उत्तर-पूर्वी भारत में कर चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के तहत 11 अगस्त को एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी करते हुए अरुणाचल प्रदेश में 36.47 लाख रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को सीज कर दिया है। यह पूरी कार्रवाई फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के माध्यम से करोड़ों रुपये के राजस्व को चूना लगाने वाले एक बड़े गिरोह की जांच का हिस्सा है।
पापुम पारे जिले में जब्त की गई संपत्तियों का विवरण
प्रवर्तन निदेशालय के ईटानगर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने इस कुर्की की कार्रवाई को अंजाम दिया है। जांच अधिकारियों ने अपराध की कमाई से अर्जित संपत्तियों की पहचान की, जिनमें विभिन्न संस्थाओं के बैंक खातों में जमा राशि और अरुणाचल प्रदेश के पापुम पारे जिले के नाहरलागुन स्थित बी-सेक्टर में एक व्यावसायिक भूखंड शामिल है। एजेंसी का मुख्य उद्देश्य कानूनी कार्यवाही जारी रहने के दौरान अवैध रूप से अर्जित इन संपत्तियों की बिक्री या स्थानांतरण को रोकना है।
गुवाहाटी में दर्ज प्राथमिकी से शुरू हुई थी जांच
इस पूरे मामले की नींव गुवाहाटी के आर्थिक अपराध जांच ब्यूरो पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई एक प्राथमिकी से पड़ी थी। पुलिस ने मैसर्स अमित ट्रेडर्स और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में मामला दर्ज किया था। इसके बाद जब प्रवर्तन निदेशालय ने मामले को धन शोधन के नजरिए से जांचना शुरू किया, तो जाली इनवॉइस के जरिए कर छूट हासिल करने वाले एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ।
116 करोड़ रुपये के फर्जी टैक्स क्रेडिट का खेल
जांच में यह बात खुलकर सामने आई कि मैसर्स श्री राम एंटरप्राइजेज नामक फर्म ने इस पूरे घोटाले में मुख्य भूमिका निभाई थी। वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान इस फर्म ने बिना किसी सामान या सेवा की वास्तविक आपूर्ति के ही फर्जी बिल जारी करके लगभग 116 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट तैयार किया। इस भारी-भरकम राशि में से लगभग 41.43 करोड़ रुपये को फर्जी कंपनियों के नेटवर्क के जरिए घुमाया गया और अंततः इसका लाभ उठाने वाली अंतिम लाभार्थी इकाइयों तक पहुंचाया गया।
लाभार्थी कंपनियां और अब तक की कुल कुर्की
हालिया कार्रवाई में प्रवर्तन निदेशालय ने मैसर्स सन फोर्स सोलर प्राइवेट लिमिटेड के बैंक बैलेंस को सीज किया है, जिसका सीधा संबंध अपराध से हुई आय से पाया गया था। इसके साथ ही याल्पू एंटरप्राइज, एंजेला एंटरप्राइजेज और जी इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन से जुड़े बैंक खातों और परिसंपत्तियों को भी कुर्क किया गया है, क्योंकि इन संस्थाओं ने फर्जी तरीके से टैक्स क्रेडिट हासिल कर उसका इस्तेमाल किया था। इस मामले में एजेंसी पहले भी 3.30 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर चुकी है। उस पिछली कुर्की को धन शोधन निवारण अधिनियम के निर्णायक प्राधिकरण से मंजूरी मिल चुकी है और विशेष न्यायालय में आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है। इस नवीनतम कार्रवाई के बाद मामले में कुर्क की गई कुल संपत्तियों का मूल्य अब लगभग 3.66 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, और मामले की आगे की जांच जारी है।













