हिंदी सिनेमा में सफलता और असफलता का चक्र बेहद अनिश्चित होता है, जहां एक कलाकार की किस्मत रातों-रात बदल सकती है। बहुमुखी अभिनेता मोहनीश बहल का शुरुआती फिल्मी सफर भी ऐसे ही उतार-चढ़ाव से भरा रहा था। अस्सी के दशक में जब उनकी लगातार पांच फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुईं, तो उनका अभिनय करियर पूरी तरह डूबने की कगार पर पहुंच गया था। घोर निराशा के बीच उन्होंने अभिनय की दुनिया को अलविदा कहकर एविएशन सेक्टर में जाने और कमर्शियल पायलट बनने का मन बना लिया था। हालांकि, ठीक उसी मोड़ पर सुपरस्टार सलमान खान के सहयोग से उन्हें एक ऐसा मौका मिला जिसने हिंदी फिल्म उद्योग में उनकी पहचान हमेशा के लिए बदल दी।
सिनेमा की शुरुआती नाकामी और पायलट बनने का फैसला
मोहनीश बहल ने साल 1983 में रिलीज हुई फिल्म बेकरार से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। हालांकि, यह फिल्म दर्शकों को आकर्षित करने में नाकाम रही और बॉक्स ऑफिस पर असफल साबित हुई। इसके तुरंत बाद आई उनकी दूसरी फिल्म तेरी बाहों में भी व्यावसायिक रूप से सफल नहीं हो सकी। हालांकि रामसे ब्रदर्स के निर्देशन में बनी हॉरर फिल्म पुराना मंदिर ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की और हिट रही, लेकिन उस दौर में हॉरर फिल्मों को बी-ग्रेड सिनेमा की श्रेणी में रखा जाता था। इस वजह से इस हिट फिल्म के बावजूद मोहनीश बहल के मुख्यधारा के करियर को कोई खास गति या फायदा नहीं मिल सका।
एक के बाद एक लगातार पांच से छह फिल्में फ्लॉप होने के बाद मोहनीश बहल का हौसला टूटने लगा था। सिनेमा जगत में लगातार मिल रही असफलता से हताश होकर उन्होंने अभिनय छोड़कर एक नया करियर चुनने का निर्णय लिया। उन्होंने एविएशन क्षेत्र में कदम रखने का मन बनाया और व्यावसायिक उड़ान के लिए आवश्यक कमर्शियल फ्लाइंग लाइसेंस प्राप्त करने की दिशा में तैयारियां शुरू कर दीं।
जिम में मुलाकात और राजश्री प्रोडक्शंस का टर्निंग पॉइंट
जब मोहनीश बहल अपनी फिल्मी राह छोड़कर पायलट बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे थे, तभी उनकी जिंदगी में एक नया मोड़ आया। वर्कआउट के दौरान एक जिम में उनकी मुलाकात सलमान खान से हुई। इस मुलाकात के बाद दोनों के बीच गहरी और मजबूत दोस्ती कायम हो गई। उसी समय राजश्री प्रोडक्शंस अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म मैंने प्यार किया के लिए कलाकारों का चयन कर रहा था। इस फिल्म में मुख्य अभिनेता के रूप में सलमान खान को पहले ही चुना जा चुका था।
अपनी दोस्ती और मोहनीश बहल की प्रतिभा पर भरोसा जताते हुए सलमान खान ने फिल्म के निर्माताओं से विलेन के किरदार जीवन के लिए मोहनीश के नाम की सिफारिश की। निर्माताओं ने इस सुझाव को स्वीकार कर लिया और मोहनीश को यह नकारात्मक भूमिका सौंप दी। साल 1989 में रिलीज हुई फिल्म मैंने प्यार किया ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान रचे। इस फिल्म की ऐतिहासिक कामयाबी ने मोहनीश बहल के डूबते करियर को न केवल नया जीवन दिया, बल्कि उन्हें बॉलीवुड में एक प्रभावशाली विलेन के रूप में स्थापित भी कर दिया।
मजबूत फिल्मी पृष्ठभूमि और मां नूतन का मार्गदर्शन
