अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह डर सताने लगा है कि कोई उनकी जान लेने की कोशिश कर रहा है, वह भी तब जब दुनिया के कई हिस्सों में जंग की आग भड़की हुई है. इसी आशंका के चलते अब एक असामान्य कदम उठाया गया है, उनके करीबी लोगों के निजी मोबाइल फोन खंगाले जा रहे हैं. ट्रंप प्रशासन एक संवेदनशील जानकारी लीक होने के मामले की जांच कर रहा है और इस जांच का दायरा अब व्हाइट हाउस के कर्मचारियों और सरकारी अधिकारियों के निजी फोन तक पहुंच गया है. रिपोर्टों के मुताबिक कुछ अधिकारियों से पहले ही उनके मोबाइल फोन जांचकर्ताओं को सौंपने के लिए कहा जा चुका है.
आखिर माजरा क्या है
यह पूरी पड़ताल तब शुरू हुई जब मीडिया में कतर की ओर से अमेरिका को गिफ्ट किए गए बोइंग 747 विमान की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे. यह विमान आगे चलकर राष्ट्रपति के मौजूदा आधिकारिक विमान एयर फोर्स वन की जगह लेने वाला है और इसे राष्ट्रपति के सुरक्षित हवाई किले के तौर पर इस्तेमाल किया जाना है. इन खबरों ने ट्रंप को इतना बेचैन कर दिया कि उन्होंने यह पता लगाने के लिए गहरी जांच के आदेश दे दिए कि आखिर यह जानकारी मीडिया तक पहुंची कैसे.
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि राष्ट्रपति के इस नए विमान में लगातार कई बदलाव किए जा रहे हैं, इसके बावजूद कतर का दिया यह विशाल विमान अभी भी मौजूदा एयर फोर्स वन जितनी सुरक्षा और संचार सुविधाएं नहीं देता. यह भी कहा गया कि इस विमान को जरूरत से ज्यादा जल्दबाजी में सेवा में उतारने की तैयारी चल रही है. हालांकि डोनाल्ड ट्रंप खुद कई मौकों पर इस विमान की जमकर तारीफ कर चुके हैं और इससे जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को सिरे से खारिज करते रहे हैं. राष्ट्रपति के सार्वजनिक भरोसे और लीक हुई इन चिंताओं के बीच के इसी टकराव ने प्रशासन को यह खोजने पर मजबूर कर दिया कि आखिर मीडिया से बात किसने की.
अधिकारियों से निजी मोबाइल फोन क्यों मांगे जा रहे हैं
जांचकर्ताओं को शक है कि यह जानकारी शायद उन्हीं अधिकारियों के जरिए बाहर निकली है जो विमान की सुरक्षा जांच, उसकी नए सिरे से तैयारी या फिर राष्ट्रपति की यात्रा से जुड़ी योजना बनाने के काम में सीधे तौर पर जुड़े थे. यही वजह है कि जांच का पूरा फोकस उन अधिकारियों पर है जिनकी विमान से जुड़ी जानकारी तक पहुंच थी या जो पहले ट्रंप के साथ यात्रा कर चुके थे. रिपोर्टों के अनुसार ऐसे कुछ अधिकारियों से कहा गया कि वे अपने मोबाइल फोन जांच के लिए सौंप दें ताकि उनके कॉन्टैक्ट्स और बातचीत को खंगालकर लीक का सुराग ढूंढा जा सके.
सभी अधिकारी मानने को तैयार नहीं
जिन अधिकारियों से फोन मांगे गए, उनमें से हर किसी ने यह मांग नहीं मानी. मामला इतना तूल पकड़ चुका है कि कम से कम एक संघीय एजेंसी ने अपने कर्मचारियों को साफ हिदायत दी है कि अगर कोई बाहरी जांचकर्ता उनके निजी मोबाइल फोन तक पहुंच मांगे, तो वे कुछ भी देने से पहले एजेंसी के अपने वकीलों से सलाह जरूर लें. यह सलाह खुद इस बात का सबूत है कि विमान की तकनीकी जानकारी जैसे मुद्दे से शुरू हुआ यह मामला प्रशासन के भीतर कितना संवेदनशील बन चुका है.
कतर का यह तोहफा पहले भी विवादों में रहा है
कतर का दिया यह विमान पहली बार सुर्खियों में नहीं आया है. जब कतर ने डोनाल्ड ट्रंप को बोइंग 747 विमान भेंट किया था, तब इसकी कीमत करीब 40 करोड़ डॉलर यानी लगभग 3,300 करोड़ रुपये आंकी गई थी. कहा जाता है कि ट्रंप को यह तोहफा इतना पसंद आया कि इसे राष्ट्रपति के खास विमान के तौर पर तैयार करने की तैयारियां शुरू कर दी गईं. यह विमान बार-बार विवादों में इसलिए घिरता रहा है क्योंकि कई सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि इसमें अभी भी वे एडवांस सिक्योरिटी और कम्युनिकेशन सिस्टम मौजूद नहीं हैं जो मौजूदा एयर फोर्स वन में पहले से लगे हैं, और यह कमी उतनी ही ज्यादा चिंता की बात बन जाती है जितना यह विमान राष्ट्रपति को असल में उड़ाने के करीब पहुंचता है.











