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सूडान के रेड सी राज्य में अवैध सोने की खदान ढहने से 11 खनिकों की मौत, 30 से अधिक घायलदुनिया
21 सित॰ 2026, 8:06 am (3 घंटे पहले)· 0

सूडान के रेड सी राज्य में अवैध सोने की खदान ढहने से 11 खनिकों की मौत, 30 से अधिक घायल

सूडान के रेड सी राज्य स्थित ओनी इलाके में शनिवार देर रात एक अवैध सोने की खदान ढहने से कम से कम 11 मजदूरों की मौत हो गई और 30 से अधिक घायल हो गए।

गंभीर गृहयुद्ध और भुखमरी के संकट से जूझ रहे अफ्रीकी देश सूडान में सात दिनों के भीतर खनन से जुड़ी दूसरी बड़ी आपदा सामने आई है। पूर्वोत्तर सूडान के रेड सी राज्य अंतर्गत सुदूर ग्रामीण इलाके ओनी में शनिवार देर रात गैर-कानूनी ढंग से संचालित सोने की खदान की मुख्य सुरंग अचानक जमींदोज हो गई। इस भीषण दुर्घटना में कम से कम 11 मजदूरों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया, जबकि 30 से अधिक मजदूर गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं। सुरंग के मलबे में अभी भी कई अन्य श्रमिकों के फंसे होने का अंदेशा बना हुआ है, जिसे देखते हुए राहत एवं बचाव दल लगातार बचाव कार्य चला रहे हैं।

ओनी इलाके में देर रात घटी दुर्घटना

सूडान के पूर्वोत्तर हिस्से में स्थित ओनी क्षेत्र में यह हादसा उस वक्त हुआ जब खदान के अंदर दर्जनों श्रमिक सामान्य कामकाज में जुटे हुए थे। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शी अब्देलहाई खरीफ अबाकर ने बताया कि शनिवार देर रात अचानक खदान की मुख्य शाफ्ट भरभराकर गिर गई, जिससे नीचे काम कर रहे लोगों को बाहर निकलने का कोई मौका नहीं मिला। दुर्घटना के तुरंत बाद अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोगों ने प्रशासन के साथ मिलकर मलबे में दबे खनिकों को निकालने का प्रयास शुरू किया। घायलों को उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचाया गया है, जिनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है।

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हफ्ते भर पहले पश्चिमी हिस्से में मारे गए थे 82 मजदूर

सूडान में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी के बीच संचालित हो रही अनधिकृत खदानें कामगारों के लिए अत्यंत जानलेवा साबित हो रही हैं। शनिवार की इस त्रासदी से ठीक पहले 16 सितंबर को देश के पश्चिमी इलाके में कई सोने की खदानें एक के बाद एक ढह गई थीं। उस भयावह हादसे में कम से कम 82 मजदूरों की जान चली गई थी। वह पश्चिमी क्षेत्र पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के नियंत्रण वाले दायरे में स्थित है। चंद दिनों के अंतराल पर हुए इन दो बड़े हादसों ने देश में बिना किसी निगरानी चल रहे खनन नेटवर्क के गंभीर खतरों को पूरी तरह उजागर कर दिया है।

गृहयुद्ध और भुखमरी के बीच अवैध खनन का प्रसार

सूडान पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से सेना और पैरामिलिट्री बलों के बीच जारी भीषण गृहयुद्ध की चपेट में है। इस हिंसक टकराव की वजह से देश के कई हिस्से भयंकर अकाल और भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं। अर्थव्यवस्था के पूरी तरह चरमरा जाने और रोजगार के वैध साधन खत्म होने के कारण लाखों गरीब नागरिक पेट भरने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर इन अनियंत्रित खदानों में मजदूरी करने पर मजबूर हैं।

वर्तमान में देश भर में हजारों ऐसी छोटी और गैर-कानूनी खदानें सक्रिय हैं, जहां कामगारों की हिफाजत के लिए कोई भी बुनियादी सुरक्षा बंदोबस्त मौजूद नहीं है। युद्धग्रस्त हालात और प्रभावी सरकारी नियंत्रण के अभाव के चलते इन अवैध स्थलों पर लगातार जानलेवा घटनाएं हो रही हैं। प्रशासनिक दल और स्थानीय कर्मी अब भी ओनी में गिरे मलबे को हटाकर लापता मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं।

