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ज्वालामुखी के राख वाले बादलों में क्यों चमकती है बिजली, क्या है डर्टी थंडरस्टॉर्म का पूरा विज्ञानअमेरिका
26 अक्तू॰ 2026, 4:32 am (1 घंटे पहले)· 2

ज्वालामुखी के राख वाले बादलों में क्यों चमकती है बिजली, क्या है डर्टी थंडरस्टॉर्म का पूरा विज्ञान

ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान उठने वाले राख के गुबार में बिजली चमकने की घटना को डर्टी थंडरस्टॉर्म कहा जाता है। यह खौफनाक और अद्भुत नजारा कणों की आपसी टक्कर और विद्युत आवेश के बंटवारे के कारण होता है।

आसमान में चारों तरफ घना अंधेरा छाया हुआ हो और ज्वालामुखी से राख का एक विशाल गुबार आसमान की तरफ उठ रहा हो, तब उसी राख से भरे बादलों के बीच अचानक बिजली कड़कने लगती है। प्रकृति का यह दृश्य जितना सुंदर और शानदार दिखाई देता है, उतना ही अधिक डरावना भी हो सकता है। प्रकृति की इस बेहद अनोखी घटना को डर्टी थंडरस्टॉर्म के नाम से जाना जाता है। लेकिन मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर ज्वालामुखी से बाहर आने वाली राख के इन बादलों में बिजली कैसे पैदा हो जाती है?

राख के बादलों के भीतर बिजली कैसे बनती है

जब भी किसी ज्वालामुखी में भयंकर विस्फोट होता है, तब उसके साथ राख, चट्टानों के बहुत छोटे-छोटे टुकड़े और अन्य प्रकार के पदार्थ अत्यंत तेज रफ्तार से बाहर निकलते हैं। ये सभी कण हवा में और आपस में बहुत तेजी से टकराते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनके बीच विद्युत आवेश का बंटवारा हो जाता है। जब इन बादलों के अलग-अलग हिस्सों में धनात्मक और ऋणात्मक विद्युत आवेश बड़ी मात्रा में जमा होने लगते हैं, तब उनके बीच का अंतर लगातार बढ़ने लगता है। एक स्थिति ऐसी आती है जब यह अंतर हवा में इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज यानी बिजली की तेज चमक को पैदा कर देता है। अंधेरे में ज्वालामुखी के भीतर से उठते राख के विशाल बादलों के बीच बिजली की यह चमक इस पूरे दृश्य को बेहद अनोखा बना देती है। ऐसा प्रतीत होता है मानो उस राख के गुबार के भीतर ही पूरा आसमान चमक रहा हो।

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इसे डर्टी थंडरस्टॉर्म क्यों कहा जाता है

आमतौर पर जब भी हम किसी बिजली वाले तूफान के बारे में बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में पानी से भरे हुए बादलों की तस्वीर आती है। सामान्य तूफानों के दौरान पानी की बूंदों, बर्फ के कणों और उनकी आपसी गतिविधियों की वजह से विद्युत आवेश आसानी से अलग हो जाते हैं। लेकिन ज्वालामुखी के विस्फोट के समय बनने वाले बादलों के भीतर पानी की जगह राख और चट्टानों के कण भारी मात्रा में मौजूद होते हैं। इन ठोस कणों की आपस में होने वाली टक्कर से भी विद्युत आवेश अलग-अलग हो जाते हैं और बिजली चमकने की स्थिति पैदा हो जाती है। इसी खास वजह की वजह से इस घटना को डर्टी थंडरस्टॉर्म नाम दिया गया है। यहां डर्टी शब्द का अर्थ किसी प्रकार की गंदगी या प्रदूषण से बिल्कुल नहीं है, बल्कि इसका मतलब राख और ज्वालामुखीय पदार्थों से भरे हुए बादलों से है।

