हाल ही में आयोजित हुई BRICS बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश दिया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि अब किसी भी एक देश की मनमानी और एकतरफा प्रभुत्व का दौर समाप्त हो चुका है। विश्व के सभी देशों को एक साथ मिलकर आगे बढ़ना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान को वैश्विक मंच पर पुराने ढर्रे को बदलने के खुले ऐलान के रूप में देखा गया। आज के बदलते समीकरणों पर नजर डालें तो साफ पता चलता है कि वैश्विक व्यवस्था में कितना बड़ा बदलाव आ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप, जो आम तौर पर किसी अन्य देश को उतनी अहमियत देने के लिए नहीं जाने जाते, वे अब चीन और भारत दोनों के साथ संतुलन साधने की कोशिशों में जुटे हैं। एक तरफ जहां अमेरिकी धरती पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के स्वागत में लाल कालीन बिछाया जा रहा है और लड़ाकू विमानों का प्रदर्शन हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप के करीबी सहयोगी भारत के साथ मजबूत हो रहे सैन्य रिश्तों की तारीफ कर रहे हैं। यह रणनीतिक संतुलन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में आ रहे एक बड़े बदलाव को रेखांकित करता है, जहां पारंपरिक गठबंधनों का स्थान अब रणनीतिक प्राथमिकताओं पर आधारित साझेदारियां ले रही हैं। एशिया के दो सबसे प्रभावशाली देशों के साथ एक ही समय पर संवाद साधकर अमेरिका एक बेहद नाजुक राजनयिक संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है। वह बीजिंग के साथ व्यापारिक तनाव को कम करने की कोशिशों में जुटा है, तो दूसरी तरफ नई दिल्ली के साथ अपनी सैन्य साझेदारी को एक नया आयाम दे रहा है। यह दोहरा दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि वैश्विक ढांचा अब बहुध्रुवीय वास्तविकता की ओर बढ़ रहा है, जहां किसी भी एक शक्ति का एकतरफा प्रभुत्व अब इतिहास की बात बन चुका है।
ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर प्रोटोकॉल तोड़कर स्वागत
अमेरिकी प्रशासन द्वारा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जिस तरह से अगवानी की गई, उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका के पिछले 50 से 60 वर्षों के इतिहास में किसी विदेशी नेता का इस स्तर पर स्वागत नहीं देखा गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने स्थापित राजनयिक प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए तीन दिवसीय दौरे पर आए शी जिनपिंग का स्वागत खुद एयरपोर्ट पर जाकर किया। जब शी जिनपिंग का विमान अमेरिका के ज्वाइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पर उतरा, तो ट्रंप वहां पहले से ही खड़े थे। उनके साथ उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप भी मौजूद थीं। जैसे ही शी जिनपिंग अपनी पत्नी पेंग लियुआन के साथ विमान की सीढ़ियों से नीचे उतरे, ट्रंप सीधे उनके पास पहुंचे और दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया। इस दौरान एक दिलचस्प दृश्य देखने को मिला; ठंड के कारण ट्रंप ने दस्ताने और ओवरकोट पहन रखे थे, लेकिन जिनपिंग से हाथ मिलाने के लिए उन्होंने अपना दस्ताना उतार दिया। उपस्थित लोगों ने यह भी ध्यान दिया कि ट्रंप ने थोड़ा झुककर अभिवादन किया, जबकि जिनपिंग पूरी तरह सीधे खड़े रहे।
रेड कारपेट, गन सैलूट और अमेरिकी वायुसेना का बैंड
इस स्वागत समारोह को भव्य बनाने के लिए सुरक्षा और सम्मान के व्यापक इंतजाम किए गए थे। एयरपोर्ट के टरमैक पर करीब 100 फीट लंबा रेड कारपेट बिछाया गया था, जिसके दोनों ओर अमेरिकी सेना के 21 गार्ड्स सलामी की मुद्रा में तैनात थे। इसके अलावा, दोनों देशों के राष्ट्रध्वज थामे हुए तीन-तीन विशेष गार्ड्स अग्रिम पंक्ति में खड़े थे। समारोह के दौरान दोनों देशों का राष्ट्रगान बजाया गया और US एयर फोर्स बैंड ने अपनी विशेष प्रस्तुति दी। इस मौके पर शी जिनपिंग को गन सैलूट भी दिया गया, जिसके तहत एक के बाद एक कई गोले दागे गए। अमेरिका में ऐसी परंपरा बहुत कम रही है कि किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष के स्वागत के लिए स्वयं राष्ट्रपति एयरपोर्ट पर मौजूद रहें। इससे पहले वर्ष 1962 में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ब्रिटिश प्रधानमंत्री हेरोल्ड मैकमिलन के स्वागत के लिए सैन्य बेस पर पहुंचे थे।
आसमान में गरजते B-1 बॉम्बर और सोशल मीडिया पर उड़ा मजाक
