आने वाले समय को लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं, लेकिन एक अमेरिकी भविष्यवक्ता की ताजा बातों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जॉन होग को कई लोग अमेरिकी नास्त्रेदमस के रूप में जानते हैं और उन्होंने आने वाले वर्षों को लेकर कुछ डरावनी आशंकाएं जाहिर की हैं। हालांकि इन दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और यह पूरी तरह से व्यक्तिगत आकलन पर आधारित हैं।
चार दशकों का अध्ययन और बड़े खतरे
जॉन होग पिछले लगभग ४० वर्षों से फ्रांस के प्रसिद्ध भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस की रचनाओं का अध्ययन करने का दावा करते हैं। उनकी ताज़ा चेतावनी के मुताबिक, साल २०२८ तक मानवता को परमाणु हमलों, गहरी मंदी और भीषण संघर्षों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें सबसे बड़ा संकट अमेरिका के वर्चस्व पर मंडराने की बात कही गई है, जिसका वैश्विक प्रभाव पूरी तरह से कमजोर हो सकता है।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव
इस भविष्यवक्ता का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी परमाणु टकराव में बदल सकती है। उनके अनुसार, यदि ईरान के परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया जाता है, तो इसके जवाब में अमेरिकी युद्धपोतों पर हमले हो सकते हैं। इसके अलावा अरब सागर के क्षेत्र में ईरानी मिसाइलों और उत्तर कोरियाई ड्रोनों के जरिए खतरे पैदा होने की आशंका भी जताई गई है।
युद्ध की शुरुआत और ऊर्जा संकट
नास्त्रेदमस की पुरानी भविष्यवाणियों का हवाला देते हुए जॉन होग ने दावा किया है कि दुनिया को २७ साल तक चलने वाले संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है। उनके तर्कों के अनुसार, इस तबाही की शुरुआत सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की हत्या या आकस्मिक निधन से हो सकती है। इसके पीछे वह नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों में आए रहस्यमयी नाम मैबस को बिन सलमान से जोड़ते हैं। उनका कहना है कि इस संघर्ष से पश्चिम एशिया का तेल और गैस का कारोबार पूरी तरह तबाह हो जाएगा, जिससे दुनियाभर में महंगाई, ऊर्जा की भारी किल्लत और खाद्यान्न संकट पैदा हो सकता है।
रूस और नाटो के बीच टकराव
भविष्यवक्ता ने रूस और नाटो देशों के बीच बढ़ते गतिरोध को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका दावा है कि यूक्रेन के संघर्ष में यूरोपीय देशों की सीधी भागीदारी से रूस की प्रतिक्रिया आक्रामक हो सकती है, जिससे स्थितियां परमाणु युद्ध की दहलीज तक पहुंच सकती हैं।
अमेरिका का घटता प्रभाव
जॉन होग का यह भी अनुमान है कि अमेरिका को भारी भरकम कर्ज, बढ़ती महंगाई, ईंधन की कमी और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजरना होगा। उन्होंने सितंबर २०२८ तक अमेरिकी वैश्विक रुतबे में भारी गिरावट आने की आशंका जताई है। हालांकि इन चेतावनियों से डर का माहौल बन सकता है, लेकिन इन्हें पूर्ण सत्य नहीं माना जा सकता है। होग का कहना है कि उनका मकसद किसी को डराना नहीं है, बल्कि संघर्ष के बजाय शांति के मार्ग पर चलने के लिए आगाह करना है।


