सवाल-जवाब

सूडान में खदान हादसा किस जगह हुआ?
यह दुर्घटना पूर्वोत्तर सूडान के रेड सी राज्य के अंतर्गत ओनी नामक सुदूर इलाके में स्थित सोने की खदान में हुई।
इस हादसे में कितने लोग हताहत हुए हैं?
घटनास्थल पर कम से कम 11 खनिकों की जान चली गई, जबकि 30 से अधिक मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
क्या खदान के मलबे में और भी मजदूर फंसे हैं?
हां, मलबे के नीचे कई अन्य श्रमिकों के दबे होने की आशंका है और राहत एवं बचाव दल लगातार खोज अभियान चला रहे हैं।
इससे पहले सूडान में बड़ा खदान हादसा कब हुआ था?
इससे पहले 16 सितंबर को देश के पश्चिमी हिस्से में कई सोने की खदानें ढहने से कम से कम 82 मजदूरों की मौत हुई थी।
सूडान में लोग ऐसी खतरनाक खदानों में काम करने को क्यों मजबूर हैं?
तीन साल से जारी गृहयुद्ध और भुखमरी के कारण लोग आजीविका के अभाव में अपनी जान जोखिम में डालकर इन अवैध खदानों में काम करते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·1 घंटे पहले

सूडान का यह संकट केवल एक स्थानीय दुर्घटना नहीं, बल्कि उस गहरी आर्थिक तबाही का परिणाम है जहाँ गृहयुद्ध और भुखमरी ने नागरिकों को जान जोखिम में डालने पर विवश कर दिया है। जब राज्य की अर्थव्यवस्था चरमरा जाती है और वैध रोजगार समाप्त हो जाते हैं, तब अनियंत्रित और अवैध गतिविधियां ही जीवनयापन का एकमात्र साधन बन जाती हैं। इस प्रकार की सुरक्षा विहीन व्यवस्थाएं आने वाले समय में और अधिक मानवीय त्रासदियों को जन्म देंगी, जब तक संघर्षरत पक्ष मानवीय प्राथमिकताओं और बुनियादी सुरक्षा मानकों को बहाल नहीं करते।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

सूडान में जारी गृहयुद्ध और आर्थिक तबाही के कारण लोग पेट भरने के लिए खतरनाक अवैध खदानों में काम करने को मजबूर हैं। सरकारी नियंत्रण और सुरक्षा मानकों के पूरी तरह अभाव में इस तरह के हादसे लगातार बढ़ रहे हैं। यदि संघर्षरत पक्ष और प्रशासनिक मशीनरी ने जल्द ही इन क्षेत्रों में अनियंत्रित खनन को विनियमित नहीं किया, तो इस तरह की मानवीये त्रासदियों और जनहानि को रोकना असंभव होगा।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·1 घंटे पहले

सूडान के भू-राजनीतिक और आर्थिक संकट ने केवल आम जनजीवन को ही नहीं झकझोरा, बल्कि अनियंत्रित संसाधन दोहन को भी एक बड़े अभिशाप में बदल दिया है। देश की अर्थव्यवस्था के पूरी तरह चरमराने और वैध रोजगार के स्रोत सूखने के कारण यह अवैध खनन नेटवर्क अब क्षेत्रीय स्थिरता और मानवीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर संकट बन चुका है। यदि इस अराजकता पर तत्काल नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह संकट निकट भविष्य में और अधिक भीषण मानवीय त्रासदियों को जन्म देगा।

Rohan Verma@rohan-verma·2 घंटे पहले

सूडान में गृहयुद्ध और भुखमरी के बीच अवैध खनन का यह संकट इस बात का प्रमाण है कि जब शासन और वैध अर्थव्यवस्था ढह जाती है, तो गरीब नागरिक पेट भरने के लिए मौत के कुएं में उतरने को मजबूर हो जाते हैं। एक हफ्ते के भीतर दो बड़े हादसों में लगभग एक सौ जानें जाना यह संकेत देता है कि सुरक्षा मानकों के अभाव और सरकारी नियंत्रण के बिना यह जानलेवा सिलसिला तब तक थमेगा नहीं जब तक देश में राजनीतिक स्थिरता और बुनियादी आजीविका के वैध साधन बहाल नहीं होते।

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 घंटे पहले

सूडान का यह घटनाक्रम केवल एक स्थानीय खनन दुर्घटना नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक विफलता और शासन के पूर्ण पतन का प्रत्यक्ष परिणाम है। जब राष्ट्रव्यापी संघर्ष अर्थव्यवस्था को तबाह कर देता है, तो प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन न केवल मानवीय संकट को गहराता है, बल्कि क्षेत्रीय अस्थिरता को भी बढ़ावा देता है। जब तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस आंतरिक संघर्ष को रोककर वैध आर्थिक ढांचे और प्रशासनिक नियंत्रण को बहाल नहीं करता, तब तक आम नागरिकों का इस तरह अकाल और युद्ध की दोहरी मार से दम तोड़ना जारी रहेगा।

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