दफ्तरों में नए सहकर्मी आ रहे हैं, लेकिन वे इंसान नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट हैं। भाषा मॉडल पर आधारित ये सिस्टम बिना किसी इंसानी मदद के अपने आप काम करने में माहिर होते हैं और आजकल कंपनियां इन्हें डिजिटल कर्मचारियों के रूप में धड़ल्ले से बेच रही हैं। इन एजेंटों को चौबीस घंटे उपलब्ध रहने वाले, कभी न शिकायत करने वाले और सुपरहुमन क्षमता दिखाने वाले आदर्श वर्कर के रूप में पेश किया जा रहा है।
दफ्तरों की बदलती शब्दावली और भाषा का संकट
इस बात पर बहुत कम चर्चा हो रही है कि इन डिजिटल एजेंटों के साथ हकीकत में काम करना कैसा अनुभव होता है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की पार्टनर जूली बेनार्ड ने तीन साल पहले इस बात पर गौर किया था कि लोग दफ्तर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में किस तरह अस्पष्ट बातें करते हैं। चैटजीपीटी के तेजी से प्रसार ने जब अधिकारियों को यह यकीन दिला दिया कि यह तकनीक उत्पादकता में भारी उछाल ला सकती है, तब भाषा का यह संकट सामने आया। जूली बेनार्ड ने बताया कि लोगों के पास इसके लिए सही शब्द नहीं थे और वे समझ नहीं पा रहे थे कि इसे टूल कहें या टीम का साथी या फिर सहकर्मी।
कॉरपोरेट जगत में डिजिटल कर्मचारियों की एंट्री
जब माइक्रोसॉफ्ट का कोपायलट और गूगल का जेमिनी फॉर वर्कस्पेस जैसे प्लेटफॉर्म साल 2023 में आए, तो इन्हें मुख्य रूप से कर्मचारियों के लिए एक टूल के रूप में विज्ञापित किया गया था। लेकिन जनवरी में जब जूली बेनार्ड और उनके सहयोगियों ने 1,261 प्रबंधकों का सर्वे किया, तो उनमें से 22 फीसदी ने कहा कि उनके संगठनों ने कॉरपोरेट ऑर्ग चार्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंटों को शामिल कर लिया है। यह प्रतिशत और बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि दर्जनों स्टार्टअप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कर्मचारियों की सेवाएं दे रहे हैं और बड़ी तकनीकी कंपनियां अपने स्वायत्त एजेंटों का खूब प्रचार कर रही हैं। उदाहरण के लिए, जून में माइक्रोसॉफ्ट ने स्काउट नाम का एक एजेंट लॉन्च किया था, जिसे मीटिंग रीशेड्यूल करने और ईमेल का ड्राफ्ट तैयार करने जैसे काम पूरे करने के लिए बनाया गया था। माइक्रोसॉफ्ट स्काउट के कॉरपोरेट उपाध्यक्ष उमर शाहिन ने इसके लॉन्च के समय कहा था कि आपकी कंपनी मूल रूप से आपका सहायक किराए पर लेती है।
मानव जैसे लक्षण और भावनात्मक जुड़ाव
इन एजेंटों की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वे वित्तीय मुनाफा देने के साथ-साथ मौजूदा कार्यबल के साथ तालमेल बिठाकर काम कर पाते हैं या नहीं। इसी वजह से कंपनियों ने ऐसे एजेंट तैयार किए हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के फायदों के साथ इंसानी जैसी खूबियों से लैस होते हैं, ताकि कर्मचारी अपने नए साथियों से भावनात्मक रूप से जुड़ सकें। अगस्त में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहकर्मी बाजार में स्काइडाइव नाम के प्लेटफॉर्म के साथ उतरने वाले एनीथिंग स्टार्टअप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ध्रुव अमीन ने बताया कि लोग एजेंट का सम्मान करने लगते हैं और गहरा जुड़ाव बना लेते हैं। वे इंसानों की तरह ही इनके बारे में बातचीत करते हैं।
कम्युनिकेशन के हर चैनल पर सक्रिय डिजिटल साथी
स्काइडाइव के एजेंट साधारण चैटबॉट या वर्कफ़्लो नहीं हैं, बल्कि ये एक तरह के सहकर्मी हैं जिनके पास अपने नाम, भूमिकाएं और क्लाउड कंप्यूटर होते हैं। ये स्लैक, ईमेल और आईमेसेज जैसे तमाम माध्यमों पर काम करते हैं। हर एजेंट का एक मपेट जैसा अवतार होता है, जिसे ध्रुव अमीन ने इंसानों के काफी करीब लेकिन पूरी तरह इंसान नहीं बताया है। इनके नाम अक्सर इनकी भूमिकाओं से जुड़े होते हैं, जैसे कैनरी नाम का एजेंट चौबीस घंटे प्रोडक्शन पर नजर रखता है। ध्रुव अमीन का मानना है कि इन्हें थोड़ा मानवीय रूप देना जरूरी है क्योंकि ज्यादातर लोग अभी भी असली एजेंट के बारे में नहीं जानते हैं।
दफ्तर के उबाऊ कामों से छुटकारा
प्रोंतो हाउसिंग की मुख्य कार्यकारी अधिकारी और स्काइडाइव की शुरुआती यूजर क्रिस्टीन वेंडेल रोजमर्रा के कई थकाऊ कामों के लिए इन एजेंटों का इस्तेमाल करती हैं, जैसे कॉन्ट्रैक्ट लिखना, मीटिंग तय करना और ग्राहकों को फॉलो-अप ईमेल भेजना। उनके एजेंट एक तरह से परफेक्ट कर्मचारी साबित हो रहे हैं। ये एजेंट न केवल वर्कप्लेस के हर कम्युनिकेशन चैनल में फिट बैठते हैं, बल्कि अपने साथियों के काम करने के अंदाज, अनुरोधों और सुधारों के मुताबिक लगातार खुद को ढालते भी रहते हैं। प्रोंतो की इंजीनियरिंग टीम ने जब कोडिंग एजेंट का इस्तेमाल शुरू किया, तो कर्मचारियों ने कहना शुरू कर दिया कि उन्होंने एलिस नाम के एजेंट के साथ मिलकर किसी प्रोजेक्ट पर काम किया है।
