कपड़ा उद्योग और धागों के बड़े कारोबार के चलते दुनियाभर में टेक्सटाइल सिटी के नाम से पहचाने जाने वाले भीलवाड़ा जिले ने अब कृषि के क्षेत्र में भी अपनी एक अलग छाप छोड़नी शुरू कर दी है। पारंपरिक फसलों से इतर यहां के किसान अब बड़े स्तर पर बागवानी अपना रहे हैं और संतरे की पैदावार में उल्लेखनीय कामयाबी हासिल कर रहे हैं। बेहतरीन उत्पादन और उम्दा मिठास के कारण इस जिले को राजस्थान का मिनी नागपुर या छोटा नागपुर भी पुकारा जाने लगा है।
मांडलगढ़ और ऊपरमाल बना संतरे की खेती का प्रमुख केंद्र
जिले के ऊपरमाल इलाके में स्थित मांडलगढ़ और इसके नजदीकी ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर संतरे के बगीचे लहलहा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर हो रहे इस शानदार कृषि नवाचार को देखते हुए भीलवाड़ा के संतरा उत्पादन को पंच गौरव योजना में भी स्थान दिया गया है। बागवानी से जुड़े किसानों को अपनी इस उपज से बेहतरीन आर्थिक मुनाफा मिल रहा है। यहां से तोड़े गए ताजे संतरे न केवल स्थानीय मंडियों में बिक रहे हैं, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली समेत कई बड़े राज्यों के बाजारों में भी इनकी भारी मांग देखी जा रही है।
काली मिट्टी और अनुकूल पानी से तैयार हो रहे नागपुरी संतरे
कृषि विभाग के उद्यान विभाग के विशेषज्ञ और कृषि अधिकारी डॉक्टर शंकर सिंह राठौड़ के अनुसार मांडलगढ़ क्षेत्र को अब बाकायदा जिले के प्रमुख संतरा हब का दर्जा मिल चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस इलाके की उपजाऊ काली मिट्टी और भूजल की बेहतरीन गुणवत्ता संतरा उत्पादन के लिए बेहद मुफीद साबित हो रही है। इन्हीं प्राकृतिक अनुकूलताओं के चलते यहां मुख्य रूप से प्रसिद्ध नागपुरी संतरे की किस्म तैयार की जा रही है। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक पूरे भीलवाड़ा जिले में लगभग 300 हेक्टेयर क्षेत्रफल में संतरे की खेती सफलतापूर्वक की जा रही है, जिससे किसानों की आय में भारी इजाफा हुआ है।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन और सरकारी योजनाओं से मिल रहा प्रोत्साहन
भीलवाड़ा या उसके आसपास के जिलों के किसानों को बागवानी की ओर आकर्षित करने के लिए कृषि विभाग लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत किसानों को पौधे लगाने से लेकर रख-रखाव तक पर तकनीकी और वित्तीय मदद मुहैया कराई जा रही है। विभागीय अधिकारी नए किसानों को शुरुआती योजना तैयार करने, सही सिंचाई पद्धति अपनाने और तैयार उपज को लाभकारी बाजार में बेचने से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बारीकी सिखा रहे हैं, जिससे खेती घाटे का सौदा न रहकर एक सशक्त व्यवसाय बन सके।

















