अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में यूरोप की साझी मुद्रा यूरो ने हालिया गिरावट के बाद स्थिरता दिखाई है। इससे पहले EUR/USD जोड़ी फिसलकर 1.1312 पर आ गई थी, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर दर्ज किया गया था। बाजार भागीदारों की नजरें विशेष तौर पर यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था फ्रांस की राजकोषीय स्थिति और पूरे महाद्वीप के आर्थिक संकेतकों पर टिकी हुई हैं।
फ्रांस के राजकोषीय हालात और बॉन्ड यील्ड में फैलाव
यूरोपीय बॉन्ड बाजार में फ्रांस और जर्मनी के 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर बढ़कर 120 बेसिस पॉइंट्स (bps) तक पहुंच गया है। यह वर्ष 2012 के बाद दोनों देशों के सरकारी ऋण पर प्रतिफल का सबसे बड़ा फैलाव है। सरकारी बॉन्ड यील्ड में इस व्यापक अंतर को निवेशक फ्रांस की वित्तीय सेहत को लेकर बढ़ते जोखिम के तौर पर देख रहे हैं।
इस दबाव की मुख्य वजह फ्रांस की ऋण प्रबंधन एजेंसी द्वारा सामने रखे गए नए आंकड़े हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2027 के लिए देश की कुल वित्तपोषण आवश्यकता रिकॉर्ड 339.7 अरब यूरो रहने का अनुमान है। यह वर्ष 2026 की जरूरतों के मुकाबले 28 अरब यूरो अधिक है। एजेंसी का यह संपूर्ण अनुमान इस आधार पर तय किया गया है कि सरकार अपने सार्वजनिक घाटे को जीडीपी के 5.0% के लक्ष्य पर सीमित रखने में सफल रहेगी।
जर्मनी में मुद्रास्फीति और एशियाई मुद्राओं का प्रदर्शन
यूरोपीय आर्थिक परिदृश्य में जर्मनी के महंगाई आंकड़े भी चर्चा के केंद्र में हैं। जर्मनी की संघीय सांख्यिकी एजेंसी डेस्टैटिस द्वारा जारी प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में दर्ज बदलाव के तहत देश में मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 3.3% पर पहुंच गई, जो अगस्त में 2.9% दर्ज की गई थी। इस बढ़ोतरी ने यूरोप में कीमतों के दबाव पर नए सवाल खड़े किए हैं।
उधर एशियाई बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव देखने को मिला। बुधवार के कारोबारी सत्र में AUD/USD जोड़ी गिरकर 0.6950 के करीब दो महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई। अगस्त महीने के ऑस्ट्रेलियाई कोर सीपीआई आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावनाओं को बड़ा झटका लगा। इसके साथ ही चीन के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र से जुड़े पीएमआई आंकड़े भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा देने में नाकाम रहे, जबकि अमेरिकी डॉलर की हालिया बढ़त थम चुकी थी।
येन में मजबूती, अमेरिकी डॉलर की सुस्ती और सोना
जापान की मुद्रा येन के मोर्चे पर गतिविधियां अलग दिशा में रहीं। बुधवार को एशियाई कारोबार में USD/JPY जोड़ी 157.00 के नीचे सिमटी रही। बैंक ऑफ जापान द्वारा सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने के रुख और येन को सहारा देने के लिए संभावित सरकारी दखल के जोखिम ने जापानी मुद्रा को मजबूती प्रदान की। इसने जापान के कमजोर घरेलू औद्योगिक उत्पादन और खुदरा बिक्री के आंकड़ों के असर को काफी हद तक बेअसर कर दिया। साथ ही, व्यापक स्तर पर अमेरिकी डॉलर के पीछे हटने से भी इस जोड़ी पर नीचे की तरफ दबाव बना।
अमेरिकी कारोबारी सत्र की शुरुआत में बहुमूल्य धातु सोने में सुधार की गति तेज हुई और यह 4,200 डॉलर प्रति औंस के पार कारोबार करने लगा। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने डॉलर को मंगलवार को छुए दो महीने के उच्च स्तर से नीचे धकेल दिया, जिससे सोने को मजबूत सहारा मिला। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) मूल्य सूचकांक के तहत मुद्रास्फीति के आंकड़े अनुमान से नरम रहे, जिसने डॉलर की कमजोरी को और बढ़ा दिया।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव
डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में बुधवार को कारोबार सुस्त नजर आया। सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन 83,000 डॉलर के स्तर को निकटतम सपोर्ट के रूप में बचाने के लिए जूझती दिखी। ट्रेडर्स इस महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक सीमा के आसपास सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी इथेरियम भी बिटकॉइन के नक्शेकदम पर चलती दिखी और सीमित दायरे में फंसी रही। इसके लिए ऊपर की तरफ 2,700 डॉलर का स्तर प्रतिरोध और नीचे की तरफ 2,600 डॉलर का स्तर समर्थन बना हुआ है। वहीं, रिपल का टोकन 1.50 डॉलर के करीब ट्रेड करता नजर आया। विभिन्न मुद्राओं, धातुओं और डिजिटल संपत्तियों में यह हलचल यह दर्शाती है कि निवेशक केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों और वैश्विक ऋण परिदृश्य के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बने हुए हैं।



















