वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार को ब्रिटिश पाउंड जापानी येन के मुकाबले जोरदार बढ़त हासिल करते हुए 209.50 के स्तर से ऊपर निकल गया। कारोबारी हफ्ते के पिछले सत्र में यह क्रॉस करेंसी 208.20 से 208.15 के दायरे में अपने साप्ताहिक निचले स्तर तक फिसल गई थी, जहां से इसने तेज वापसी दर्ज की है। यूरोपीय सत्र के शुरुआती घंटों के दौरान भी यह तेजी लगातार बनी रही और स्पॉट कीमतों ने मध्य-209.00 के दायरे को पार कर लिया। एक तरफ जहां जापान के घरेलू वित्तीय संकट और खर्च से जुड़े कमजोर आंकड़े उसकी मुद्रा पर दबाव बनाए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें ब्रिटिश पाउंड को मजबूत सहारा दे रही हैं।
जापानी मुद्रा पर वित्तीय संकट और घरेलू खर्च में गिरावट का दोहरा दबाव
जापान की अर्थव्यवस्था में वित्तीय मोर्चे पर बनी अनिश्चितताएं घरेलू मुद्रा येन की कमजोरी की मुख्य वजह बनकर उभरी हैं। शुक्रवार को सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जापान में घरेलू खर्च में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई है। उपभोग में लगातार आ रही इस कमी ने येन के प्रति निवेशकों की धारणा को काफी कमजोर कर दिया है। इसी के चलते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भी येन दबाव में रहा और यूएसडी/जेपीवाई 158.00 के स्तर के आसपास बना रहा। आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती और राजकोषीय चिंताओं के कारण येन अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के सामने लगातार पिछड़ता हुआ नजर आ रहा है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की दरों को लेकर बढ़ती उम्मीदें और पाउंड की मजबूती
ब्रिटिश पाउंड को बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति से जुड़े सख्त रुख का सीधा फायदा मिल रहा है। बाजार में यह अनुमान लगातार मजबूत हो रहा है कि ब्रिटेन का केंद्रीय बैंक आने वाले समय में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। इन दर वृद्धि की संभावनाओं ने पाउंड को मजबूत आधार दिया है, जिसके दम पर जीबीपी/जेपीवाई ने 30 सितंबर को छुए गए अपने साल के निचले स्तर यानी सब-207.00 से शुरू हुई रिकवरी को और आगे बढ़ाया है। पाउंड की इस तेजी ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है, हालांकि ऊपरी स्तरों पर सतर्कता भी देखी जा रही है।
बाजार में जापानी हस्तक्षेप का खतरा और सीमित दायरे का कारोबार
पाउंड में इस ताजा उछाल के बावजूद विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबारी बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह अटकल है कि जापानी अधिकारी अपनी गिरती मुद्रा को सहारा देने के लिए बाजार में सीधा हस्तक्षेप कर सकते हैं। जब भी येन अत्यधिक कमजोर होता है, तब टोक्यो द्वारा दखल दिए जाने का जोखिम बढ़ जाता है। इस संभावित सरकारी कदम की आशंका येन की गिरावट को एक सीमा से आगे जाने से रोक सकती है और जीबीपी/जेपीवाई की स्पॉट कीमतों पर भी एक ऊपरी सीमा लगा सकती है। इसके अलावा, पिछले कुछ समय से कीमतों का सीमित दायरे में बंधा रहना भी आक्रामक खरीदारी से पहले ट्रेडर्स को सतर्क रहने का संकेत दे रहा है।
अन्य प्रमुख मुद्राओं में हलचल और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति
वैश्विक करेंसी बाजार में केवल पाउंड और येन ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख जोड़ियों में भी शुक्रवार को उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अपने साप्ताहिक निचले स्तर से सुधार दर्ज करते हुए शुक्रवार को एशियाई सत्र में एयूडी/यूएसडी के 0.7000 के स्तर को छूने की कोशिश की। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में रातों-रात आई गिरावट ने अमेरिकी डॉलर को उसके 18 महीने के उच्च स्तर से नीचे बनाए रखा, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को राहत मिली। साथ ही रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ओर से सख्त नीतिगत रुख बनाए रखने की उम्मीदों ने भी इस तेजी को समर्थन दिया। दैनिक प्रदर्शन के आधार पर प्रमुख मुद्राओं में येन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सबसे मजबूत स्थिति में दिखा।
सोने में वापसी, तेल के दाम और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर
कमोडिटी और डेट मार्केट का असर भी मुद्रा विनिमय पर साफ दिखा। सोना शुक्रवार को दो महीने के निचले स्तर से उबरते हुए 4,200 डॉलर के स्तर पर फिर से पहुंच गया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के साथ अमेरिकी डॉलर में भी सुस्ती रही, क्योंकि बाजार अमेरिकी सेंटिमेंट डेटा का इंतजार कर रहा था। हालांकि सोने के पक्ष में हालात मुड़ते दिख रहे हैं, लेकिन इसका दैनिक आरएसआई अभी भी मंदी का संकेत दे रहा है। दूसरी ओर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच डॉलर पर दबाव बनाए रखा। इसके अलावा सांख्यिकी कनाडा शुक्रवार को सितंबर का श्रम बल सर्वेक्षण जारी करने वाला है, जिसमें अगस्त की भारी गिरावट के बाद मामूली सुधार की उम्मीद है। यह रिपोर्ट 22 अगस्त से लागू हुए नए अमेरिकी टैरिफ के पूरे असर को दर्शाने वाली पहली रिपोर्ट होगी।



















