पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर को अमावस्या तिथि के साथ होने जा रहा है। शनिवार के दिन यह तिथि पड़ने की वजह से धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इसे शनि अमावस्या का दुर्लभ संयोग माना जाता है। ज्योतिष गणना के मुताबिक इस खास दिन कन्या राशि के भीतर सूर्य और चंद्रमा का मिलन होने जा रहा है, जिससे अमावस्या योग की स्थिति बन रही है। ग्रहों के इस विशेष संरेखण का असर सभी प्राणियों पर पड़ता है, लेकिन कुछ विशेष राशियों के लिए यह गोचर आर्थिक उतार-चढ़ाव, मानसिक दबाव और कामकाज में रुकावटों का सबब बन सकता है। ऐसे जातकों को आने वाले दिनों में हर कदम पूरी सतर्कता के साथ उठाने की आवश्यकता होगी।
कन्या राशि: शारीरिक समस्याएं और अनपेक्षित खर्च बढ़ाएंगे उलझन
सूर्य और चंद्रमा का यह विशिष्ट संयोजन कन्या राशि में ही घटित होने जा रहा है, जिस वजह से इसका सर्वाधिक प्रत्यक्ष और संवेदनशील असर इसी राशि के जातकों पर दिखाई देगा। इस अवधि में व्यक्तिगत स्वास्थ्य को लेकर विशेष एहतियात बरतने की जरूरत रहेगी, क्योंकि पुरानी बीमारियां या मौसमी तकलीफें परेशानी का कारण बन सकती हैं। इसके साथ ही बेवजह का मानसिक तनाव और अज्ञात भय भी कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। दैनिक बजट के मोर्चे पर अचानक बड़े खर्च सामने आ सकते हैं, जिससे वित्तीय संतुलन गड़बड़ाने का जोखिम रहेगा। ऐसे में किसी भी नए दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने या वित्तीय लेन-देन करते समय पूरी तरह सोच-विचार करें और बिना तैयारी के कोई बड़ा कदम न उठाएं।
तुला राशि: बारहवें भाव में गोचर से बजट और परिजनों की सेहत पर असर
तुला राशि के जातकों की कुंडली के बारहवें भाव में सूर्य और चंद्रमा की यह युति निर्मित हो रही है। ज्योतिष में बारहवां भाव व्यय, हानि और मानसिक चिंताओं से जुड़ा माना जाता है। इस गोचर के प्रभाव से आपके अनावश्यक खर्चों में अप्रत्याशित उछाल आ सकता है, इसलिए अपने आर्थिक प्रबंधन पर कड़ा नियंत्रण रखना बेहद अनिवार्य होगा। जल्दबाजी या बिना सोचे-समझे किए गए निवेश से बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। वित्तीय सावधानी के अलावा पारिवारिक मोर्चे पर माता-पिता के स्वास्थ्य को लेकर विशेष रूप से सचेत रहने की जरूरत होगी, क्योंकि उनकी सेहत में आकस्मिक गिरावट आपकी चिंताओं को बढ़ा सकती है। किसी भी विवाद से दूर रहें और संयम बनाए रखें।
मीन राशि: साझेदारी के सौदों में धोखे की आशंका और दांपत्य जीवन में खिंचाव
मीन राशि के जातकों के लिए ग्रहों का यह संयोग सातवें भाव में सक्रिय होगा, जो साझेदारी, अनुबंध और वैवाहिक जीवन का कारक माना जाता है। सातवें भाव में सूर्य-चंद्र के एक साथ आने से व्यावसायिक साझेदारी में दरार पड़ने या साझेदार की तरफ से विश्वासघात मिलने का अंदेशा बना रहता है। व्यावसायिक समझौतों में पारदर्शिता रखें और किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा न करें। वहीं दूसरी ओर, पारिवारिक और दांपत्य जीवन के मोर्चे पर भी यह स्थिति अनुकूल नहीं मानी जा रही है। जीवनसाथी के साथ संवादहीनता अथवा छोटी-छोटी बातों पर मतभेद कलह का रूप ले सकते हैं। इस समय धैर्य से काम लेना और अनावश्यक बहस से बचना ही बेहतर परिणाम देगा।
नकारात्मक प्रभावों को शांत करने के अचूक और पारंपरिक उपाय
ग्रहों के इस अशुभ प्रभाव को संतुलित करने और शनि व अमावस्या दोष से सुरक्षा पाने के लिए कुछ पारंपरिक ज्योतिषीय उपाय विशेष फलदायी माने गए हैं।
- शनिवार की शाम को पीपल के वृक्ष की जड़ के पास सरसों के तेल का चौमुखा दीपक प्रज्वलित करें।
- नियमित रूप से शिवलिंग का जलाभिषेक करें और गाय के कच्चे दूध की धारा अर्पित करें।
- भगवान शिव की कृपा पाने के लिए रुद्राक्ष माला से 'ॐ नमः शिवाय' पंचाक्षरी मंत्र का जाप करें।
- काले तिल और उड़द की साबुत दाल का किसी जरूरतमंद को श्रद्धापूर्वक दान करें।
- सूर्य और चंद्रमा के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का विधिवत पाठ करें।



















