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रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई की हो निष्पक्ष जांच, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान को दिया कड़ा संदेशएशिया
29 जुल॰ 2026, 1:55 pm (47 दिन पहले)· 0

रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई की हो निष्पक्ष जांच, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान को दिया कड़ा संदेश

पाकिस्तान प्रशासित जम्मू कश्मीर के रावलाकोट में चुनावी हिंसा और प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों के कथित बल प्रयोग के बाद एमनेस्टी इंटरनेशनल ने स्वतंत्र जांच और इंटरनेट सेवा तत्काल बहाल करने की मांग की है।

चुनाव के दौरान क्षेत्र में बिगड़ते हालात और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बीच पाकिस्तान प्रशासित जम्मू-कश्मीर के रावलाकोट शहर में तनाव की स्थिति बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों द्वारा किए गए कथित जानलेवा बल प्रयोग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल USA ने इस हिंसा को पूरी तरह से गैरकानूनी करार देते हुए पूरे मामले की तत्काल और पारदर्शी जांच कराने पर जोर दिया है। संगठन का कहना है कि रावलाकोट की घटनाएं इस क्षेत्र में आम लोगों के खिलाफ होने वाले दमन के लंबे इतिहास को दर्शाती हैं।

पारदर्शी जांच और संचार सेवाएं बहाल करने की मांग

मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल की ओर से जारी बयान में इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया गया है कि चुनावी माहौल में नागरिकों की आवाज दबाने के लिए अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया। संस्था का कहना है कि सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर चलाई गई गोलियों और कार्रवाई की निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, वहां की सरकार से मांग की गई है कि इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी पर लगाई गई पाबंदी को बिना किसी देरी के तुरंत हटाया जाए।

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संगठन ने स्पष्ट किया है कि जब तक क्षेत्र में संचार सेवाएं बाधित रहेंगी, तब तक जमीनी हालात की सही और स्वतंत्र पुष्टि कर पाना नामुमकिन बना रहेगा। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आग्रह किया है कि मीडियाकर्मियों, पत्रकारों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को तुरंत रावलाकोट समेत प्रभावित इलाकों में जाने की अनुमति दी जाए। इससे वहां की वास्तविक स्थिति दुनिया के सामने आ सकेगी और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर रोक लगाई जा सकेगी।

जेएएसी पर प्रतिबंध और आतंकवाद विरोधी कानूनों का दुरुपयोग

चुनाव के दौरान यह तनाव उस समय और ज्यादा बढ़ गया जब प्रशासन ने जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगा दिया। एमनेस्टी इंटरनेशनल लगातार यह मांग उठाता रहा है कि इस सामाजिक-राजनीतिक संगठन पर लगाए गए बैन को तुरंत वापस लिया जाए। अधिकारियों द्वारा आतंकवाद विरोधी सख्त कानूनों का इस्तेमाल करके संगठन के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को चुप कराने तथा उन्हें मनमाने ढंग से हिरासत में लेने का काम किया जा रहा है।

मानवाधिकार संगठन ने कहा कि नागरिक अधिकारों की आवाज उठाने वाले समूहों पर पाबंदी लगाना किसी भी सूरत में सुरक्षा बलों द्वारा की जाने वाली घातक हिंसा का जरिया नहीं बन सकता। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जोर देकर कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए और दमनकारी नीतियों के बजाय पारदर्शी प्रशासनिक तंत्र की स्थापना की जानी चाहिए।

सवाल-जवाब

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने रावलाकोट घटना पर क्या मांग रखी है?
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों के बल प्रयोग की तुरंत, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है।
रावलाकोट में संचार सेवाओं की मौजूदा स्थिति क्या है?
प्रशासन ने इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर प्रतिबंध लगा रखा है, जिससे जमीनी हालात की स्वतंत्र पुष्टि में बाधा आ रही है।
जेएएसी (JAAC) क्या है और इस पर क्या कार्रवाई की गई है?
जेएएसी यानी जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी पर प्रशासन ने प्रतिबंध लगा रखा है और उसके समर्थकों पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत कार्रवाई की जा रही है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मीडिया के प्रवेश को लेकर क्या अपील की है?
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया है कि वह संचार सेवाएं तुरंत बहाल करे और मीडिया तथा स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को क्षेत्र में जाने दे।
चुनाव के दौरान तनाव बढ़ने की मुख्य वजह क्या है?
चुनावी माहौल के दौरान जेएएसी पर लगाया गया प्रतिबंध और सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग तनाव बढ़ने का मुख्य कारण रहा है।
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