स्वागत समारोह का मुख्य आकर्षण आसमान में उड़ते दो B-1 लांसर बॉम्बर जेट थे, जिन्होंने अपनी गर्जना के साथ फ्लाईपास्ट किया। ये अमेरिकी सुपरसोनिक जेट बेहद घातक माने जाते हैं और पलक झपकते ही दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, यही भव्य प्रदर्शन ट्रंप के लिए फजीहत का कारण बन गया। जब ये B-1 लांसर बॉम्बर बेहद कम ऊंचाई से हवा को चीरते हुए गुजरे, तो उनकी भीषण गूंज से ट्रंप पूरी तरह चौंक गए और उनके चेहरे के हाव-भाव बिगड़ गए। इसके विपरीत, उनके ठीक बगल में खड़े चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बिल्कुल शांत और अविचलित दिखे। उन्होंने केवल सामान्य रूप से दाएं-बाएं देखा और उनके चेहरे पर किसी भी तरह की घबराहट या प्रतिक्रिया नहीं दिखी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ट्रंप का अमेरिका में ही काफी मजाक उड़ाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जिनपिंग को प्रभावित करने के लिए ट्रंप ने जानबूझकर इन विमानों को इतनी कम ऊंचाई पर उड़वाया, लेकिन यह दांव खुद उन्हीं पर उल्टा पड़ गया।
जमीन पर तैनात लड़ाकू विमान और गार्ड ऑफ ऑनर
इस भव्य आयोजन में केवल आसमानी फ्लाईपास्ट ही शामिल नहीं था, बल्कि ज्वाइंट बेस एंड्रयूज के रनवे पर छह F-16 और छह F-22 लड़ाकू विमानों को भी कतार में खड़ा किया गया था। जब आसमान में सुपरसोनिक विमान अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे थे, तब जमीन पर अमेरिकी सेना के 479 जवानों का दस्ता शी जिनपिंग को सम्मान देने के लिए गार्ड ऑफ ऑनर पेश कर रहा था। पायलटों, सुरक्षाकर्मियों और वायुसेना बैंड की यह अनुशासित कतार पूरी तरह से चीनी राष्ट्रपति को प्रभावित करने और अमेरिकी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करने के उद्देश्य से तैयार की गई थी।
मुनीर से दोस्ती और आलोचनाओं का दौर
सोशल मीडिया पर ट्रंप की इस फजीहत की तुलना पाकिस्तान और वहां के सेना प्रमुख मुनीर के संदर्भों से की जा रही है। आलोचकों का कहना है कि जब से ट्रंप ने मुनीर को अपना मित्र बनाया है, तब से वे लगातार ऐसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं जो उनके लिए असहज करने वाली साबित हो रही हैं। इस पूरे दौरे से जुड़ी दो तस्वीरों ने इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोरी हैं, जिनमें से एक जिनपिंग के स्वागत के लिए बिछी लाल कालीन की है और दूसरी विमानों की गूंज से असहज होते ट्रंप की।
भारत के साथ राजस्थान और उत्तराखंड में युद्धाभ्यास
एक तरफ जहां डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में शी जिनपिंग के स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे भारत के साथ रणनीतिक रक्षा संबंधों को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं। इसी सिलसिले में भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच उत्तराखंड और राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में एक बड़ा साझा सैन्य अभ्यास आयोजित किया जा रहा है। इस युद्धाभ्यास की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ट्रंप के बेहद करीबी और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर स्वयं जमीनी हकीकत का जायजा लेने पहुंचे। उन्होंने दोनों देशों के सैनिकों को एक साथ अभ्यास करते हुए देखा और इस साझेदारी की सराहना की। सर्जियो गोर ने कहा कि भारतीय और अमेरिकी सैनिकों को एक साझा मंच पर ट्रेनिंग करते देखना बेहद गर्व की बात है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ती रक्षा भागीदारी की वास्तविक ताकत को दर्शाता है।
महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में तोपों की गर्जना
यह युद्धाभ्यास मुख्य रूप से राजस्थान के बीकानेर में स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित हो रहा है, जहां दोनों देशों की तोपें और बख्तरबंद गाड़ियां अपनी ताकत दिखा रही हैं। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य युद्ध जैसी वास्तविक और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में दोनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल को बेहतर बनाना है। अभ्यास के दौरान सैनिक तोपों की त्वरित तैनाती, जवाबी गोलाबारी, दुश्मन के ठिकानों पर सटीक निशाना लगाने और 'शूट एंड स्कूट' यानी हमला करके तुरंत अपनी स्थिति बदलने की तकनीकों का गहन अभ्यास कर रहे हैं। इसके साथ ही इस सैन्य अभ्यास में अत्याधुनिक होवित्जर तोपों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे दोनों सेनाओं की मारक क्षमता और युद्ध के मैदान में उनकी रणनीतिक तैयारियों को एक नई धार मिल रही है। यह सैन्य अभ्यास दोनों देशों के जमीनी कमांडरों के बीच आपसी तालमेल और रणनीतिक योजना साझा करने पर भी विशेष जोर देता है। मैदानी अधिकारी संयुक्त रूप से रणनीतिक योजनाएं बना रहे हैं और पर्वतीय व अर्ध-रेगिस्तानी इलाकों में अपने युद्धक अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा कर रहे हैं। बीकानेर में भारी तोपखाने के अभ्यास का शामिल होना पारंपरिक और उच्च-तीव्रता वाले संघर्षों की तैयारियों को दर्शाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि आपातकालीन परिस्थितियों में दोनों सेनाएं अपनी संचार प्रणालियों और गोलाबारी के नियमों को कम समय में ही एक-दूसरे के साथ जोड़ सकें। इस प्रशिक्षण में रक्षात्मक पैंतरों और त्वरित लामबंदी के लिए विशेष सिमुलेशन अभ्यास भी शामिल हैं, जो इस रणनीतिक सहयोग की व्यापकता को उजागर करते हैं।



















