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बलूचिस्तान में अपना झंडा, मुद्रा और एक लाख लड़ाकों का दावा, बीएलए ने गिनाए हमलों के आंकड़ेपाकिस्तान
17 अग॰ 2026, 11:32 pm (1 दिन पहले)· 3

बलूचिस्तान में अपना झंडा, मुद्रा और एक लाख लड़ाकों का दावा, बीएलए ने गिनाए हमलों के आंकड़े

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने प्रांत के करीब 85 फीसदी हिस्से पर नियंत्रण और लगभग एक लाख लड़ाकों के होने का दावा किया है, साथ ही आठ दिनों में 22 हमलों में 26 सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने का भी दावा किया गया है, जिसकी अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.

बलूचिस्तान में सक्रिय अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने चौंकाने वाला दावा किया है कि प्रांत के करीब 85 फीसदी हिस्से पर उसका नियंत्रण है और संगठन के पास लगभग एक लाख लड़ाके मौजूद हैं. साथ ही बीएलए ने पिछले आठ दिनों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर 22 हमलों को अंजाम देकर 26 जवानों के मारे जाने का भी दावा किया है, हालांकि इन आंकड़ों की किसी स्वतंत्र सूत्र या पाकिस्तान सरकार ने पुष्टि नहीं की है.

लड़ाकों की तादाद और जनसमर्थन का दावा

बीएलए का कहना है कि संगठन को बलूच समुदाय के आम लोगों का व्यापक समर्थन हासिल है और यही वजह है कि उसके करीब एक लाख लड़ाके पाकिस्तानी सेना के खिलाफ दो मोर्चों पर सक्रिय हैं, एक तरफ पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में गुरिल्ला तरीके से लड़ाई और दूसरी तरफ शहरों के भीतर सुनियोजित हमले. बलूच नेता मीर यार बलूच से जब हथियारों के स्रोत को लेकर सवाल किया गया तो उनका जवाब सीधा था, उनके मुताबिक संगठन बार-बार पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर धावा बोलकर वहीं से हथियार जुटाता है. हालांकि बीएलए के पास वाकई कितने लड़ाके हैं और उनके पास कितना असला बारूद मौजूद है, इसकी पुष्टि करने वाला कोई स्वतंत्र और भरोसेमंद आंकड़ा फिलहाल मौजूद नहीं है, इसलिए संगठन के इन दावों को सावधानी से ही देखा जाना चाहिए.

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आठ दिन में 22 हमलों का दावा, कई शहर निशाने पर

बीएलए के मुताबिक बीते सिर्फ आठ दिनों के भीतर संगठन ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर 22 अलग-अलग हमले किए, जिनमें कुल 26 सुरक्षाकर्मियों की जान जाने का दावा किया गया है. संगठन का कहना है कि कलात और सोराब में विस्फोटकों से किए गए हमलों में अकेले 20 सुरक्षाकर्मी मारे गए. इसके अलावा चागाई, खरान और पंजगुर में पुलिस चौकियों और सुरक्षा ठिकानों को निशाना बनाने की बात भी सामने आई है. नुश्की, तुरबत और राजधानी क्वेटा में भी एक साथ कई हमले किए जाने की जिम्मेदारी बीएलए ने ली है. चागाई में व्यावसायिक वाहनों पर हमला करने और रेलवे पटरी को नुकसान पहुंचाने का दावा भी संगठन ने किया, जिससे साफ है कि अलगाववादी हिंसा अब बलूचिस्तान के कई अलग-अलग जिलों तक अपना दायरा बढ़ा चुकी है. पाकिस्तान सरकार ने अभी तक इन दावों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं दी है.

2025 में हिंसा का ग्राफ कितना ऊपर गया

पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के आंकड़े बताते हैं कि साल 2025 में बलूचिस्तान में कम से कम 254 आतंकी हमले दर्ज किए गए, जिनमें 1026 लोग हताहत हुए. यह संख्या 2024 के मुकाबले करीब 26 फीसदी ज्यादा है, यानी हर गुजरते साल के साथ प्रांत में हिंसा की रफ्तार तेज होती जा रही है. बीएलए ने खुद दावा किया था कि उसने 2025 में कुल 521 हमले किए और इनमें बड़ी तादाद में पाकिस्तानी सैन्यकर्मी मारे गए, हालांकि स्वतंत्र स्रोतों में इससे काफी कम मौतों का जिक्र मिलता है. संगठन से जुड़े हमलों में आत्मघाती धमाके, विस्फोट, सुरक्षा काफिलों पर घात लगाकर किया गया हमला और सैन्य ठिकानों के साथ-साथ रेलवे व संचार नेटवर्क को निशाना बनाना जैसे तरीके शामिल रहे हैं.

