जम्मू संभाग के किश्तवाड़ जिले में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी यानी पीडीपी के नेता अब्दुल कबीर को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। यह पूरी कार्रवाई पार्टी के एक हालिया सम्मेलन में उनके दिए गए विवादित भाषण के बाद सामने आई है। उस जलसे में उन्होंने हिज्बुल मुजाहिदीन के मारे गए कमांडर बुरहान वानी का उल्लेख करते हुए उसे शहीद का दर्जा दे दिया था। इस टिप्पणी के बाद कानून व्यवस्था से जुड़े हलकों और स्थानीय राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जिसके तुरंत बाद स्थानीय पुलिस ने उन्हें थाने तलब कर लिया।
हिरासत और पुलिस की जांच प्रक्रिया
अब्दुल कबीर द्वारा दिए गए बयानों की गूंज फैलते ही किश्तवाड़ पुलिस स्टेशन ने संज्ञान लिया और उन्हें तत्काल पूछताछ के लिए थाने में रोक लिया। गुरुवार के दिन आयोजित दलगत सम्मेलन के बाद जब संवाददाताओं ने उनसे इस मुद्दे पर सवाल किए, तो उन्होंने सफाई देने का प्रयास किया। उनका तर्क था कि उन्होंने किसी खास तरीके से वानी के साथ हुए बर्ताव का ब्योरा सामने नहीं रखा था। सुरक्षा एजेंसियों का रिकॉर्ड दर्शाता है कि घाटी के अलगाववादी हिंसक दौर का मुख्य चेहरा रहा बुरहान वानी 8 जुलाई, 2016 की तारीख को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले स्थित कोकरनाग इलाके में सुरक्षा बलों के हाथों एक मुठभेड़ में मारा गया था।
व्यक्तिगत दृष्टिकोण और लोकतांत्रिक अधिकारों का दावा
जब पत्रकारों ने कबीर से सीधे तौर पर पूछा कि क्या किसी दहशतगर्द को इस तरह सम्मानजनक संबोधन देना न्यायसंगत माना जा सकता है, तो उन्होंने शब्दों के चयन को अलग संदर्भ बताया। उनका कहना था कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के नागरिक होने के नाते हर व्यक्ति को अपने विचार रखने की पूरी आजादी हासिल है। पत्रकारों ने जब यह सवाल दोहराया कि क्या बुरहान को शहीद करार देना उनकी अपनी व्यक्तिगत राय है, तो पीडीपी नेता ने साफ तौर पर स्वीकार किया कि यह उनका अपना निजी नजरिया है।
भाजपा के साथ पुराने गठबंधन का इतिहास
अपने संबोधन के दौरान कबीर ने केवल वानी पर ही बात नहीं की, बल्कि वर्ष 2014 के दौर में भाजपा और पीडीपी की संयुक्त हुकूमत के दौर को भी विस्तार से याद किया। उन्होंने दावा किया कि जब दोनों दल मिलकर राज्य की बागडोर संभाल रहे थे, तब उनकी पार्टी ने भाजपा की नीतियों पर मजबूत पहरा बैठा रखा था। उनका कहना था कि उस दौरान महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने साझीदार को प्रशासन के फैसलों में मनमानी करने की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी थी। उन्होंने पुरानी बिजली परियोजनाओं की बिक्री का संदर्भ देते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस पर भी निशाना साधा और कहा कि उस वक्त उन मामलों पर कोई उंगली तक नहीं उठा सका था।
अनुच्छेद 370 और गठबंधन टूटने के आरोप
भाषण के अगले हिस्से में कबीर ने तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के रुख की चर्चा करते हुए कहा कि उनके रहते अनुच्छेद 370 को समाप्त करना तो दूर, उस प्रावधान पर बहस तक की इजाजत नहीं दी गई थी। उन्होंने आरोप मढ़ा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस को भी इस संवेदनशील संवैधानिक मुद्दे पर बोलने से पूरी तरह रोक कर रखा गया था, क्योंकि किसी में भी पीडीपी के चुनावी वादों के खिलाफ जाने का साहस नहीं था। अपनी बात के आखिर में उन्होंने भाजपा पर गंभीर इल्जाम लगाते हुए कहा कि उसने पीडीपी की पीठ में खंजर घोंपकर सत्ता की साझेदारी खत्म कर दी थी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे सभी मुश्किलों का सामना एकजुट होकर करें और अपने हकों की इस लड़ाई को मिलकर आगे बढ़ाते रहें।





















