राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन आबूराज यानी माउंट आबू की पहचान केवल खूबसूरत वादियों और ठंडे मौसम तक ही सीमित नहीं है। इस मशहूर पर्यटक स्थल के चारों तरफ फैला वन्यजीव अभयारण्य सैलानियों को एक अलग ही रोमांच का अहसास कराता है। यहां आने वाले लोग पिंजरे में बंद जानवरों को देखने के बजाय उन्हें उनके प्राकृतिक माहौल में खुलेआम घूमते हुए देख सकते हैं। वन विभाग की तरफ से यहां पर्यटकों के लिए जंगल ट्रैकिंग और जंगल सफारी जैसी रोमांचक सुविधाएं भी दी जाती हैं, जिससे प्रकृति प्रेमियों को करीब से वन्य जीवन को समझने का मौका मिलता है।
सेंचुरी के प्रमुख आकर्षण और वन्यजीवों का ठिकाना
इस वन्यजीव अभयारण्य में जानवरों और पक्षियों की कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। स्थानीय टूरिस्ट और वाइल्डलाइफ गाइड चिंटू यादव के अनुसार, इस पूरे हिल स्टेशन के आसपास का इलाका एक संरक्षित अभयारण्य क्षेत्र है। वन विभाग से अनुमति लेने के बाद पर्यटक इस घने जंगल में कदम रख सकते हैं, जहां उन्हें लेपर्ड, भालू, मगरमच्छ और ग्रे लंगूर जैसे जीव खुले घूमते नजर आते हैं। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए यह जगह हमेशा से मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
सेंचुरी क्षेत्र में कई ऐसे खास पॉइंट और प्राकृतिक रास्ते हैं, जहां रोजाना तय समय पर जानवरों की चहल-पहल देखी जा सकती है। इनमें सबसे प्रमुख नाम ट्रेवर्स टैंक का है। यह अंग्रेजों के जमाने का बना एक मानव निर्मित टैंक है, जो मुख्य रूप से मगरमच्छों के लिए जाना जाता है। इस टैंक के चारों ओर घना जंगल होने के कारण अक्सर यहां स्लॉथ बेयर, लेपर्ड और ग्रे लंगूर पानी पीने और घूमने आते हैं। इसके अलावा सैलानी संस्था पॉइंट, बेलिज वॉक और टाइगर पथ जैसे प्राकृतिक रास्तों पर भी ट्रैकिंग का लुत्फ उठा सकते हैं।
सुरक्षित यात्रा के लिए जरूरी सावधानियां और वन विभाग के नियम
घने जंगलों के बीच जंगली जानवरों को करीब से देखना जितना रोमांचक है, उतना ही संवेदनशील भी है। इसलिए पर्यटकों को यात्रा के दौरान कुछ खास सावधानियां बरतनी बेहद जरूरी हैं। सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी जंगली जानवर के करीब आने पर उससे एक सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए। अभयारण्य क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले वन विभाग की आधिकारिक मंजूरी लेना अनिवार्य है। इसके अलावा, अपनी सुरक्षा के लिए वन विभाग द्वारा प्रशिक्षित वन्यजीव गाइड को साथ लेकर ही जंगल में जाना चाहिए। इससे न केवल रास्ता भटकने का खतरा खत्म हो जाता है, बल्कि किसी जंगली जानवर के सामने आने पर सुरक्षित रहने के सही तरीके भी पता चलते हैं।
