नए साल में भी नहीं थमा हमलों का सिलसिला

2026 की शुरुआत भी बलूचिस्तान के लिए शांत नहीं रही. 30 और 31 जनवरी को बीएलए ने राजधानी क्वेटा समेत प्रांत के कई जिलों में एक साथ 12 हमले करने का दावा किया. इन हमलों में सैन्य चौकियों, पुलिस थानों, बैंकों, एक हाई-सिक्योरिटी जेल के साथ-साथ स्कूलों और बाजारों को भी निशाना बनाया गया. पाकिस्तानी अधिकारियों ने शुरुआती जानकारी में करीब 50 लोगों के मारे जाने की बात स्वीकार की थी. इसके बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने करीब 40 घंटे तक लगातार अभियान चलाया और दावा किया कि इस दौरान उन्होंने 145 बीएलए लड़ाकों को ढेर कर दिया.

85 फीसदी इलाके पर कब्जे के साथ अपना झंडा और मुद्रा तक का दावा

बीएलए ने हाल ही में यह भी दावा किया है कि बलूचिस्तान के करीब 85 फीसदी भूभाग पर उसी का नियंत्रण है. संगठन का कहना है कि उसका अपना अलग राष्ट्रगान और झंडा है, यहां तक कि उसने अपनी मुद्रा का नाम भी बलूची फलूस बताया है. गौरतलब है कि बीएलए एक प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन है, इसलिए इसके इन तमाम दावों को उसके राजनीतिक और सैन्य प्रचार अभियान की कड़ी के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, न कि सत्यापित तथ्य के तौर पर.

बलूचिस्तान में हिंसा की जड़ आखिर है क्या

बलूचिस्तान रकबे के लिहाज से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक संसाधनों के मामले में भी बेहद संपन्न माना जाता है, लेकिन यही दौलत दशकों से यहां टकराव की जड़ बनी हुई है. संसाधनों पर हक, राजनीतिक उपेक्षा और सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई को लेकर स्थानीय आबादी में गहरा असंतोष रहा है. बीएलए समेत कई बलूच अलगाववादी गुट पाकिस्तान से पूरी तरह अलग होकर आजाद बलूचिस्तान की मांग करते हैं, वहीं इस्लामाबाद इन संगठनों को हथियारबंद विद्रोही और आतंकी करार देता है. लगातार बढ़ते हमले अब सिर्फ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के लिए सिरदर्द नहीं रह गए हैं, रेलवे लाइनों, सड़कों और संचार तंत्र पर बार-बार हो रहे हमलों का सीधा असर आम बलूच नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन और प्रांत की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है.

सवाल-जवाब

बीएलए ने कितने लड़ाकों के होने का दावा किया है?
बीएलए का कहना है कि उसके पास करीब एक लाख लड़ाके मौजूद हैं.
बीएलए ने आठ दिनों में कितने हमले करने का दावा किया?
संगठन का दावा है कि उसने आठ दिनों में 22 हमले किए, जिनमें 26 सुरक्षाकर्मी मारे गए.
कलात और सोराब में हुए हमलों में कितने लोग मारे गए?
बीएलए के मुताबिक इन दोनों जगहों पर विस्फोटकों से किए गए हमलों में 20 सुरक्षाकर्मी मारे गए.
2025 में बलूचिस्तान में कुल कितने आतंकी हमले हुए?
पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के मुताबिक 2025 में कम से कम 254 हमले हुए, जिनमें 1026 लोग हताहत हुए.
जनवरी 2026 में बीएलए ने कौन से हमले किए?
30 और 31 जनवरी को बीएलए ने क्वेटा समेत कई जिलों में एक साथ 12 हमलों का दावा किया.
पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में क्या दावा किया?
करीब 40 घंटे के अभियान में सुरक्षा बलों ने 145 बीएलए लड़ाकों को मारने का दावा किया.
बीएलए किस इलाके पर नियंत्रण होने का दावा करता है?
संगठन का कहना है कि उसका बलूचिस्तान के करीब 85 फीसदी हिस्से पर नियंत्रण है.
क्या इन सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि हुई है?
नहीं, इनमें से किसी भी दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पाकिस्तान सरकार ने भी इन्हें आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया है.
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