पूर्वोत्तर के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक सुरक्षा पशुपालन से गहराई से जुड़ी हुई है। असम के डिमा हसाओ जिले स्थित हाफलोंग में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए अरुणाचल प्रदेश के कृषि, बागवानी और पशुपालन मंत्री गेब्रियल डी वांगसू ने पूरे क्षेत्र में मिथुन और मवेशी पालन प्रथाओं को आधुनिक बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने क्षेत्रीय नेतृत्व और विशेषज्ञों से अपील की कि वे मजबूत नीतिगत कदम उठाएं, पशु स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाएं और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक अपनाएं।
वैज्ञानिक बाड़बंदी और बीमारी नियंत्रण पर ध्यान
इस बैठक में पशुओं में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों, विशेष रूप से Foot-and-Mouth Disease (FMD) से निपटने की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री वांगसू ने कहा कि पशुधन की सुरक्षा के लिए ग्रामीण किसानों के बीच समय पर जागरूकता अभियान चलाना और नीतिगत हस्तक्षेप करना बेहद जरूरी है। उन्होंने सलाह दी कि पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने, बीमारियों के प्रसार को रोकने और मवेशी पालन को आर्थिक रूप से लाभदायक बनाने के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ वैज्ञानिक बाड़बंदी तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए।
मिथुन के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए वांगसू ने कहा कि मिथुन केवल पशुधन नहीं है, बल्कि यह हमारे पहाड़ी समुदायों की संस्कृति, पहचान और आजीविका का अभिन्न अंग है, और इस क्षेत्र को मजबूत करना हम सभी की साझी जिम्मेदारी और साझा प्राथमिकता है। बैठक के दौरान प्रतिनिधियों ने मिथुन के संरक्षण, वैज्ञानिक पालन-पोषण, प्रभावी बीमारी प्रबंधन और बेहतर बाजार संपर्क स्थापित करने के उपायों पर चर्चा की। इन समन्वित पहलों का मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय पशुपालकों की आय बढ़ाना और उनकी आजीविका में सुधार करना है।
उच्चस्तरीय भागीदारी और संयुक्त आयोजन
इस महत्वपूर्ण मंथन बैठक में कई प्रमुख नीति निर्माता, कृषि वैज्ञानिक और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में असम की पशुपालन, पशुचिकित्सा और मत्स्य पालन मंत्री नीलिमा देवी तथा डिमा हसाओ स्वायत्त परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य देबोलाल गोरलोसा उपस्थित थे। वैज्ञानिक नेतृत्व का प्रतिनिधित्व ICAR के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ राघवेंद्र भट्ट, डॉ के एम बुजरबरुआ और डॉ निरंजन कलिता ने किया, जबकि कई पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए।
समीक्षा बैठक के बाद मंत्री वांगसू ने हाफलोंग में आयोजित चौथे मिथुन दिवस समारोह में भाग लिया। इस कार्यक्रम का आयोजन नागालैंड के मेडजिफेमा में स्थित ICAR-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र द्वारा बेंगलुरु स्थित ICAR-भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान और डिमा हसाओ स्वायत्त परिषद के प्रशासनिक नियंत्रण वाले पशुपालन एवं पशुचिकित्सा विभाग के सहयोग से किया गया था। इस अवसर पर असम, नागालैंड, मिजोरम और मेघालय के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से भाग लेकर पूरे पूर्वोत्तर में मिथुन के संरक्षण, वैज्ञानिक प्रबंधन और टिकाऊ विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।



















