नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बाद देश की सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए सोमवार को राष्ट्रीय शोक दिवस और सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। इस आपदा ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, जिसके चलते नेपाल भर में विभिन्न स्थानों पर सामूहिक श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। आपदा के इस कठिन समय में जान गंवाने वाले लोगों को याद करते हुए शोक व्यक्त किया जा रहा है।
बिहार-नेपाल सीमा पर शोक और श्रद्धांजलि
आपदा के इस मंजर के बीच नेपाल के विभिन्न हिस्सों में शोक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी है। बिहार और नेपाल की सीमा पर स्थित रक्सौल से सटे बीरगंज महानगरपालिका के घंटाघर चौक पर एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान लोगों ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की और कैंडल मार्च निकालकर या दीप प्रज्वलित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस त्रासदी ने दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी गहरी चिंता और शोक की लहर पैदा कर दी है।
विनाशकारी बाढ़ और राहत कार्यों की स्थिति
नेपाल में 26 अगस्त को आए फ्लैश फ्लड और भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आपदा में अब तक 157 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। विभिन्न हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों और अन्य क्षेत्रों में फंसे लोगों की तलाश के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहायता और पड़ोसी राज्यों में हाई अलर्ट
इस बड़ी आपदा के बाद वैश्विक स्तर पर मदद के हाथ बढ़ने लगे हैं। चीन ने नेपाल के बाढ़ पीड़ितों के लिए 22 लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता राशि प्रदान की है। वहीं, नेपाल में आई इस तबाही का असर भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों पर भी पड़ा है। नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद बिहार पहुंची बाढ़ और संभावित खतरे को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और गंडक बैराज के सभी गेट खोल दिए गए हैं।



