14 अगस्त 1961 को मुंबई में जन्मे मोहनीश बहल का संबंध एक अत्यंत समृद्ध और प्रतिष्ठित फिल्मी परिवार से है। वह भारतीय सिनेमा की महान अभिनेत्री नूतन के बेटे हैं और उनके पिता भारतीय नौसेना के लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीश बहल थे। उनकी पारिवारिक विरासत केवल मां तक सीमित नहीं है, उनकी नानी शोभना समर्थ और मौसी तनुजा भी हिंदी सिनेमा की विख्यात अभिनेत्रियां रही हैं। प्रसिद्ध अभिनेत्री काजोल उनकी चचेरी बहन हैं।
इतने बड़े फिल्मी घराने से ताल्लुक रखने के बावजूद शुरुआती असफलता के दिनों में मोहनीश बहल का निराश होना स्वाभाविक था। करियर के कठिन दौर में जब भी वह मानसिक तनाव या हताशा महसूस करते थे, तो अपनी मां नूतन से अपना दर्द साझा करते थे। मां नूतन हमेशा उन्हें धैर्य रखने की सलाह देती थीं। वह मोहनीश को समझाती थीं कि जीवन में बुरा वक्त स्थाई नहीं होता और शुरुआती असफलताओं से कभी जिंदगी या उम्मीद खत्म नहीं होती।
विलेन की छवि से बाहर निकलकर बने सबके चहेते बड़े भाई
फिल्म मैंने प्यार किया में खलनायक की भूमिका से मिली प्रसिद्धि के बाद, राजश्री प्रोडक्शंस ने ही मोहनीश बहल के करियर को एक नया आयाम दिया। निर्माताओं ने उनकी पर्दे पर विलेन वाली छवि को पूरी तरह बदलते हुए उन्हें एक संस्कारी, शालीन और आदर्श बड़े भाई के रूप में पेश करने का फैसला किया।
सूरज बड़जात्या के निर्देशन में बनी ब्लॉकबस्टर फिल्मों हम आपके हैं कौन और हम साथ-साथ हैं में मोहनीश बहल ने सीधे-साधे और परिवार के प्रति समर्पित बड़े भाई के किरदारों को इतनी जीवंतता से निभाया कि दर्शक उनके मुरीद हो गए। इन फिल्मों की जबरदस्त सफलता के बाद वह हर भारतीय परिवार में एक आदर्श बड़े भाई के रूप में पहचाने जाने लगे।
टेलीविजन पर डॉ. शशांक गुप्ता का ऐतिहासिक सफर
बड़े पर्दे पर अपनी अमिट छाप छोड़ने के बाद मोहनीश बहल ने टेलीविजन उद्योग का रुख किया और वहां भी ऐतिहासिक सफलता हासिल की। साल 2002 में स्टार प्लस पर शुरू हुए प्रसिद्ध मेडिकल ड्रामा शो संजीवनी में उन्होंने डॉ. शशांक गुप्ता की मुख्य भूमिका निभाई। यह धारावाहिक भारतीय टेलीविजन के इतिहास में सामाजिक जागरूकता और HIV जैसे गंभीर स्वास्थ्य मुद्दों को संवेदनशीलता के साथ उठाने वाला पहला शो बना।
डॉ. शशांक गुप्ता के रूप में उनके शानदार अभिनय के लिए उन्हें साल 2003 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके बाद उन्होंने धारावाहिक कुछ तो लोग कहेंगे में डॉ. आशुतोष का मुख्य किरदार निभाया, हालांकि पीठ दर्द की गंभीर समस्या के कारण उन्हें यह शो बीच में ही छोड़ना पड़ा था। आगे चलकर साल 2019 में उन्होंने संजीवनी 2 के जरिए एक बार फिर डॉ. शशांक गुप्ता बनकर छोटे पर्दे पर वापसी की।
निजी जिंदगी, अगली पीढ़ी की शुरुआत और वर्तमान काम
मोहनीश बहल की व्यक्तिगत जिंदगी की बात करें तो उन्होंने 23 अप्रैल 1992 को अभिनेत्री एकता सोहिनी से विवाह किया था। इस दंपति की दो बेटियां हैं, जिनके नाम प्रनूतन और कृषा हैं। उनकी बड़ी बेटी प्रनूतन बहल ने अपने परिवार की सिनेमाई विरासत को आगे बढ़ाते हुए साल 2019 में बॉलीवुड में कदम रखा। प्रनूतन ने सलमान खान के प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनी फिल्म नोटबुक से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की।
मोहनीश बहल को आखिरी बार साल 2019 में प्रदर्शित हुई ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म पानीपत में देखा गया था। वर्तमान में वह नियमित अभिनय से दूरी बनाए हुए हैं और अपने पारिवारिक व्यवसाय तथा संपत्तियों के प्रबंधन का कार्य संभाल रहे हैं, साथ ही अपने निजी जीवन का आनंद ले रहे हैं।


