दफ्तर की राजनीति से दूर बेफिक्र माहौल
इनकी एक बड़ी खूबी यह है कि ये इंसान नहीं हैं, जिसके कारण इन्हें दफ्तर की राजनीति या पेशेवर उलझनों से कोई मतलब नहीं होता है। जब क्रिस्टीन वेंडेल के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में काम करने वाले बॉब नाम के एजेंट ने गलती से स्लैक चैनल पर उनकी सारी कैलेंडर डिटेल्स सार्वजनिक कर दीं, तो उन्हें अपनी गलती सुधारने में झिझक महसूस नहीं हुई। उन्होंने माना कि वे बखूबी जानती हैं कि यह इंसान नहीं है, इसलिए वे इस पर इस तरह से गुस्सा निकालती हैं जो किसी इंसान के साथ करना बिल्कुल ठीक नहीं होता।
मु्यूज और यूजर फ्रेंडली अनुभव
म्यूज भी स्काइडाइव के मपेट्स की तरह एक प्यारे और छोटे से फजी अवतार में आता है। यूजर एक्सपीरियंस ऐसा होता है जैसे किसी दोस्त को टास्क के लिए मैसेज भेजा जा रहा हो, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट थम्स-अप इमोजी के साथ संदेश स्वीकार करता है और बैकग्राउंड में काम में जुट जाता है। मानव संबंधों को आधार बनाकर तैयार किए गए ये एजेंट यह समझने का आसान जरिया देते हैं कि इनका इस्तेमाल कैसे किया जाए।
मानवीयकरण के जोखिम और गलतियों की गुंजाइश
कामकाज के माहौल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मानवीकरण करने से कुछ खास जोखिम भी पैदा होते हैं। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के शोध से पता चला कि जब प्रबंधकों को यह बताया गया कि काम किसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कर्मचारी ने किया है, तो उन्होंने उस काम में 18 फीसदी कम गलतियां पकड़ीं, जो उन्हें तब मिलीं जब उन्हें बताया गया कि काम किसी टूल ने किया है। जूली बेनार्ड का कहना है कि ये एजेंट क्षमताओं या कमजोरियों के मामले में इंसानी कर्मचारियों की तरह एक सांचा में फिट नहीं बैठते हैं और कंपनियां अभी यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि इस पर क्या अंकुश लगाए जाएं।
डिजिटल साथियों के प्रति अजीब और भावनात्मक प्रतिक्रियाएं
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ गहरे भावनात्मक रिश्ते बनाना कोई नई बात नहीं है, क्योंकि लोग सालों से चैटबॉट साथियों के साथ डेटिंग कर रहे हैं। दफ्तरों में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स ने कुछ अनोखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है। बिजनेस इनसाइडर के संस्थापक हेनरी ब्लोडेट ने पिछले साल डिजिटल मातहतों की एक टीम बनाने और एक आकर्षक दिखने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहकर्मी की तस्वीर पर इंसानी प्रतिक्रिया देने के बारे में एक ब्लॉग लिखा था। उन्होंने लिखा था कि कॉरपोरेट दुनिया में कई दशक बिताने के बाद उन्होंने सीखा है कि दफ्तर में कुछ इंसानी विचार साझा करना लगभग हमेशा बुरा होता है, लेकिन क्या यही नियम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साथियों और इस तकनीक पर आधारित दफ्तरों पर भी लागू होते हैं?
भविष्य को लेकर अस्तित्व से जुड़े गहरे सवाल
मानव संसाधन कंपनी लैटिस की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सारा फ्रैंकलिन के मन में इस तकनीक को लेकर अस्तित्व से जुड़े गहरे सवाल हैं। लैटिस ने इस अवधारणा के मुख्यधारा में आने से दो साल पहले ही अपने ऑर्ग चार्ट में डिजिटल कर्मचारियों को शामिल कर लिया था। सारा फ्रैंकलिन इस बात पर जोर देती हैं कि उनकी कंपनी जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए इस मॉडल का उपयोग करती है, न कि इसलिए कि कर्मचारी इन डिजिटल साथियों को इंसानी रूप में देखना शुरू कर दें।
डोपामाइन ट्रिगर और इंसानी समाज के लिए खतरा
सारा फ्रैंकलिन का मानना है कि इस तरह का मानवीकरण तकनीकी कंपनियों की वह रणनीति है जिसके जरिए वे यूजर्स को अपनी सेवाओं का आदी बना लेती हैं, ताकि वे भावनात्मक जुड़ाव के डोपामाइन ट्रिगर से खुद को न रोक सकें। हालांकि इससे कंपनियों को एक्टिव यूजर बेस बनाने में मदद मिलती है, लेकिन उनका यह भी मानना है कि इससे कामकाजी इंसानों के न्यूरोलॉजिकल और व्यावहारिक जीवन पर बुरे असर पड़ सकते हैं। उनके मुताबिक ऐसी तकनीकें इंसानी समाज के लिए बेहद डरावनी और विनाशकारी साबित हो सकती हैं।


















