ग्रहों के गोचर चक्र में 26 सितंबर की सुबह एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटनाक्रम होने जा रहा है, जब चंद्रमा कुंभ राशि की अपनी यात्रा समाप्त करके मीन राशि में प्रवेश करेंगे। मीन राशि में न्यायप्रिय ग्रह शनि पहले से ही संचरण कर रहे हैं। जब भी किसी एक राशि में शनि और चंद्रमा एक साथ आते हैं, तो इस युति को ज्योतिष परंपरा में विष योग के नाम से जाना जाता है। पूर्णिमा के पावन दिन बनने वाला यह योग कुछ विशेष राशियों के लिए मानसिक, शारीरिक और वित्तीय मोर्चे पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने का संकेत दे रहा है। मुख्य रूप से मेष, सिंह और तुला राशि के जातकों पर इस ग्रह संयोग का संवेदनशील प्रभाव पड़ सकता है।
मेष राशि के जातकों के लिए व्यय और सेहत की चिंताएं
मेष राशि के जातकों की कुंडली में यह विष योग बारहवें भाव में आकार ले रहा है। ज्योतिष शास्त्र में द्वादश भाव को मुख्य रूप से हानि, व्यय और विदेश यात्राओं का स्थान माना गया है। इस भाव में शनि और चंद्रमा का एक साथ होना आकस्मिक खर्चों में भारी बढ़ोतरी का कारण बन सकता है। ऐसे समय में धन का लेन-देन या किसी को उधार देने का विचार पूरी तरह टालना ही समझदारी भरा कदम रहेगा।
स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी मेष राशि के जातकों को अपनी दिनचर्या पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इस दौरान सिरदर्द, तनाव अथवा आंखों से संबंधित तकलीफें उभर सकती हैं। जो जातक आयात-निर्यात या विदेशी कंपनियों से जुड़ा व्यवसाय करते हैं, उन्हें व्यावसायिक साझेदारियों में अत्यधिक भरोसा करने से बचना चाहिए और हर दस्तावेज़ की बारीकी से जांच करनी चाहिए। इस ग्रह योग के प्रतिकूल प्रभावों को शांत करने के लिए भगवान शिव के मंत्रों का नियमपूर्वक जप करने का परामर्श दिया जाता है।
सिंह राशि के लिए दुर्घटना और अचानक वित्तीय उतार-चढ़ाव की चेतावनी
सिंह राशि के जातकों के लिए विष योग का निर्माण उनकी कुंडली के आठवें भाव में होने जा रहा है। अष्टम भाव को ज्योतिष में संकट, भय, अप्रत्याशित बाधाओं और दुर्घटनाओं का कारक भाव माना गया है। लिहाजा, इस समयावधि में सड़क पर वाहन चलाते समय अत्यधिक संयम और नियमों का पालन करना अनिवार्य है, क्योंकि थोड़ी सी भी लापरवाही नुकसानदेह साबित हो सकती है।
शारीरिक व्याधियों और स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर भी बिल्कुल लापरवाही न बरतें। आजीविका और वित्तीय मामलों में कोई भी नया या बड़ा फैसला वरिष्ठ लोगों अथवा विशेषज्ञों की सलाह के बिना न लें। सट्टेबाजी, अनिश्चित निवेश और लॉटरी जैसे जोखिम भरे माध्यमों से दूरी बनाए रखना ही श्रेयस्कर होगा, अन्यथा जमा पूंजी संकट में पड़ सकती है। इस कठिन योग के निवारण हेतु सिंह राशि वालों को रोजाना एकाग्रचित्त होकर हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।
तुला राशि के जातकों को रोग, शत्रु और अदालती मामलों से सतर्कता जरूरी
तुला राशि के जातकों के लिए शनि और चंद्रमा की यह युति छठे भाव में बन रही है। षष्ठ भाव को रोग, ऋण, शत्रु और कानूनी विवादों का कारक माना जाता है। इस भाव में विष योग बनने से स्वास्थ्य पर सीधा विपरीत असर पड़ने की आशंका रहती है। खानपान में अनियमिता पुरानी बीमारियों को पुनः सक्रिय कर सकती है, इसलिए संतुलित आहार और संयमित जीवनशैली अपनाएं।
कार्यस्थल पर काम करते हुए अपने गुप्त शत्रुओं और प्रतिद्वंद्वियों से सावधान रहना जरूरी होगा। अपनी व्यावसायिक योजनाओं या महत्वपूर्ण गोपनीय बातों को किसी भी सहयोगी के साथ साझा न करें। आर्थिक स्तर पर अप्रत्याशित खर्चे सामने आ सकते हैं, जिससे अनिच्छा के बावजूद भारी धनराशि खर्च करनी पड़ सकती है। यदि कोई विवाद या कोर्ट-कचहरी का मामला चल रहा है, तो वहां अतिरिक्त सतर्कता बरतें। प्रतिकूल प्रभावों में कमी लाने के लिए शिवलिंग पर श्रद्धापूर्वक बेलपत्र अर्पित करने का विधान फलदायी माना गया है।


















