विदेश में पढ़ रहे एक भारतीय छात्र के लिए अमेरिका लौटना उस वक्त बुरे सपने जैसा बन गया, जब उसे नीदरलैंड के एम्स्टर्डम एयरपोर्ट पर ही आगे जाने से रोक दिया गया. हैदराबाद के इस छात्र को यहीं पहली बार यह झटका लगा कि उसका F-1 स्टूडेंट वीजा पिछले साल ही रद्द हो चुका है. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस फैसले की कोई जानकारी या आधिकारिक सूचना उसे पहले कभी नहीं दी गई थी.
छात्र ने बताया कि वह जनवरी 2025 में F-1 स्टूडेंट वीजा लेकर अमेरिका गया था और वहीं पढ़ाई कर रहा था. बीच में छुट्टियों के दौरान वह भारत आया और फिर हैदराबाद से एम्स्टर्डम होते हुए न्यूयॉर्क के जॉन एफ. कैनेडी (JFK) एयरपोर्ट के लिए निकला. लेकिन अमेरिका जाने वाली फ्लाइट में बैठने से ठीक पहले एम्स्टर्डम में अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा (CBP) के अधिकारियों ने उससे संपर्क किया और साफ कह दिया कि उसका वीजा अब वैध नहीं है, इसलिए उसे अमेरिका में दाखिल होने की इजाजत नहीं दी जा सकती.
आगे की राह के लिए दूतावास जाने को कहा
अधिकारियों ने छात्र को सलाह दी कि वह आगे की प्रक्रिया के लिए नजदीकी अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से संपर्क करे. साथ ही उसे तुरंत भारत लौट जाने के लिए कहा गया. छात्र के मुताबिक यह सुनकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई, क्योंकि अमेरिका में रहते हुए उसने किसी भी नियम या कानून को नहीं तोड़ा था. उसका कहना है कि न तो उस पर ड्रिंक एंड ड्राइव का कोई मामला था, न कोई ट्रैफिक नियम का उल्लंघन और न ही उसके खिलाफ किसी तरह की कानूनी कार्रवाई हुई थी. इसके बाद भी उसका F-1 वीजा जुलाई 2025 में रद्द कर दिया गया और उसे भनक तक नहीं लगने दी गई.
यूनिवर्सिटी ने कहा, दस्तावेज पूरी तरह सही
इस घटना के बाद छात्र ने अपनी यूनिवर्सिटी से बात की. यूनिवर्सिटी ने उसे बताया कि उसका फॉर्म I-20 और स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर इंफॉर्मेशन सिस्टम (SEVIS) रिकॉर्ड, दोनों पूरी तरह एक्टिव हैं और उसका स्टूडेंट स्टेटस भी नियमों के मुताबिक है. यानी पढ़ाई से जुड़े उसके आधिकारिक कागजात में कहीं कोई गड़बड़ी नहीं थी.
F-1 वीजा, I-20 और SEVIS में क्या फर्क है
जानकारों का कहना है कि बहुत से लोगों को F-1 वीजा, I-20 और SEVIS रिकॉर्ड के बीच का अंतर ही पता नहीं होता. फॉर्म I-20 दरअसल वह दस्तावेज है जिसे अमेरिका का कोई मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान किसी अंतरराष्ट्रीय छात्र को जारी करता है, और इसी के आधार पर छात्र F-1 वीजा के लिए आवेदन करता है.
वहीं SEVIS अमेरिकी सरकार का एक इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सिस्टम है, जिसमें विदेशी छात्रों की पढ़ाई और उनके स्टेटस से जुड़ी सारी जानकारी दर्ज रहती है. जब तक छात्र अमेरिका में रहता है, उसकी यूनिवर्सिटी समय-समय पर इस रिकॉर्ड को अपडेट करती रहती है.
अहम बात यह है कि SEVIS रिकॉर्ड और I-20 के एक्टिव रहने के बावजूद किसी छात्र का F-1 वीजा अलग से रद्द किया जा सकता है. इसकी वजह यह है कि वीजा अमेरिका में एंट्री के लिए जरूरी होता है, जबकि SEVIS रिकॉर्ड और I-20 सिर्फ यह दिखाते हैं कि अमेरिका में छात्र का स्टूडेंट स्टेटस वैध है.
ऐसे हालात में छात्र क्या करें
ऐसी स्थिति में छात्रों को सबसे पहले यह पता लगाना चाहिए कि आखिर उनका वीजा किस वजह से रद्द हुआ. इसके बाद उन्हें नए F-1 वीजा के लिए आवेदन करना होगा. वीजा इंटरव्यू के दौरान अधिकारी पिछले वीजा के रद्द होने को लेकर सवाल पूछ सकते हैं. जानकारों की सलाह है कि छात्र इस बात को छिपाने की कोशिश न करें, बल्कि पूरी ईमानदारी के साथ सही-सही जानकारी दें.













