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एआई एजेंट की बढ़ती भूख के कारण तकनीकी कंपनियां बना रही हैं विशाल डेटा सेंटर, ऊर्जा ग्रिड पर बढ़ा भारी दबावएआई
13 सित॰ 2026, 4:49 pm (45 दिन पहले)· 2

एआई एजेंट की बढ़ती भूख के कारण तकनीकी कंपनियां बना रही हैं विशाल डेटा सेंटर, ऊर्जा ग्रिड पर बढ़ा भारी दबाव

चैटबॉट से आगे बढ़कर अब स्वायत्त एआई एजेंटों का दौर आ चुका है। ये एजेंट बैकग्राउंड में घंटों तक हजारों काम खुद पूरा करते हैं, जिसकी वजह से दुनिया भर में बिजली की खपत और डेटा सेंटरों का निर्माण अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है।

दुनिया भर में विशालकाय डेटा सेंटरों का निर्माण तेजी से जारी है और इस बुनियादी ढांचे पर अरबों डॉलर का कर्ज लिया जा रहा है। आम लोग अक्सर सोचते हैं कि केवल गंतव्य खोजने या खाना पकाने की रेसिपी पूछने जैसे सामान्य कामों के लिए इतने बड़े बिजली संयंत्रों और डेटा सेंटरों की क्या जरूरत है। इसका जवाब चैटबॉट के बुनियादी सवालों में नहीं, बल्कि एआई तकनीक के उस अगले चरण में छिपा है जिसे एआई एजेंट कहा जाता है। तकनीक जगत में हो रहा यह बड़ा बदलाव ऊर्जा मांग को उस स्तर पर ले जा रहा है जिसकी पहले कल्पना भी नहीं की गई थी।

शुरुआती एआई सिस्टम केवल यूजर के सवालों के सीधे उत्तर देने तक सीमित थे। इसके विपरीत स्वायत्त निर्णय लेने वाले एआई एजेंट किसी मुख्य कार्य को पूरा करने के लिए स्वयं दर्जनों या सैकड़ों छोटे निर्देश बना सकते हैं। जब कोई यूजर किसी एआई एजेंट को वेबसाइट बनाने का निर्देश देता है, तो वह सिस्टम लगातार कई घंटों तक चल सकता है। इस दौरान वह अलग-अलग पेज, मेनू और डेटासेट तैयार करने के लिए खुद को बार-बार निर्देश देता रहता है। इस स्वचालित प्रक्रिया के कारण प्रोसेसिंग क्षमता का इस्तेमाल कई गुना बढ़ जाता है।

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गणित के जटिल सवालों से लेकर विशाल मैसेजिंग नेटवर्क तक

दुनिया की प्रमुख एआई प्रयोगशालाएं अब अपनी पूरी ताकत एजेंटिक प्रणालियों के विकास पर लगा रही हैं। एक हालिया प्रयोग में ओपनएआई ने 10,000 से अधिक एजेंटों के एक नेटवर्क का इस्तेमाल किया। इन एजेंटों ने आपस में 2.7 मिलियन मैसेज भेजकर लंबे समय से अनसुलझी एक कठिन गणितीय पहेली को हल करने का दावा किया। हालांकि गणितज्ञों ने इस दावे के कुछ हिस्सों पर सवाल उठाए, लेकिन इस एक प्रयोग में ही प्रोसेसिंग पावर का भारी इस्तेमाल हुआ।

विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार इस तरह के बड़े प्रयोगों में करोड़ों डॉलर मूल्य की ऊर्जा खर्च होती है। एआई कंपनियां लंबे समय से अपने उत्पादों के पर्यावरणीय प्रभावों और उत्सर्जन डेटा को लेकर पूरी पारदर्शिता नहीं बरतती हैं। तकनीक कंपनियों के शीर्ष अधिकारी अक्सर एक सिंगल चैटबॉट क्वेरी का उदाहरण देकर ऊर्जा खपत को बहुत मामूली बताते हैं। उदाहरण के लिए, ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन ने एक बातचीत के दौरान दावा किया था कि एक बादाम उगाने में जितना पानी खर्च होता है, उतने में 38,000 चैटजीपीटी सवाल पूछे जा सकते हैं।

सैम ऑल्टमैन ने कहा था कि जो लोग एक बार में 12 बादाम खा लेते हैं, वे आमतौर पर पानी की खपत के नजरिए से खुद को कोई गलत काम करते हुए नहीं महसूस करते हैं।

