ओडिशा में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए विजिलेंस विभाग ने शुक्रवार की देर रात एक भ्रष्ट सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर के पास से भारी मात्रा में नकदी बरामद की है। इस कार्रवाई के दौरान कुल 21 लाख 88 हजार 620 रुपये नकद जब्त किए गए हैं, जिन्हें गिनने के लिए अधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। पकड़े गए अधिकारी की पहचान प्रसंजित दास के रूप में हुई है, जो कटक के जगतपुर स्थित महानदी नॉर्दर्न डिवीजन में सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। विजिलेंस अधिकारियों को इस बात की पुख्ता सूचना मिली थी कि यह अधिकारी विभिन्न ठेकेदारों से अवैध रूप से रिश्वत की रकम वसूल कर रहा है और उसे अपने पास इकट्ठा कर रहा है। इसी सूचना के आधार पर जाल बिछाया गया और भुवनेश्वर के एजी चौक के पास वाहन को रोककर तलाशी ली गई, जिसके बाद एक के बाद एक कई ठिकानों पर छापेमारी की गई।
गाड़ी और फ्लैट से बरामद हुई नकदी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रसंजित दास देर रात अपने आधिकारिक कार्यों के सिलसिले में किराए पर ली गई एक बोलेरो गाड़ी से सफर कर रहे थे। जब उन्हें भुवनेश्वर के एजी चौक के पास रोका गया और उनकी गाड़ी की तलाशी ली गई, तो उनके पास से 7 लाख 28 हजार 620 रुपये नकद मिले। इतनी बड़ी मात्रा में कैश मिलने के बाद अधिकारियों का संदेह गहरा गया, जिसके बाद मामले की जांच का दायरा बढ़ाते हुए उनके अन्य ठिकानों पर भी एक साथ छापेमारी करने का निर्णय लिया गया। विजिलेंस की टीमों ने शनिवार की सुबह भुवनेश्वर के घाटिकिया इलाके में स्थित ट्राइडेंट गैलेक्सी अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर D-401 पर धावा बोला, जो प्रसंजित दास का किराए का मकान था। इस फ्लैट की तलाशी के दौरान अधिकारियों को 14 लाख 60 हजार रुपये की अतिरिक्त नकदी हाथ लगी। इसके साथ ही बड़गड़ स्थित उनके पैतृक आवास पर भी विजिलेंस टीम ने तलाशी अभियान चलाया, जिससे इस पूरी कार्रवाई में कुल बरामद रकम बढ़कर 21 लाख 88 हजार 620 रुपये हो गई।
आय के स्रोत बताने में असमर्थ रहे अधिकारी
विजिलेंस विभाग के अधिकारियों के अनुसार, प्रसंजित दास इतनी बड़ी मात्रा में मिले कैश के संबंध में कोई भी संतोषजनक या वैध स्पष्टीकरण नहीं दे सके। वह यह साबित करने में पूरी तरह असमर्थ रहे कि यह पैसा कहां से आया और इसकी असली वजह क्या थी। संतोषजनक जवाब न मिलने पर विजिलेंस टीम ने पूरी नकदी को अपने कब्जे में ले लिया और उसे सील कर दिया। इसके अलावा अधिकारी को आगे की पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया के लिए अपनी हिरासत में ले लिया गया है। विजिलेंस की विशेष टीम अब इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि प्रसंजित दास ने यह अवैध धन किन-किन ठेकेदारों से और किस एवज में वसूला था तथा इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ केस
इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद भुवनेश्वर विजिलेंस पुलिस स्टेशन में 16 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक तौर पर केस नंबर 24 दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) और इसकी संशोधित धारा 13(1)(b) के प्रावधानों के तहत दर्ज किया है। फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल मामले में आगे की कानूनी जांच तेजी से जारी है। विजिलेंस के वरिष्ठ अधिकारी जब्त किए गए पैसों के सटीक स्रोतों और ठेकेदारों से रिश्वतखोरी के आरोपों से जुड़े तमाम सबूतों को इकट्ठा करने में जुटे हैं। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इस पूरे भ्रष्टाचार रैकेट से जुड़े अन्य बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।



















