अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क का मशहूर टाइम्स स्क्वायर इस समय पारंपरिक आस्था और उत्सव के रंगों से सराबोर दिखाई दे रहा है। नवरात्रि के पावन पर्व के उपलक्ष्य में यहां मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है। दूर-दराज के इलाकों से बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग और श्रद्धालु देवी के दर्शन करने पहुंच रहे हैं, जिससे इस व्यस्त वैश्विक केंद्र का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया है।
टाइम्स स्क्वायर पर आस्था और भक्ति का संगम
न्यूयॉर्क के इस प्रमुख पर्यटन और व्यापारिक स्थल पर बने भव्य पूजा पंडाल में रोजाना सैकड़ों की तादाद में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। यहां वैदिक मंत्रोच्चार और पूरे विधि-विधान के साथ अनुष्ठान किए जा रहे हैं। भारतीय प्रवासी न सिर्फ अपने परिवारों के साथ आकर माता की पूजा-अर्चना में हिस्सा ले रहे हैं, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी विदेशी धरती पर जीवंत बनाए हुए हैं। पंडाल में नियमित रूप से सुबह और शाम की आरती आयोजित की जा रही है, जिससे वहां मौजूद स्थानीय और विदेशी सैलानी भी इस आध्यात्मिक वातावरण की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
नवरात्रि के नौ दिनों का धार्मिक महत्व
नवरात्रि के दौरान देवी स्थापना शक्ति की आराधना और असत्य पर सत्य की जीत का परिचायक मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह अनुष्ठान देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना की शुरुआत करता है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा का संचार होता है। इस नौ दिवसीय उत्सव को मुख्य रूप से तीन चरणों में विभाजित किया जाता है। शुरुआती तीन दिनों में मां दुर्गा के शक्ति स्वरूप की आराधना की जाती है, ताकि अंतर्मन की कमजोरियों और नकारात्मकता को दूर किया जा सके। इसके बाद के तीन दिन देवी लक्ष्मी को समर्पित होते हैं, जहां धन, समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना की जाती है। उत्सव के अंतिम तीन दिनों में देवी सरस्वती की उपासना कर विद्या, विवेक और ज्ञान की प्राप्ति की कामना की जाती है। इस दौरान हर दिन के लिए विशिष्ट रंगों के वस्त्र और विशेष प्रकार के भोग का विधान भी तय होता है।
दैनिक पूजन विधि और विजयदशमी पर विसर्जन
पंडाल और घरों में इस पर्व को संपन्न करने के लिए प्रथम दिन कलश स्थापना की जाती है और बाद में हवन अनुष्ठान संपन्न होते हैं। भक्तजन नियमित उपवास रखकर देवी की कथा सुनते हैं और फल तथा नैवेद्य का भोग लगाते हैं। माता की प्रतिमा का श्रृंगार ताजे फूलों और चंदन से किया जाता है। उत्सव के समापन पर नवमी या दशमी तिथि को विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की जाती है। विजयदशमी का यह दिन बुराई पर अच्छाई की अंतिम विजय का प्रतीक है। विदाई की पारंपरिक रस्मों और भव्य अंतिम आरती के साथ माता को विदाई दी जाती है। विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह पर्व धैर्य, संकल्प और अपनी जड़ों से निरंतर जुड़े रहने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है।



















