अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सियांग जिले के प्रशासन ने यिंगकियोंग शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी है। यह कदम प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट सर्वे के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों के मद्देनजर उठाया गया है, जिससे क्षेत्र में शांति भंग होने की आशंका जताई जा रही है।
जिला प्रशासन का सख्त आदेश
जिला मजिस्ट्रेट अशोक ताजो ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है। यह पाबंदियां तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं और 10 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगी। हालात की गंभीरता को देखते हुए यह आदेश एकतरफा रूप से पारित किया गया है, जिसके तहत यिंगकियोंग शहर के कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण ठिकानों के आसपास पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
प्रतिबंधित क्षेत्र और पाबंदियां
प्रशासन द्वारा जिन प्रमुख स्थानों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनमें उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक का कार्यालय परिसर, पुलिस थाना, डीसी और एसपी के आधिकारिक आवास तथा टुटिंग-यिंगकियोंग निर्वाचन क्षेत्र के विधायक आलो लिबांग का आवास शामिल है। आदेश में इस बात की आशंका जताई गई है कि कुछ असामाजिक तत्व भीड़ का फायदा उठाकर सरकारी संपत्तियों, सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं या आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं।
मार्च और हथियारों पर रोक
जारी किए गए आदेश के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी से पूर्व लिखित अनुमति के बिना इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के जुलूस, रैली, मार्च या सभाओं के आयोजन पर प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा, प्रतिबंधित क्षेत्रों के आसपास दारा, भाले और आग्नेयास्त्र जैसे घातक हथियार लेकर चलने पर भी सख्त पाबंदी है। आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 और अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू का बयान
इस बीच, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे लोगों की हिरासत का बचाव किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून व्यवस्था को बाधित करने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी। रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सियांग बेल्ट के कई ग्रामीणों को इस परियोजना के बारे में गलत जानकारी दी गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि लोकतंत्र या विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इसमें शामिल लोगों को कानून का सामना करना पड़ेगा।





















