अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे जिले में शुक्रवार को भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे स्थानीय लोगों के बीच कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.9 दर्ज की गई। गनीमत यह रही कि इस घटना में अब तक किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। हालांकि, पूर्वोत्तर भारत के इस सीमावर्ती राज्य में लगातार हो रही भूगर्भीय हलचलों ने वैज्ञानिकों और स्थानीय निवासियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
अरुणाचल प्रदेश में बार-बार हिलती धरती और वैज्ञानिक चिंताएं
कुरुंग कुमे में आए इस भूकंप की पुष्टि करते हुए राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया माध्यम पर विस्तृत आंकड़े साझा किए। यह इस महीने की पहली घटना नहीं है, बल्कि इससे पहले 6 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले में भी धरती कांपी थी। उस दौरान रिक्टर स्केल पर 3.5 तीव्रता का झटका दर्ज हुआ था, जिसकी जानकारी भी राष्ट्रीय एजेंसी ने सार्वजनिक की थी। एक ही महीने के भीतर अलग-अलग जिलों में बार-बार महसूस हो रहे झटकों के कारण भू-वैज्ञानिक अब क्षेत्र में जमा हो रहे तनाव का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। हालांकि शुक्रवार को दर्ज 2.9 तीव्रता का भूकंप कम क्षमता वाली श्रेणी में आता है, फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे-छोटे झटकों की निरंतर मौजूदगी पर कड़ी नजर रखना बेहद जरूरी है।
भारतीय और यूरेशियन प्लेटों का टकराव तथा पूर्वोत्तर भारत की संवेदनशीलता
भू-वैज्ञानिकों का स्पष्ट कहना है कि उत्तर-पूर्वी भारत भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से अत्यधिक संवेदी क्षेत्र में आता है। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय जैसे राज्य भूगर्भीय रूप से बेहद सक्रिय टेक्टॉनिक जोन में स्थित हैं। भारतीय उपमहाद्वीप की भौगोलिक बनावट में कई मुख्य फॉल्ट लाइनें मौजूद हैं, जिनके आसपास निरंतर आंतरिक दबाव बनता रहता है। विशेष रूप से भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के आपस में टकराने तथा एक-दूसरे के नीचे खिसकने की प्रक्रिया के कारण इस पूरे इलाके में भारी खिंचाव पैदा होता है। जब यह संचित तनाव अचानक मुक्त होता है, तो धरातल पर झटकों के रूप में महसूस किया जाता है। इसी भूगर्भीय संरचना की वजह से पूर्वोत्तर के राज्यों में समय-समय पर कंपन होना एक प्राकृतिक लेकिन सतर्क रहने योग्य प्रक्रिया है।
चीन के सिचुआन और नेपाल में भी दर्ज हुई भूगर्भीय हलचल
अरुणाचल प्रदेश में आए इस भूकंप के तार व्यापक क्षेत्रीय भूगर्भीय हलचलों से जुड़े दिखते हैं। पड़ोसी देश चीन के दक्षिण-पश्चिमी सिचुआन प्रांत में भी शुक्रवार को शक्तिशाली झटके महसूस किए गए। चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर के अनुसार, सिचुआन के लोंगचांग शहर में दोपहर 1:13 बजे 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। इस भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 13 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। शुरुआती जानकारियों के अनुसार चीन में भी किसी बड़े नुकसान या जनहानि की खबर नहीं है। इससे पूर्व पड़ोसी नेपाल में आए भयानक भूकंपीय आपदा ने भारी तबाही मचाई थी, जहाँ कई लोगों की मृत्यु हो गई और अनेक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इन सभी घटनाओं से स्पष्ट है कि संपूर्ण हिमालयी बेल्ट इस समय अत्यधिक भूगर्भीय दबाव से गुजर रही है।



















