देश के पूर्वोत्तर हिस्से में मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 की सुबह की शुरुआत ज़मीन की हलचल के साथ हुई। भारत के दो अलग-अलग राज्यों में सुबह-सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों में कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया। हालांकि इन दोनों ही झटकों की तीव्रता बहुत अधिक नहीं थी, लेकिन सुबह के शांत वक्त में अचानक धरती के कांपने से कई लोगों की नींद खुल गई और वे तुरंत अपने घरों से बाहर सुरक्षित स्थानों की ओर निकल आए।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) की ओर से जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जिन दो राज्यों में यह प्राकृतिक हलचल दर्ज की गई, उनमें अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम शामिल हैं। राहत की बात यह रही कि रिक्टर स्केल पर इन दोनों ही भूकंपों की तीव्रता 3 से कम मापी गई, जिसके कारण किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान या बड़े पैमाने पर तबाही की कोई सूचना सामने नहीं आई है।
अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग में आया भूकंप
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग जिले में मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को सुबह ठीक 7 बजकर 35 मिनट पर धरती हिली। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 2.9 मापी गई, जो कि एक हल्की श्रेणी का झटका माना जाता है। इस भूकंप का केंद्र ज़मीन की सतह से लगभग 11 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। भूगर्भीय आंकड़ों के अनुसार, इसका केंद्र 27.887 उत्तरी अक्षांश और 94.983 पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया था। सुबह के व्यस्त समय के दौरान आए इस झटके से स्थानीय लोगों में थोड़ी देर के लिए चिंता जरूर पैदा हुई।
सिक्किम के ग्यालशिंग में तड़के महसूस हुए झटके
अरुणाचल प्रदेश से पहले सिक्किम के ग्यालशिंग में भी सुबह-सुबह धरती कांप उठी। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के रिकॉर्ड के अनुसार, सिक्किम के इस हिस्से में सुबह 4 बजकर 17 मिनट और 52 सेकंड पर भूकंप दर्ज किया गया। यहाँ रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 2.4 मापी गई, जो अरुणाचल वाले झटके से भी हल्की थी। इस भूकम्पीय गतिविधि की गहराई ज़मीन से महज 5 किलोमीटर नीचे, यानी काफी उथली सतह पर थी। इसका सटीक केंद्र 27.341 अक्षांश और 88.089 देशांतर पर स्थित दर्ज किया गया। तड़के आए इस झटके के कारण गहरी नींद में सो रहे कुछ लोगों की आँख खुल गई।
क्यों आते हैं इस क्षेत्र में बार-बार भूकंप
भौगोलिक और भूगर्भीय दृष्टिकोण से देखें तो अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम दोनों ही राज्य पूर्वोत्तर भारत के अत्यंत संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। हिमालयी बेल्ट दुनिया के सबसे सक्रिय भूगर्भीय क्षेत्रों में से एक मानी जाती है, जिसके कारण इस पूरे भूभाग में समय-समय पर छोटे और मध्यम श्रेणी के भूकंप दर्ज किए जाते रहते हैं। धरती के भीतर मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की निरंतर हलचल और आपसी रगड़ इस प्रकार की भूकम्पीय गतिविधियों की सबसे मुख्य वजह होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों हालिया घटनाओं में तीव्रता कम होने के कारण किसी बड़े खतरे की कोई आशंका नहीं थी, लेकिन हिमालयी राज्यों की इस संवेदनशीलता के कारण स्थानीय प्रशासन हमेशा सतर्क स्थिति में रहता है।





















