खगोलीय और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार शनि के गोचर से विभिन्न राशियों पर साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव शुरू होने जा रहा है। जब शनि मेष राशि में प्रवेश करेंगे, तब वृषभ राशि के जातकों के लिए साढ़ेसाती का पहला चरण आरंभ हो जाएगा। इसी समय मेष राशि के लोगों पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा होगा, जबकि मीन राशि के जातक इस अवधि में साढ़ेसाती के अंतिम चरण से गुजर रहे होंगे।
कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का प्रभाव और बदलाव
जून के महीने में कुंभ राशि के जातकों को साढ़ेसाती के प्रभाव से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि यह राहत काफी लंबे समय तक कायम नहीं रहेगी। वर्ष 2027 में जब शनि वक्री होने के बाद अक्टूबर के महीने में वापस मीन राशि में लौटेंगे, तब कुंभ राशि के जातक एक बार फिर से साढ़ेसाती के घेरे में आ जाएंगे। ग्रहों की चाल में होने वाले इन बदलावों के कारण साढ़ेसाती और ढैय्या की स्थिति कुछ ही समय के लिए परिवर्तित होगी, इसलिए गोचर की दोनों तारीखों का विशेष महत्व माना गया है।
साढ़ेसाती के चरण और ज्योतिषीय गणना
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार साढ़ेसाती के कुल तीन चरण होते हैं। किसी भी जातक की चंद्र राशि की स्थिति को देखकर ही यह निर्धारित किया जाता है कि उस पर साढ़ेसाती का कौन सा चरण चल रहा है। हालांकि केवल इस एक आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति के जीवन में कौन सी निश्चित घटनाएं घटित होंगी। ज्योतिषीय पद्धति में शनि को मुख्य रूप से कर्म, अनुशासन और न्याय का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि शनि के प्रभाव के दौर में व्यक्ति को अपने कामकाज और उत्तरदायित्वों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

















