आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक और 26/11 मुंबई हमलों के मुख्य साजिशकर्ता हाफ़िज़ सईद के बेटे तलहा सईद ने एक बार फिर भारत के विरुद्ध जहर उगला है। इसके साथ ही उसने पाकिस्तानी सेना के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की जमकर सराहना की है। एक सार्वजनिक जनसभा को संबोधित करते हुए उसने यह दावा किया कि आसिम मुनीर ने समाज के भीतर जिहाद और धार्मिक निष्ठा की विचारधाराओं को नए सिरे से पुनर्जीवित करने का कार्य किया है। उसने अपने संबोधन में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया कि मुनीर को पवित्र कुरान कंठस्थ है और वह ऐसे सैन्य प्रमुख को पाकर बेहद गौरवान्वित महसूस करता है।
शेखूपुरा की जनसभा और सामने आया वीडियो
संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जा चुके हाफ़िज़ मुहम्मद सईद के पुत्र तलहा सईद ने ये भड़काऊ बातें पाकिस्तान के शेखूपुरा शहर में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहीं। इस सभा का एक वीडियो भी इंटरनेट पर प्रसारित हुआ है, जिसमें उसे खुलेआम कट्टरपंथी विचार रखते हुए देखा जा सकता है। इस कार्यक्रम के जरिए एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान की धरती पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों और उनके सरगनाओं को किस प्रकार खुली छूट मिल रही है।
भारत के खिलाफ दी गई धमकियां और जिहाद का संकल्प
पाकिस्तान के भीतर सक्रिय इन प्रतिबंधित संगठनों के नेताओं को मिल रही संरक्षण की पोल खोलते हुए तलहा सईद ने भारत के प्रति अपनी शत्रुता खुलकर जाहिर की। उसने अपने भाषण के दौरान यह घोषणा की कि उसने और उसके साथियों ने जिहाद जारी रखने का दृढ़ संकल्प लिया है। उसने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब तक वे जीवित हैं और ऐसा करने की ताकत रखते हैं, तब तक यह सिलसिला थमेगा नहीं। उसने आगे यह भी जोड़ा कि वे अपनी इस मुहिम के लिए और अधिक कुर्बानियां देने के वास्ते पूरी तरह तैयार बैठे हैं।
ऐतिहासिक दावों का हवाला और खुलेआम गतिविधियों पर सवाल
भारत के संदर्भ में बात करते हुए लश्कर-ए-तैयबा के इस कमांडर के बेटे ने हास्यास्पद और भ्रामक ऐतिहासिक दावों का सहारा लिया। उसने यह तर्क दिया कि उपमहाद्वीप पर मुसलमानों ने पांच सदियों तक शासन किया था और उसने दिल्ली के शासकों को लेकर आपत्तिजनक सवाल उठाए। उसने जोर देकर कहा कि मुसलमानों का यह पुराना इतिहास इस बात की गवाही देता है कि वे सत्ता में रह चुके हैं। इस प्रकार के कार्यक्रमों में प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े व्यक्तियों का खुलेआम मंच साझा करना और भाषण देना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।



