हालांकि विश्लेषकों ने इस गणना की सटीकता पर सवाल उठाए हैं। जब बात साधारण चैटबॉट से हटकर एआई एजेंटों पर आती है, तो ऊर्जा और पानी की खपत का हिसाब लगाना बेहद जटिल हो जाता है। एजेंटों के काम साधारण निर्देशों से लेकर पूरे दिन चलने वाले स्वायत्त कोडिंग तक फैले होते हैं, जिनमें कई सहायक एजेंट समानांतर रूप से कार्य करते हैं। जैसे-जैसे ये कार्य अधिक जटिल होते जाते हैं, ऊर्जा की खपत में असीमित वृद्धि की संभावना बनी रहती है।

बिना यूजर इंटरैक्शन के लगातार चलती प्रणालियां

तकनीकी विकास के अन्य क्षेत्रों में ऊर्जा और संसाधनों का इस्तेमाल सीधे तौर पर इंसानों की गतिविधियों पर निर्भर करता था। उदाहरण के लिए, जितने लोग कार चलाएंगे या वीडियो स्ट्रीमिंग करेंगे, बिजली और संसाधनों की खपत उसी अनुपात में होगी। लेकिन सस्टेनेबल एआई के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बोरिस गामाज़ाएचिकॉव के अनुसार, एआई एजेंटिक सिस्टम अब व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं से पूरी तरह स्वतंत्र हो चुके हैं।

एआई उद्योग का नया दृष्टिकोण ऐसी कंपनियों की कल्पना करता है जहां केवल एक मानव कर्मचारी हो और उसके पीछे पृष्ठभूमि में सैकड़ों या हजारों एआई एजेंट लगातार काम कर रहे हों। यदि यह भविष्य वास्तविकता बनता है, तो इसके लिए डेटा सेंटरों की क्षमता को कई गुना बढ़ाना अनिवार्य हो जाएगा। सरकारी स्तर पर ऊर्जा डेटा की कमी के कारण अब वैज्ञानिक खुद इसका हिसाब लगाने में जुटे हैं।

जलवायु वैज्ञानिक ज़ेक हॉसफादर ने अपने व्यक्तिगत एआई एजेंट उपयोग का अध्ययन किया। उन्होंने विभिन्न स्रोतों के आंकड़ों को मिलाकर पाया कि उनका दैनिक क्लॉड इस्तेमाल दो रेफ्रिजरेटरों को लगातार चलाने जितनी बिजली खर्च करता है। बोरिस गामाज़ाएचिकॉव ने नोट किया कि हालांकि यह गणना पुरानी जानकारियों पर आधारित हो सकती है, फिर भी यह साबित करती है कि एजेंट तकनीक का ऊर्जा प्रभाव साधारण चैटबॉट की तुलना में बहुत बड़ा है। हॉसफादर के अनुसार, व्यक्तिगत स्तर पर यह ऊर्जा खपत भले ही बहुत विशाल न लगे, लेकिन वैश्विक तापमान वृद्धि के दौर में यह उत्सर्जन का एक नया और बढ़ता हुआ जरिया बन गया है।

अरबों उपयोगकर्ताओं तक व्यक्तिगत एजेंट पहुंचाने की योजना

एआई एजेंटों का इस्तेमाल केवल शोधकर्ताओं या प्रोग्रामरों तक सीमित नहीं रहने वाला है। मेटा ने हाल ही में अपने व्यक्तिगत एआई एजेंट म्यूज की घोषणा की है, जिसे दुनिया भर के अरबों लोगों के लिए डिजाइन किया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य प्रत्येक उपयोगकर्ता के लिए क्लाउड में एक समर्पित कंप्यूटर बनाए रखना है, जो यूजर के ऑफलाइन होने पर भी बैकग्राउंड में काम करता रहेगा।

स्मार्ट ग्लास और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ इस तकनीक को एकीकृत किया जाएगा। इससे आने वाले समय में आम लोग बिना जाने भी लगातार एआई एजेंटों से बैकग्राउंड काम कराते रहेंगे। यदि दुनिया भर के अरबों लोग एआई एजेंटों का उपयोग करने लगेंगे, तो ऊर्जा मांग अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच जाएगी। यही कारण है कि मेटा लुइसियाना में हाइपरियन नाम की एक विशाल डेटा सेंटर परियोजना पर काम कर रहा है, जिसे बिजली देने के लिए 10 प्राकृतिक गैस आधारित ऊर्जा संयंत्रों की आवश्यकता होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि जिन डेटा सेंटरों की नींव आज रखी जा रही है, वे तीन से पांच साल बाद आने वाली एआई तकनीकों को प्रशिक्षित करेंगे। उस समय की तकनीक आज के साधारण चैटबॉट विंडो से बिल्कुल अलग और बेहद ऊर्जा-गहन होगी।

