उत्तराखंड की चर्चित शख्सियत उर्मिला सनावर की मुश्किलें लगातार कानूनी मोर्चों पर बढ़ती जा रही हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के मुद्दे को उठाने के बाद सुर्खियों में आईं उर्मिला सनावर के खिलाफ विभिन्न मामलों में कार्रवाई का सिलसिला तेज हो गया है। उनके सोशल मीडिया बयानों और वीडियो के आधार पर पुलिस लगातार एक्शन ले रही है, जिसके चलते उन पर दर्ज मुकदमों की संख्या अब करीब एक दर्जन तक पहुंच चुकी है। इनमें से एक गंभीर मामले में हरिद्वार पुलिस ने रविवार को कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया है।
रंगदारी और जमीन के दबाव का गंभीर आरोप
हरिद्वार जेल भेजे जाने वाले मामले की पृष्ठभूमि काफी गंभीर है। इस मामले की शिकायत पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ की बेटी दीपिका राठौड़ ने पुलिस को दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उर्मिला सनावर ने पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी और रविदास धाम की जमीन को अपने नाम ट्रांसफर करवाने के लिए अनुचित दबाव बनाया था। पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ के साथ उनका यह विवाद काफी समय से चल रहा था, जो अब कानूनी शिकंजे में बदल चुका है।
देहरादून कोतवाली में नया मुकदमा दर्ज
हरिद्वार के अलावा देहरादून की शहर कोतवाली में भी उर्मिला सनावर के खिलाफ एक ताजा मुकदमा दर्ज किया गया है। यह नया मामला सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए कुछ बयानों से जुड़ा है, जिनमें सिक्किम के राज्यपाल दुष्यंत कुमार गौतम, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन से जुड़े बीएल संतोष और आरती गौड़ पर आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणियां करने का आरोप है। यह शिकायत मोती बाजार निवासी सागर द्वारा दर्ज कराई गई है, जो हिंदू रक्षा दल से ताल्लुक रखते हैं।
सीबीआई कोर्ट के बाहर के वीडियो पर विवाद
शिकायत के मुताबिक, पूरा विवाद हरिद्वार रोड स्थित सीबीआई कोर्ट के बाहर के एक वीडियो से शुरू हुआ जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है। आरोप है कि इस वीडियो क्लिप में उर्मिला सनावर मीडिया के कैमरों और माइक के सामने खड़े होकर सिक्किम के राज्यपाल दुष्यंत कुमार गौतम, बीएल संतोष और आरती गौड़ के खिलाफ व्यक्तिगत और गंभीर आरोप लगाती हुई साफ नजर आ रही हैं।
मानहानि और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का अंदेशा
शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी गई शिकायत में यह स्पष्ट किया है कि उर्मिला सनावर द्वारा दिए गए बयानों के समर्थन में सार्वजनिक तौर पर कोई भी न्यायिक आदेश या ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। उनका कहना है कि इन आधारहीन और कथित टिप्पणियों की वजह से न केवल संबंधित विशिष्ट व्यक्तियों की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंच रही है, बल्कि समाज में अनावश्यक भ्रम, आक्रोश और वैमनस्य फैलने की भी पूरी आशंका बनी हुई है。
पुलिस ने दर्ज की कई धाराएं, अन्य आरोपियों की तलाश
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की धारा 79, 352, 353 और 356 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। थाना प्रभारी निरीक्षक कैलाश चंद्र भट्ट के निर्देशों के बाद इस पूरे मामले की गहन जांच उपनिरीक्षक राकेश रावत को सौंपी गई है। पुलिस अब इस बात की बारीकी से जांच कर रही है कि वीडियो में किस तरह की सामग्री का इस्तेमाल किया गया, उसे सोशल मीडिया पर किसने और कैसे प्रसारित किया तथा इस पूरे कृत्य में अन्य लोगों की क्या भूमिका रही है। जांच के दौरान यह भी परखा जा रहा है कि वीडियो किस संदर्भ में शूट किया गया था और उसमें दिए गए बयानों का वास्तविक स्वरूप क्या था।



















