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गुवाहाटी बम मामला: एनआईए ने उल्फा-आई प्रमुख परेश बरुआ समेत पांच लोगों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीटअसम
17 अक्तू॰ 2026, 11:30 am (28 मिनट पहले)· 1

गुवाहाटी बम मामला: एनआईए ने उल्फा-आई प्रमुख परेश बरुआ समेत पांच लोगों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण ने 15 अगस्त 2024 को गुवाहाटी से एक आईईडी बरामद होने के मामले में उल्फा-आई के स्वयंभू कमांडर-इन-चीफ परेश बरुआ समेत पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है।

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट के प्रमुख परेश बरुआ और चार अन्य लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। यह मामला पिछले साल 15 अगस्त 2024 को असम के गुवाहाटी शहर से एक इम्प्रोवाइज्ड विस्फोटक उपकरण की बरामदगी से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर केंद्रीय एजेंसी ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए यह कानूनी कार्रवाई पूरी की है। म्यांमार में सक्रिय इस प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन पर राज्य भर में कई स्थानों पर सुनियोजित तरीके से बम धमाके करने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया गया है, जिसके तहत गुवाहाटी की एक विशेष अदालत में यह चार्जशीट पेश की गई है।

अन्य आरोपियों की पहचान और घटना का विवरण

जांच एजेंसी द्वारा दायर किए गए इस आरोप पत्र में परेश बरुआ, जो इस प्रतिबंधित संगठन के चेयरमैन और स्वयंभू कमांडर-इन-चीफ के रूप में सक्रिय हैं, के अलावा चार अन्य लोगों को भी नामजद किया गया है। इन अन्य आरोपियों में कनक चंद्र गोगोई उर्फ ऐशेंग असम, जाहनू बरुआ, भार्गव गोगोई और सुमु गोगोई शामिल हैं। यह पूरा मामला 15 अगस्त 2024 को गुवाहाटी के पानबाजार इलाके के मोतीलाल नेहरू रोड पर एक आईईडी मिलने के बाद सामने आया था, जिसे कथित तौर पर इसी संगठन के सदस्यों द्वारा वहां लगाया गया था ताकि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अशांति फैलाई जा सके और आम जनता के बीच दहशत का माहौल पैदा किया जा सके।

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किन गंभीर धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला

अधिकारियों के अनुसार, सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023, गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, 1967 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के विभिन्न प्रावधानों के तहत आरोप तय किए गए हैं। इस मामले की शुरुआत में स्थानीय स्तर पर 16 अगस्त 2024 को गुवाहाटी के पानबाजार पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए संघीय जांच एजेंसी ने 27 फरवरी 2025 को इस केस को अपने हाथ में ले लिया और इसे अपने यहां फिर से दर्ज कर गहन तफ्तीश शुरू की थी।

भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश

एजेंसी का यह आरोप है कि सभी आरोपी भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की एक बड़ी साजिश में शामिल थे। इस सुनियोजित षड्यंत्र के तहत असम के विभिन्न हिस्सों में कई जगहों पर बम विस्फोट करने की योजना बनाई गई थी, जिनमें गुवाहाटी का मोतीलाल नेहरू मार्ग भी शामिल था। जांच में यह बात सामने आई है कि इन सुनियोजित हमलों का मुख्य उद्देश्य भारी जानमाल का नुकसान पहुंचाना, देश की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को खतरे में डालना तथा नागरिकों के मन में भय का संचार करना था, जिस पर अब कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।

सवाल-जवाब

इस मामले में एनआईए ने किसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है?
एनआईए ने उल्फा-आई प्रमुख परेश बरुआ समेत पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
गुवाहाटी में आईईडी कब और कहां बरामद किया गया था?
आईईडी 15 अगस्त 2024 को गुवाहाटी के पानबाजार इलाके में मोतीलाल नेहरू रोड से बरामद किया गया था।
परेश बरुआ के अलावा चार्जशीट में अन्य आरोपियों के क्या नाम हैं?
अन्य आरोपियों में कनक चंद्र गोगोई उर्फ ऐशेंग असम, जाहनू बरुआ, भार्गव गोगोई और सुमु गोगोई शामिल हैं।
एनआईए ने इस मामले को कब अपने हाथ में लिया था?
एनआईए ने इस मामले को 27 फरवरी 2025 को अपने हाथ में लेकर फिर से दर्ज किया था।
आरोपियों के खिलाफ किन कानूनों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं?
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, यूएपीए और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत आरोप तय किए गए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 मिनट पहले

स्वतंत्रता दिवस पर अशांति फैलाने की ऐसी साजिश किसी भी कीमत पर माफ नहीं होनी चाहिए। एनआईए की चार्जशीट से साफ है कि म्यांमार से बैठकर भारत के खिलाफ जहर घोलने वालों पर शिकंजा कस रहा है, उम्मीद है कोर्ट से इन्हें कड़ी सजा मिलेगी।

Ravikash Gupta@ravikash·2 मिनट पहले

बिल्कुल सही कहा करण, म्यांमार में बैठकर देश की शांति से खिलवाड़ करने वालों पर शिकंजा कसना बेहद जरूरी था। सीमा पार से चल रहे ऐसे नापाक मंसूबों को आर्थिक रूप से भी तोड़ा जाना चाहिए ताकि आतंकवाद की फंडिंग पूरी तरह बंद हो सके।

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