राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट के प्रमुख परेश बरुआ और चार अन्य लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। यह मामला पिछले साल 15 अगस्त 2024 को असम के गुवाहाटी शहर से एक इम्प्रोवाइज्ड विस्फोटक उपकरण की बरामदगी से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर केंद्रीय एजेंसी ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए यह कानूनी कार्रवाई पूरी की है। म्यांमार में सक्रिय इस प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन पर राज्य भर में कई स्थानों पर सुनियोजित तरीके से बम धमाके करने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया गया है, जिसके तहत गुवाहाटी की एक विशेष अदालत में यह चार्जशीट पेश की गई है।
अन्य आरोपियों की पहचान और घटना का विवरण
जांच एजेंसी द्वारा दायर किए गए इस आरोप पत्र में परेश बरुआ, जो इस प्रतिबंधित संगठन के चेयरमैन और स्वयंभू कमांडर-इन-चीफ के रूप में सक्रिय हैं, के अलावा चार अन्य लोगों को भी नामजद किया गया है। इन अन्य आरोपियों में कनक चंद्र गोगोई उर्फ ऐशेंग असम, जाहनू बरुआ, भार्गव गोगोई और सुमु गोगोई शामिल हैं। यह पूरा मामला 15 अगस्त 2024 को गुवाहाटी के पानबाजार इलाके के मोतीलाल नेहरू रोड पर एक आईईडी मिलने के बाद सामने आया था, जिसे कथित तौर पर इसी संगठन के सदस्यों द्वारा वहां लगाया गया था ताकि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अशांति फैलाई जा सके और आम जनता के बीच दहशत का माहौल पैदा किया जा सके।
किन गंभीर धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
अधिकारियों के अनुसार, सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023, गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, 1967 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के विभिन्न प्रावधानों के तहत आरोप तय किए गए हैं। इस मामले की शुरुआत में स्थानीय स्तर पर 16 अगस्त 2024 को गुवाहाटी के पानबाजार पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए संघीय जांच एजेंसी ने 27 फरवरी 2025 को इस केस को अपने हाथ में ले लिया और इसे अपने यहां फिर से दर्ज कर गहन तफ्तीश शुरू की थी।
भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश
एजेंसी का यह आरोप है कि सभी आरोपी भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की एक बड़ी साजिश में शामिल थे। इस सुनियोजित षड्यंत्र के तहत असम के विभिन्न हिस्सों में कई जगहों पर बम विस्फोट करने की योजना बनाई गई थी, जिनमें गुवाहाटी का मोतीलाल नेहरू मार्ग भी शामिल था। जांच में यह बात सामने आई है कि इन सुनियोजित हमलों का मुख्य उद्देश्य भारी जानमाल का नुकसान पहुंचाना, देश की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को खतरे में डालना तथा नागरिकों के मन में भय का संचार करना था, जिस पर अब कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।





















