अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच दशकों पुरानी सैन्य साझेदारी अब एक बेहद नाटकीय और तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुकी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों के सामने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर करते हुए बताया कि दक्षिण कोरिया ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में किसी भी तरह की मदद देने से साफ इनकार कर दिया है। यह सीधा इनकार दोनों देशों के कूटनीतिक और रक्षा संबंधों में एक बड़े विवाद की वजह बन गया है। ट्रंप के तीखे तेवर और इस मामले पर लिया गया उनका एक्शन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
फोन पर मिला सीधा इनकार और ट्रंप का कड़ा रुख
पूरी घटना की शुरुआत तब हुई जब डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग को फोन लगाया। बातचीत के दौरान ट्रंप ने साफ शब्दों में पूछा कि क्या उनका देश ईरान के मामले में अमेरिका की मदद करेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर वे चाहें तो कर सकते हैं, क्योंकि अमेरिका को वैसे इसकी कोई खास जरूरत नहीं है। इसके जवाब में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की तरफ से सीधा नो थैंक्स कह दिया गया। ना सुनने की आदत न होने के कारण यह जवाब डोनाल्ड ट्रंप को बेहद नागवार गुजरा। ट्रंप ने तल्ख लहजे में कहा कि अमेरिका के 39 हजार सैनिक उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से उनकी रक्षा के लिए वहां तैनात हैं, लेकिन जब उनके पड़ोसी और सहयोग की बारी आती है तो वे पीछे हट जाते हैं। ट्रंप का कहना था कि सहयोगी देश जब इस तरह मुंह मोड़ते हैं, तो अमेरिका अरबों डॉलर खर्च करके उनकी सुरक्षा का बोझ क्यों उठाए।
नाटो का जिक्र और रक्षा मंत्री को बड़ा निर्देश
इस पूरी तनातनी के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे पहले ही नाटो देशों के रवैये से आहत हैं और अब दक्षिण कोरिया का यह रुख उनके उस पुराने सवाल को और पुख्ता करता है कि अमेरिका अन्य देशों की रक्षा के लिए अंतहीन धन क्यों खर्च करे। ट्रंप की नाराजगी केवल जुबानी बयानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने तुरंत ठोस कदम उठाया। उन्होंने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को यह सख्त आदेश जारी कर दिया कि दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों को जितना संभव हो सके, उतना कम कर दिया जाए।
ट्रुथ सोशल पर पोस्ट और उत्तर कोरिया के साथ समीकरण
अपने आधिकारिक रुख को स्पष्ट करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट भी साझा की, जिसमें उन्होंने साफ किया कि वे इन सैन्य अभ्यासों के वर्तमान स्वरूप से बिल्कुल खुश नहीं हैं। इस दौरान ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेतृत्व के साथ अपने अच्छे संबंधों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि किम जोंग उन की सरकार का रवैया उनकी तरफ सम्मानजनक रहा है, ऐसे में शत्रुतापूर्ण और महंगे सैन्य अभ्यास चलाना पूरी तरह अनुचित है। हालांकि इन अभ्यासों को पूरी तरह से रद्द करना संभव नहीं था, इसलिए प्रशासन ने इन्हें बड़े पैमाने पर घटाने का निर्णय लिया, जो दक्षिण कोरियाई सरकार के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है।
दक्षिण कोरिया की सफाई और कूटनीतिक हलचल
इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद दक्षिण कोरियाई प्रशासन डैमेज कंट्रोल में जुट गया है। देश की तरफ से यह सफाई दी गई है कि वह ईरान में युद्धविराम लागू करने और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की आजादी बहाल करने के लिए वाशिंगटन के साथ कूटनीतिक और व्यावहारिक स्तर पर लगातार मंत्रणा कर रहा है। दक्षिण कोरिया यह अच्छी तरह जानता है कि डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी मोल लेना उसके हित में नहीं है, इसलिए वह पूरी तरह से दूरी भी नहीं बना रहा है, हालांकि ट्रंप द्वारा मांगी गई सीधी सैन्य सहायता देने से वह कतराता नजर आ रहा है। यह पूरा विवाद इस बात की तस्दीक करता है कि अमेरिका अब अपनी उस पुरानी नीति पर पुनर्विचार कर रहा है जिसके तहत वह बिना किसी शर्त या आपसी सहयोग के अपने सहयोगियों की सुरक्षा का सारा खर्च खुद उठाता रहा है।



















