ज्योतिष शास्त्र में शनि साढ़ेसाती को सात वर्षों का एक बेहद चुनौतीपूर्ण और कष्टकारी समय माना गया है। जब भी न्याय के देवता शनि किसी व्यक्ति की जन्मराशि से ठीक पहले वाले भाव, खुद जन्मराशि और उसके बाद वाले यानी बारहवें, पहले और दूसरे भाव में गोचर करते हैं, तब शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव शुरू हो जाता है। वर्तमान समय में आकाश मंडल में ग्रहों की स्थिति के अनुसार, मुख्य रूप से कुंभ राशि, मीन राशि और मेष राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का भारी प्रभाव चल रहा है। इन तीनों ही राशियों पर इस विशेष प्रभाव के पीछे मुख्य वजह शनि का मीन राशि में होना है।
शनि की वक्री चाल और महत्वपूर्ण तिथियां
वर्तमान समय में शनि सीधी चाल के बजाय उलटी यानी वक्री चाल में गोचर कर रहे हैं। ग्रहों की यह वक्री गति आगामी 11 दिसंबर 2026 तक ऐसी ही बनी रहेगी। इसके बाद जाकर शनि अपनी मार्गी अवस्था में लौटेंगे। यदि इतिहास पर नजर डालें तो शनि ने मीन राशि में 17 जनवरी 2023 के दिन प्रवेश किया था। इस विशेष गोचर और समय चक्र के कारण अलग-अलग राशियों पर साढ़ेसाती के अलग-अलग चरण चल रहे हैं, जिनका प्रभाव सीधे तौर पर जातकों के जीवन पर पड़ रहा है।
विभिन्न राशियों पर साढ़ेसाती के चरण और मुक्ति की समय-सीमा
इस समय कुंभ राशि के जातकों पर शनि साढ़ेसाती का तीसरा और अंतिम चरण चल रहा है। कुंभ राशि के लोगों पर शनि की साढ़ेसाती का यह प्रभाव 3 जून 2027 तक पूरी तरह से रहने वाला है। इसके बाद इन्हें इस विशेष चक्र से राहत मिल जाएगी। वहीं दूसरी ओर, इस वक्त मेष राशि पर शनि साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। आने वाले समय में जून 2027 से इनका दूसरा चरण शुरू हो जाएगा। मेष राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का यह पूरा असर अगस्त 2029 तक बना रहेगा। इसके अलावा, इस वक्त मीन राशि पर शनि साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है। मीन राशि पर भी जून 2027 से अगला बदलाव शुरू होगा और मेष तथा मीन से जुड़े इन चरणों के तहत मीन राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव फरवरी 2028 तक रहने वाला है।
साढ़ेसाती के दौरान ध्यान रखने योग्य जरूरी बातें
शनि साढ़ेसाती के इस चुनौतीपूर्ण दौर में जीवन के अंदर विभिन्न प्रकार की समस्याओं का आना-जाना लगातार लगा रह सकता है। इस समयावधि के दौरान कुछ खास बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना बहुत आवश्यक हो जाता है। कभी भी समाज के बूढ़े-बुजुर्गों या फिर किसी भी असहाय और कमजोर व्यक्ति का अपमान भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही इस पूरे काल के दौरान गलती से भी अपने नौकर-चाकरों या कामगारों के साथ किसी भी प्रकार का गलत व्यवहार या अन्याय नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से शनि के नकारात्मक परिणाम और अधिक बढ़ सकते हैं।



