परमाणु ऊर्जा का विकल्प और जमीनी चुनौतियां

विशाल बिजली मांग को पूरा करने के लिए छोटे मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टरों (एसएमआर) को एक स्वच्छ और कार्बन-मुक्त विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। कई डेटा सेंटर डेवलपर्स चाहते हैं कि उनके सेंटर सीधे इन छोटे परमाणु संयंत्रों से जुड़े रहें ताकि बिजली ग्रिड पर दबाव न पड़े।

हालांकि अमेरिका में परमाणु ऊर्जा प्रणालियों को व्यावसायिक रूप से चालू होने में लंबा समय लगता है। वर्तमान में कोई भी छोटा मॉड्यूलर रिएक्टर अमेरिका में व्यावसायिक रूप से संचालित नहीं हो रहा है और केवल एक मॉडल को ही बिक्री के लिए लाइसेंस मिला है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इस उद्योग को गति देने के लिए ऊर्जा विभाग में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसमें 11 स्टार्टअप को शामिल किया गया है। इनमें से कुछ कंपनियों ने शुरुआती मील के पत्थर हासिल कर लिए हैं, लेकिन उन्हें बाजार तक पहुंचने में अभी वर्षों का समय लगेगा।

डेटा सेंटर निर्माता इतने लंबे समय तक इंतजार करने को तैयार नहीं हैं। इसके परिणामस्वरूप, वे तुरंत बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर प्राकृतिक गैस टर्बाइन स्थापित कर रहे हैं। स्वच्छ ऊर्जा के वादों के बावजूद तत्काल बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जीवाश्म ईंधन का सहारा लिया जा रहा है।

स्थानीय विरोध और राजनीतिक प्रभाव

डेटा सेंटरों की तेजी से बढ़ती मांग का प्रभाव अब स्थानीय समुदायों और राजनीति पर भी दिखाई दे रहा है। मेम्फिस शहर में स्पेसएक्स की डेटा सेंटर गतिविधियों के खिलाफ स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का विरोध बढ़ रहा है। लोगों को चिंता है कि ये केंद्र स्थानीय जल संसाधनों और वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं।

इसके साथ ही कई अमेरिकी राज्यों में नीतिगत बदलाव देखे जा रहे हैं। पूर्व में डेटा सेंटरों को आकर्षित करने के लिए कर छूट देने वाले राज्य अब अपने सौदों पर पुनर्विचार कर रहे हैं या उन्हें वापस ले रहे हैं। टेक्सस जैसे राज्यों में डेटा सेंटरों के कारण बिजली दरों में वृद्धि और ग्रिड की विफलता की आशंकाओं ने रिपब्लिकन मतदाताओं के बीच भी असंतोष पैदा कर दिया है, जिससे राजनीतिक समीकरण बदलने लगे हैं। एआई की यह नई क्रांति न केवल तकनीक को बदल रही है, बल्कि ऊर्जा, पर्यावरण और स्थानीय राजनीति के ढांचे को भी नया आकार दे रही है।

सवाल-जवाब

एआई एजेंट और साधारण चैटबॉट में क्या अंतर है?
साधारण चैटबॉट एक सवाल का एक सीधा जवाब देते हैं, जबकि एआई एजेंट किसी बड़े काम को पूरा करने के लिए खुद को दर्जनों बार निर्देश देकर बैकग्राउंड में घंटों तक स्वायत्त रूप से काम कर सकते हैं।
डेटा सेंटरों के लिए इतनी अधिक बिजली की आवश्यकता क्यों हो रही है?
स्वायत्त एआई एजेंटों को चलाने और उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए हजारों सर्वरों को लगातार कई घंटों तक प्रोसेसिंग करनी पड़ती है, जिससे बिजली की खपत अभूतपूर्व रूप से बढ़ गई है।
मेटा का म्यूज एआई एजेंट क्या है?
मेटा म्यूज एक व्यक्तिगत एआई एजेंट है जिसे अरबों उपयोगकर्ताओं के लिए बनाया जा रहा है। यह क्लाउड में हर यूजर के लिए एक समर्पित कंप्यूटर बनाए रखता है जो यूजर के ऑफलाइन होने पर भी काम करता है।
क्या छोटे परमाणु रिएक्टर (SMR) डेटा सेंटरों की बिजली समस्या हल कर सकते हैं?
एसएमआर एक स्वच्छ विकल्प हो सकते हैं, लेकिन अमेरिका में अभी तक कोई भी व्यावसायिक रूप से चालू नहीं हुआ है और उन्हें बाजार में बड़े पैमाने पर आने में अभी कई साल लगेंगे।
डेटा सेंटरों का स्थानीय लोगों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
मेम्फिस जैसे शहरों में स्थानीय लोग पानी की भारी खपत और प्रदूषण के कारण विरोध कर रहे हैं, जबकि कई राज्य डेटा सेंटरों को दी जाने वाली कर छूट वापस ले रहे हैं।
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