अंतरराष्ट्रीय मंच पर मध्य पूर्व के तनावों के बीच एशिया के पूर्वी क्षेत्र में एक गंभीर परमाणु संकट आकार ले रहा है। दक्षिण कोरिया द्वारा अपनी नौसेना क्षमता का विस्तार करते हुए परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों के निर्माण की योजना की घोषणा के बाद कोरियाई प्रायद्वीप में सुरक्षा वातावरण तेजी से बिगड़ा है। प्योंगयांग स्थित उत्तर कोरियाई प्रशासन ने इस फैसले पर अत्यधिक तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे इस क्षेत्र में सीधे तौर पर युद्ध का खतरा बढ़ाने वाली कार्रवाई बताया है। उत्तर कोरिया का दावा है कि रक्षात्मक सुरक्षा का हवाला देकर उठाया गया यह कदम असल में दक्षिण कोरिया का खुद को पूर्ण रूप से परमाणु हथियारों से संपन्न बनाने का एक छिपा हुआ प्रयास है।
दक्षिण कोरिया की नौसेना योजना और प्योंगयांग का तीखा विरोध
दक्षिण कोरियाई सरकार ने हाल ही में अपने समुद्री रक्षा ढांचे को नए सिरे से मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी रणनीतिक योजना पेश की थी। इस परियोजना के तहत दक्षिण कोरियाई नौसेना के बेड़े में ऐसी पनडुब्बियां शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है जो परमाणु ऊर्जा से संचालित होंगी। इस उन्नत नौसैनिक क्षमता को हासिल करने का प्राथमिक उद्देश्य कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास के समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा उत्तर कोरिया की ओर से लगातार बढ़ते बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल खतरों का मुकाबला करने के लिए अपनी निगरानी क्षमता को कई गुना बढ़ाना है।
हालांकि जैसे ही इस रणनीतिक पहल का ब्योरा सार्वजनिक हुआ, उत्तर कोरिया की सरकार में भारी खलबली मच गई। प्योंगयांग ने बिना किसी देरी के इस पूरे कार्यक्रम की कड़ी निंदा की और इसे क्षेत्रीय संतुलन को ध्वस्त करने वाला कदम करार दिया। उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक वक्तव्य जारी करके सोल की मंशा पर सीधे सवाल खड़े किए हैं और चेतावनी दी है कि इस प्रकार का कदम कोरियाई प्रायद्वीप के साथ-साथ पूरे पूर्वी एशियाई क्षेत्र को एक नए और अत्यधिक खौफनाक सैन्य टकराव की ओर धकेल सकता है।
जांग कुम-चोल का कड़ा रुख और परमाणु एजेंडे के आरोप
इस पूरे मामले पर उत्तर कोरिया की ओर से मुख्य और सबसे आक्रामक हमला विदेश मंत्रालय के प्रथम उपमंत्री जांग कुम-चोल ने किया। जांग कुम-चोल ने सोल की योजना को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि परमाणु पनडुब्बी परियोजना की आड़ में दक्षिण कोरिया असल में अपने लिए परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल करना चाहता है। उनके अनुसार, यह पूरी कवायद केवल अपनी जलसीमाओं की रक्षा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है जिसके माध्यम से दक्षिण कोरिया अपने परमाणु असैन्य कार्यक्रम की सीमाओं को लांघने की कोशिश में लगा हुआ है।
जांग कुम-चोल ने विशेष रूप से वॉशिंगटन और सोल के बीच मजबूत होती सैन्य साझेदारी को इस तनाव की मुख्य वजह बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच पनडुब्बी तकनीक और नौसैनिक रणनीतियों को लेकर बढ़ रहा यह सहयोग कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता की नींव पर सीधा प्रहार है। उत्तर कोरियाई नेतृत्व का मानना है कि इस परियोजना के जरिए दक्षिण कोरिया इस्तेमाल किए जा चुके परमाणु ईंधन की रिसाइक्लिंग करने और यूरेनियम संवर्धन पर लगी पुरानी अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों को खत्म कराने का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। प्योंगयांग का यह भी कहना है कि सोल की यह गुप्त कोशिश उनके संप्रभु क्षेत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक प्रत्यक्ष खतरा बन चुकी है।
विनाशकारी फौजी ताकत का मुकाबला और केसीएनए का वक्तव्य
