इंडोनेशिया के विशाल जंगलों में महीनों पहले भड़की भीषण आग ने पर्यावरण और जनजीवन को संकट में डाल दिया है। इस आपदा के कारण उठने वाला जहरीला धुआं अब आसपास के कई देशों तक फैल चुका है, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि अगस्त से लेकर अब तक चार लाख से ज्यादा लोग श्वसन तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारियों के शिकार हो चुके हैं। देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि संक्रमितों का यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है, जो स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
पड़ोसी देशों तक फैला जहरीला धुआं और प्रभावित क्षेत्र
बोर्नियो, सुमात्रा और पापुआ के जंगलों में लगी इस आग का दायरा इतना बड़ा हो चुका है कि इसका असर मलेशिया, सिंगापुर, फिलीपींस और ब्रुनेई तक महसूस किया जा रहा है। इन सभी पड़ोसी देशों के कई हिस्सों में हवा की गुणवत्ता इतनी गिर चुकी है कि उसे खतरनाक श्रेणी में रखा गया है। विजिबिलिटी बेहद कम होने और जहरीली हवा के कारण लोगों ने घरों से बाहर निकलना लगभग बंद कर दिया है। आसमान में धुएं की एक मोटी और घनी चादर छाई हुई है, जिससे सूरज की रोशनी भी धुंधली पड़ गई है।
अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़ और बच्चों पर भारी संकट
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त से 2 नवंबर के बीच सुमात्रा और बोर्नियो के सात सबसे अधिक प्रभावित प्रांतों में श्वसन संक्रमण के कुल 4,01,686 मामले सामने आए हैं। इन क्षेत्रों के अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों में मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जहां डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को दिन-रात मरीजों का इलाज करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इस जहरीले धुएं की सबसे डरावनी तस्वीर छोटे बच्चों के मोर्चे पर सामने आई है, क्योंकि इससे सबसे ज्यादा नुकसान मासूमों को उठाना पड़ा है।
कुल मामलों में से 91 हजार से ज्यादा बच्चे ऐसे हैं जिनकी उम्र पांच साल या उससे कम है, जबकि लगभग 87 हजार बच्चे छह से नौ साल की आयु वर्ग के हैं। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र के बच्चों का फेफड़ा तंत्र बेहद संवेदनशील होता है, जिसके कारण यह जहरीली हवा उनके शरीर को सबसे तेज गति से और गंभीर रूप से प्रभावित करती है।
पांच खतरनाक बीमारियां और पीएम 2.5 का रिकॉर्ड स्तर
हवा में प्रदूषण का स्तर इतना खतरनाक हो गया है कि लोग केवल सांस की तकलीफ ही नहीं झेल रहे, बल्कि निमोनिया, दस्त, आंखों में संक्रमण, त्वचा संबंधी समस्याएं और हीट स्ट्रोक जैसी पांच गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं। सेंट्रल कालिमंतन के पालांगाकाराया शहर में स्थिति तब और भयावह हो गई जब अक्टूबर के महीने में वहां पीएम 2.5 का स्तर 3,340 के आंकड़े को छू गया, जो सामान्य सुरक्षित सीमा से कई गुना ज्यादा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के मानकों के मुताबिक, चौबीस घंटे के भीतर पीएम 2.5 का सुरक्षित स्तर 25 तय किया गया है, लेकिन इंडोनेशिया के कई प्रमुख शहरों में यह पैमाना पांच सौ के आंकड़े को भी पार कर चुका है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, केवल सितंबर महीने के दौरान इस जहरीले धुएं की वजह से देश में करीब 3,560 लोगों की असमय जान जा चुकी है, जिससे पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल इंडोनेशिया में जंगलों की आग पिछले एक दशक के दौरान सबसे अधिक विकराल साबित हुई है। इस साल जनवरी से सितंबर के बीच लगभग 19 लाख एकड़ जमीन जलकर पूरी तरह राख हो चुकी है। विश्लेषकों का कहना है कि बजट में की गई भारी कटौती के चलते नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी प्रभावी तरीके से राहत और बचाव कार्य नहीं चला पा रही है, जिसके कारण आने वाले दिनों में हालात के और अधिक गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।


















