अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले में प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच स्थानीय प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। कानून व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के मकसद से प्रशासन ने चार व्यक्तियों को अरुणाचल प्रदेश गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम 2014 के तहत एहतियातन हिरासत में लेने के आदेश जारी किए हैं। प्रशासन का कहना है कि प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना के विरोध की आड़ में आगजनी, हिंसा और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही थी।
हिरासत के आदेश और आंदोलनकारियों पर कार्रवाई
अपर सियांग के डिप्टी कमिश्नर अशोक ताजो द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, जिन चार व्यक्तियों के खिलाफ निरोध आदेश जारी किए गए हैं उनमें कुमकु गांव के अदुम तायोम, रामकु गांव के ओमक पारों और ओकुत पालोह तथा गेकु निवासी ओसन पारों शामिल हैं। इसके साथ ही पासीघाट में बांध विरोधी आंदोलन से जुड़े पांच कार्यकर्ताओं को पुलिस हिरासत में लिए जाने की बात भी सामने आई है, जिनके सहयोगियों का कहना था कि उन्हें उनके ठिकाने के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है।
इसके अलावा बोलेंग में गुरुवार को तागर तागा और तातिन ताबिन नामक दो अन्य कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया गया। इन दोनों को पांगिन पुलिस स्टेशन में रखे जाने की सूचना है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन दोनों व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी और गिरफ्तारी की सूचना परिजनों को देने सहित सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।
प्रशासन का पक्ष और तनावपूर्ण हालात
जिला प्रशासन का कहना है कि यह सख्त फैसला जमीनी स्तर पर कानून व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा के बाद लिया गया है। पिछले चार महीनों से प्रस्तावित विशाल बांध परियोजना की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने से जुड़ी गतिविधियों के दौरान इलाके में स्थिति काफी तनावपूर्ण और संवेदनशील बनी हुई है। प्रशासन का आरोप है कि हिंसक घटनाओं के चलते मकानों और निजी व सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, जबकि सरकारी वाहनों को भी आग के हवाले किया गया था।
प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया है कि हाल के हफ्तों में संगठित हिंसा और आगजनी की घटनाओं में इजाफा हुआ है, जिससे स्थानीय निवासियों में डर का माहौल बना और विकास कार्यों में बाधा पहुंची। यिंगकियोंग पुलिस स्टेशन में हिंसा के संदिग्ध आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बावजूद गैरकानूनी गतिविधियां नहीं रुकीं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बांध का विरोध करना और कानून व्यवस्था को बनाए रखना दो अलग बातें हैं। प्रशासन ने यह चेतावनी भी दी कि आंदोलन के नाम पर हिंसा बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नागरिकों को बातचीत के जरिए शांति से अपनी बात रखनी चाहिए।
स्थानीय संगठनों की आपत्ति और सरकार का रुख
प्रशासनिक कार्रवाई पर सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम के प्रवक्ता तागोरी मिजे ने गहरी निराशा जताई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री खुद आदि समुदाय के लोगों को निर्दोष बता चुके हैं, तो फिर उनकी गिरफ्तारी क्यों की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जब परियोजना के खिलाफ आवाज उठाने वालों को लगातार हिरासत में लिया जा रहा है, तो ऐसी स्थिति में सकारात्मक बातचीत कैसे संभव हो सकती है।
प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय आबादी में लंबे समय से गहरा असंतोष है। प्रभावित लोग पर्यावरण और सामाजिक प्रभावों के बारे में व्यापक चर्चा तथा पूर्ण पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, खांडू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार का कहना है कि वर्तमान में चल रही प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट की कवायद केवल परियोजना की तकनीकी संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए है और इसे बांध निर्माण का अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए।





















