मेटा के स्वामित्व वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप ने किशोरों के खातों की निगरानी और सुरक्षा को मजबूत करने के मकसद से नए पेरेंटल कंट्रोल टूल्स जारी किए हैं। इन सुरक्षा उपायों की मदद से माता-पिता अब यह तय कर सकेंगे कि उनके किशोर उम्र के बच्चे ऐप पर किसके साथ जुड़ रहे हैं। इसके साथ ही मेटा एआई चैटबॉट्स के जरिए मिलने वाले कंटेंट और बातचीत के दायरे को भी नियंत्रित करने के विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं।
ग्रुप्स और स्टेटस अपडेट्स पर सीधी निगरानी
नए सुरक्षा विकल्पों के तहत अभिभावक यह सीमित कर सकते हैं कि किशोर चैनल का इस्तेमाल कैसे करेंगे, वे किन संपर्कों के स्टेटस अपडेट देख सकते हैं और उनका अपना स्टेटस कौन-कौन देख सकता है। इसके अलावा किसी भी ग्रुप में किशोर को कौन जोड़ सकता है और उनकी प्रोफाइल फोटो कौन देख सकता है, इस पर भी माता-पिता का नियंत्रण रहेगा। ग्रुप गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक विशेष अलर्ट सिस्टम भी दिया गया है। जब कोई किशोर किसी नए ग्रुप में शामिल होता है, कोई ग्रुप छोड़ता है, या फिर उस ग्रुप के सदस्यों की संख्या 30, 100 अथवा 250 तक पहुंचती है, तो अभिभावक इसके लिए तुरंत नोटिफिकेशन पाने का विकल्प चुन सकते हैं।
पिन सुरक्षा और मेटा एआई कंटेंट सेटिंग्स
सुरक्षा के इन सभी पैमानों को सुरक्षित रखने के लिए माता-पिता द्वारा तय किया गया एक गुप्त पिन काम करेगा। अगर कोई किशोर इनमें से किसी भी प्राइवेसी या सुरक्षा सेटिंग में बदलाव करना चाहता है, तो उसे पहले अपने अभिभावक की मंजूरी लेनी होगी। यदि परिवार चाहे तो इन तमाम कंट्रोल्स को पूरी तरह बंद भी कर सकता है। इसके अलावा मेटा एआई बातचीत के लिए भी अलग कंटेंट सेटिंग्स पेश की गई हैं। इसमें डिफ़ॉल्ट 13+ सेटिंग के अलावा एक अधिक सख्त 'लिमिटेड कंटेंट' का विकल्प मिलता है। इस कड़े विकल्प को चुनने पर प्राइवेट प्रोसेसिंग पर आधारित फीचर्स जैसे इनकॉग्निटो चैट और मैसेज समरी जैसी सुविधाएं निष्क्रिय हो जाती हैं। व्हाट्सएप ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन नए कंट्रोल्स के लागू होने के बावजूद ऐप पर सभी मैसेज और वॉयस या वीडियो कॉल्स एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड रहेंगी, जिसका अर्थ है कि कोई भी बाहरी व्यक्ति या कंपनी उन्हें नहीं देख सकती।
कानूनी दबाव और सुरक्षा उपायों का विस्तार
बच्चों पर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों को लेकर मेटा लंबे समय से कई मुकदमों का सामना कर रहा है। नीति निर्माताओं और नियामकों ने खासकर इंस्टाग्राम पर किशोरों की सुरक्षा से जुड़े फीचर्स जारी करने में हुई देरी को लेकर कंपनी पर कड़े सवाल उठाए हैं। इसी कानूनी दबाव के तहत अगस्त में कंपनी ने अमेरिका के 29 राज्यों द्वारा दायर मुकदमे को सुलझाने के लिए 18 बिलियन डॉलर का भारी जुर्माना भरने पर सहमति जताई थी। नतीजतन, कंपनी अपने सभी सोशल ऐप्स पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कदम लगातार तेज कर रही है। इसी साल मेटा ने फिल्मों की रेटिंग से प्रेरित कंटेंट कंट्रोल लागू किए, मेटा एआई बातचीत के लिए पेरेंटल कंट्रोल्स शुरू किए, व्हाट्सएप पर 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए पेरेंट-लिंक्ड अकाउंट्स जोड़े, और इंस्टाग्राम पर यदि कोई किशोर खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या से जुड़ा कंटेंट खोजता है तो अभिभावकों को तत्काल अलर्ट भेजने की व्यवस्था शुरू की है।



