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के माध्यम से जारी किए गए आधिकारिक बयान में प्योंगयांग की भावी सैन्य योजनाओं और संभावित प्रतिक्रिया का खाका पेश किया गया है। बयान में साफ तौर पर कहा गया है कि उत्तर कोरिया अपनी राष्ट्रीय रक्षा प्रणालियों और रणनीतिक हथियारों के जखीरे को इस स्तर तक मजबूत करने जा रहा है कि वर्तमान तथा भविष्य में पैदा होने वाले किसी भी सुरक्षा खतरे को पलक झपकते ही बेअसर किया जा सके। उत्तर कोरियाई प्रशासन ने चेतावनी दी है कि संभावित युद्ध को रोकने और अपनी राष्ट्रीय स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए उनके पास अपनी बेजोड़ फौजी ताकत में भारी वृद्धि करने के अलावा अन्य कोई विकल्प शेष नहीं बचा है।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया द्वारा जारी यह अत्यधिक आक्रामक बयान केवल विरोध दर्ज कराने तक सीमित नहीं है। विश्लेषकों के अनुसार, प्योंगयांग इस घटनाक्रम का इस्तेमाल अपने स्वयं के आगामी परमाणु मिसाइल परीक्षणों और नए हाई-टेक पनडुब्बी कार्यक्रमों को कानूनी तथा नैतिक रूप से सही ठहराने के लिए एक सुनियोजित बहाने के रूप में कर रहा है। उत्तर कोरिया इस स्थिति का लाभ उठाकर अपने रक्षा बजट और उन्नत हथियार प्रणालियों के विकास को तेजी से आगे बढ़ाने की फिराक में है।
सोल की सफाई: केवल रक्षात्मक कदम और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन
उत्तर कोरियाई आरोपों के जवाब में दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने प्योंगयांग के सभी दावों और आरोपों को सिरे से नकार दिया है। दक्षिण कोरिया की सरकार ने स्पष्ट किया है कि उनकी पनडुब्बी विकास योजना पूरी तरह से इस क्षेत्र में पैदा हुए गंभीर सुरक्षा माहौल का जायजा लेने के बाद ही तैयार की गई है। सोल का कहना है कि यह निर्णय अपने नागरिकों की रक्षा करने और अपनी समुद्री सीमाओं की संप्रभुता बनाए रखने का एक विशुद्ध रक्षात्मक उपाय है, जिसे किसी भी स्थिति में आक्रामक कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पार्क डू-सून ने इस विषय पर विस्तृत जानकारी देते हुए मीडिया को बताया कि प्रस्तावित पनडुब्बियों के संचालन के लिए केवल परमाणु ऊर्जा प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इन पनडुब्बियों पर तैनात किए जाने वाले हथियार पूरी तरह से पारंपरिक मिसाइलें और अस्त्र-शस्त्र ही होंगे। पार्क डू-सून ने स्पष्ट रूप से कहा कि दक्षिण कोरिया की किसी भी प्रकार का परमाणु बम या परमाणु हथियार विकसित करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने यह आश्वासन भी दिया कि पूरी परियोजना परमाणु अप्रसार संधि के सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों का पूर्ण रूप से पालन करेगी और इस पूरी प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ पूर्ण पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखी जाएगी।
रूस, चीन और उत्तर कोरिया का बदलता रणनीतिक समीकरण
दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय तथा अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर कोरिया की यह तल्ख प्रतिक्रिया केवल दो कोरियाई देशों के बीच के द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। प्योंगयांग के इस आक्रामक रुख के पीछे रूस और चीन का मजबूत कूटनीतिक और सैन्य समर्थन स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है। हाल के महीनों में उत्तर कोरिया, रूस और चीन के बीच त्रिकोणीय सैन्य और रणनीतिक सहयोग में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे इस क्षेत्र का भू-राजनीतिक संतुलन काफी बदल गया है।
प्योंगयांग का यह नया बयान रूस और चीन के उस साझा रणनीतिक दृष्टिकोण के बिल्कुल अनुकूल है, जिसके तहत दोनों देश एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी नेतृत्व वाले सुरक्षा गठबंधनों का विरोध करते रहे हैं। उत्तर कोरिया अब अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के बीच मजबूत होते तीन-तरफा सुरक्षा तंत्र और जापान की नई रक्षा नीतियों को अपनी सुरक्षा के लिए एक बड़े संकट के रूप में देख रहा है। इस माहौल में कोरियाई प्रायद्वीप में पनडुब्बी तकनीक को लेकर बढ़ा यह नया विवाद आने वाले दिनों में संपूर्ण पूर्वी एशिया के शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।




