क्या हर ज्वालामुखी विस्फोट में चमकती है बिजली

यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं है कि हर एक ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान बिजली चमके ही। इसके होने के लिए राख के कणों की आपस में तेज टक्कर, विद्युत आवेशों का सही तरीके से अलग होना और वातावरण की कुछ खास परिस्थितियों का होना बहुत अहम होता है। यदि ये सभी स्थितियां अनुकूल नहीं होती हैं, तो ज्वालामुखी से राख का कितना भी बड़ा गुबार क्यों न उठ जाए, वहां बिजली चमकती हुई दिखाई नहीं देगी। डर्टी थंडरस्टॉर्म इस बात को साबित करता है कि किसी भी ज्वालामुखी का विस्फोट केवल बहते हुए लावा और राख तक ही सीमित नहीं रहता है। विस्फोट के बाद आसमान में उठने वाले इन कणों के बीच होने वाली भौतिक प्रक्रियाएं भी आसमान में बिजली चमकने का मुख्य कारण बन सकती हैं। राख के इन बादलों में चमकने वाली बिजली किसी भी प्रकार की रहस्यमयी ताकत का कमाल नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण होने वाली एक पूरी तरह से वैज्ञानिक विद्युत प्रक्रिया है। यही वजह है कि यह अनोखी घटना वैज्ञानिकों के लिए हमेशा से अध्ययन का विषय और आम लोगों के लिए एक हैरान कर देने वाला नजारा बनी रहती है।

सवाल-जवाब

डर्टी थंडरस्टॉर्म किसे कहा जाता है?
ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान राख और चट्टानों के बादलों के बीच बिजली चमकने की घटना को डर्टी थंडरस्टॉर्म कहा जाता है।
राख के बादलों में बिजली कैसे पैदा होती है?
विस्फोट के समय राख और चट्टानों के कणों की तेज आपसी टक्कर से विद्युत आवेश अलग होते हैं, जिससे इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज और बिजली बनती है।
क्या हर ज्वालामुखी विस्फोट में बिजली चमकती है?
नहीं, हर ज्वालामुखी विस्फोट में बिजली चमकना जरूरी नहीं है क्योंकि इसके लिए विशेष वातावरणीय और कणों की अनुकूल परिस्थितियां चाहिए होती हैं।
इस घटना में डर्टी शब्द का क्या अर्थ है?
यहां डर्टी शब्द का मतलब गंदगी या प्रदूषण से नहीं है, बल्कि इसका संबंध राख और ज्वालामुखीय पदार्थों से भरे बादलों से है।
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टिप्पणियाँ 5

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·2 मिनट पहले

प्रकृति के ऐसे नजारे सचमुच हैरान करने वाले होते हैं। राख के बादलों में बिजली चमकना फिल्मों के किसी सीन जैसा लगता है। क्या इस तरह की बिजली से आसपास के इलाकों में बिजली गिरने का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है?

Sophie Laurent@sophie-laurent·22 मिनट पहले

आइ슬ैंड में ऐसा नज़ारा पास से देखना रूह कंपा देता है। राख और बिजली का यह खेल वाकई हैरान करने वाला है।

Li Wei@li-wei·22 मिनट पहले

सोफ़ी, बिल्कुल सही कहा आपने! जब मैं आइसलैंड की यात्रा पर था, तब ऐसा नज़ारा देखकर पैरों तले ज़मीन खिसक गई थी।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·46 मिनट पहले

कुछ साल पहले जब मैं पत्रकारिता के सिलसिले में पास के एक इलाके में था, तब दूर ऐसा ही काला गुबार उठते देखा था। रात के वक्त जब उसमें से नीली सी रोशनी कौंधी, तो कलेजा मुंह को आ गया था। कुदरत का यह खौफनाक रूप देखकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·45 मिनट पहले

उमर भाई, सचमुच ऐसा मंजर सामने हो तो कलेजा सच में मुंह को आ जाता है। कुदरत के इस खौफनाक रूप को पास से देखना वाकई डरावना अनुभव रहा होगा।

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