखते ही देखते नदी का पानी किनारों को तोड़ते हुए रसुवा जिले की सड़कों, रिहायशी इलाकों और बाजार क्षेत्रों में घुस गया। अचानक आई इस बाढ़ के कारण कई प्रमुख मार्ग और पुल पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं, जिससे संपर्क कट गया है। इसके अलावा विद्युत ट्रांसमिशन लाइनों और बिजली सब स्टेशनों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में ब्लैकआउट की स्थिति पैदा हो गई है।

नेपाल टूरिज्म द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस भीषण त्रासदी के बाद से कुल 384 यात्री लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 291 विदेशी पर्यटक शामिल हैं, जिनमें 105 भारतीय नागरिक भी हैं। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन सड़कों के टूटने और संचार नेटवर्क ठप होने से बचाव दल को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

सोशल मीडिया पर सोनू सूद का संदेश और राहत सामग्री भेजने की प्रतिबद्धता

नेपाल में मची इस तबाही की खबरें सामने आने के बाद अभिनेता सोनू सूद ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक भावनात्मक संदेश पोस्ट कर अपनी संवेदनाएं और सहायता व्यक्त की है। सोनू सूद ने अपनी पोस्ट में लिखा कि नेपाल के लोग इस मुश्किल वक्त में खुद को अकेला न समझें। उन्होंने लिखा कि उनकी टीम भोजन, अस्थाई आश्रय स्थल और पुनर्निर्माण की क्षमता के साथ पूरे सामर्थ्य के साथ मदद करने के लिए आ रही है।

सोनू सूद का यह कदम सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। इंटरनेट उपयोगकर्ताओं और उनके समर्थकों ने आपदा के समय तुरंत सक्रिय होने के लिए उनकी प्रशंसा की है। कई लोगों ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि संकट के क्षणों में किसी पीड़ित के साथ निस्वार्थ भाव से खड़े होना ही सच्ची मानवता का प्रतीक है, जबकि अन्य लोगों ने कहा कि सोनू सूद की यह तत्परता और करुणा समाज के लिए एक बेहतरीन प्रेरणा है।

अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने भी जताया दुख, लोगों से की प्रार्थना की अपील

नेपाली मूल की लोकप्रिय बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने भी अपने गृह देश में आई इस भयावह बाढ़ त्रासदी पर गहरा शोक प्रकट किया है। मनीषा कोइराला ने सोशल मीडिया पर संदेश साझा करते हुए बाढ़ से प्रभावित परिवारों और पूरे नेपाल देश के लिए लोगों से प्रार्थना करने की भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि बाढ़ की वजह से हुई क्षति अत्यंत चिंताजनक है और इस कठिन समय में सभी को एकजुट होकर पीड़ितों का संबल बनना चाहिए।

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सवाल-जवाब

नेपाल के किस जिले में बाढ़ से भारी तबाही हुई है?
मध्य नेपाल में तिब्बत सीमा से लगे रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी के अचानक उफान पर आने से भारी तबाही हुई है।
नेपाल बाढ़ में कितने भारतीय नागरिक लापता बताए गए हैं?
नेपाल पर्यटन के आंकड़ों के अनुसार, कुल 384 लापता यात्रियों में 291 विदेशी पर्यटक और 105 भारतीय नागरिक शामिल हैं।
अभिनेता सोनू सूद ने बाढ़ पीड़ितों के लिए क्या घोषणा की है?
सोनू सूद ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर बाढ़ प्रभावितों के लिए भोजन, अस्थाई शेल्टर और पुनर्निर्माण कार्य में पूरी क्षमता से मदद की घोषणा की है।
अभिनेत्री मनीषा कोइराला की क्या प्रतिक्रिया रही?
नेपाली मूल की अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने सोशल मीडिया पर इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए नेपाल के लिए प्रार्थना करने की अपील की है।
भोटेकोशी नदी का जलस्तर कब बढ़ना शुरू हुआ?
बुधवार सुबह तकरीबन 9 बजे तिब्बत से निकलने वाली भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बहुत तेजी से बढ़ना शुरू हुआ।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 दिन पहले

रसुवा में भोटेकोशी नदी की इस आपदा में 105 भारतीयों समेत 384 लोगों का लापता होना एक गंभीर सुरक्षा और आपदा प्रबंधन संकट है। इस स्थिति में राहत सामग्री और आश्रय का आश्वासन मानवीय सहायता के लिहाज से सराहनीय है, लेकिन मुख्य चुनौती दुर्गम इलाकों में त्वरित बचाव अभियानों को अंजाम देना और सीमा पार समन्वय स्थापित करना होगी।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·18 दिन पहले

रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी के उफान से उपजी यह आपदा नेपाल और भारत के बीच साझा पर्वतीय पारिस्थितिकी और जलवायु संवेदनशीलता को रेखांकित करती है। नदी का जलस्तर बढ़ना और 105 भारतीय नागरिकों सहित सैकड़ों लोगों का लापता होना क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन प्रणालियों पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है। ऐसे भू-राजनीतिक और आर्थिक रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में त्वरित और समन्वित राहत कार्यों के साथ-साथ एक मजबूत पूर्व-चेतावनी तंत्र विकसित करना अब बेहद आवश्यक हो गया है, ताकि भविष्य में इस तरह के मानवीय संकटों से समय रहते निपटा जा सके।

Li Wei@li-wei·18 दिन पहले

यह आपदा केवल एक स्थानीय प्राकृतिक दुर्घटना नहीं है, बल्कि सीमा पार नदी घाटियों में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते जोखिमों का स्पष्ट संकेत है। तिब्बत के पर्वतीय क्षेत्रों से सटी इन नदियों में बिना पूर्व सूचना के आने वाला जलप्रलय द्विपक्षीय व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बुरी तरह प्रभावित करता है। भारत और नेपाल के बीच जल संसाधन प्रबंधन और डेटा साझा करने की मौजूदा व्यवस्था को और अधिक उन्नत बनाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह के सीमा-पार जल संकटों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके और पर्यटकों व नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

Rohan Verma@rohan-verma·19 दिन पहले

रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी के उफान से 105 भारतीयों सहित सैकड़ों लोगों के लापता होने की यह घटना भारत और नेपाल के बीच पर्वतीय जल प्रबंधन और त्वरित आपदा सूचना तंत्र के साझाकरण पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बुनियादी ढाँचे के ध्वस्त होने और संचार ठप होने से सीमावर्ती क्षेत्रों में बचाव अभियान बेहद जटिल हो गया है, जिससे दोनों देशों की सरकारों को सामरिक और मानवीय स्तर पर तुरंत ठोस समन्वय बनाने की आवश्यकता है ताकि फंसे हुए नागरिकों तक समय पर राहत पहुँच सके।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·19 दिन पहले

यह आपदा न केवल मानवीय संकट है, बल्कि भारत और नेपाल के बीच पर्वतीय नदी प्रणालियों के डेटा साझाकरण और सीमा पार आपदा चेतावनी तंत्र की कमजोरी को भी उजागर करती है। जब तक दोनों देश मौसम और जलस्तर के पूर्वानुमान के लिए रियल-टाइम मेकैनिज्म विकसित नहीं करते, तब तक ऐसे अचानक आने वाले सैलाबों में नागरिकों और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना कठिन रहेगा। इस घटना से कूटनीतिक स्तर पर भी आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता देने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

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