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चित्रकूट में सोनामुखी की खेती से मालामाल हो रहे हैं किसान, तीन महीने में तैयार होती है यह औषधीय फसलव्यापार
17 अक्तू॰ 2026, 11:06 am (2 घंटे पहले)· 1

चित्रकूट में सोनामुखी की खेती से मालामाल हो रहे हैं किसान, तीन महीने में तैयार होती है यह औषधीय फसल

बुंदेलखंड के चित्रकूट में पथरीली जमीन और पानी की कमी से जूझ रहे किसानों के लिए सोनामुखी की खेती एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रही है। यह फसल सिर्फ तीन महीने में तैयार हो जाती है और इससे लाखों का मुनाफा कमाया जा सकता है।

बुंदेलखंड के चित्रकूट जिले में खेती से जुड़े लोगों को अक्सर कम बारिश, पानी की किल्लत और पथरीली भूमि जैसी कई गंभीर समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है। विशेष तौर पर पाठा क्षेत्र में किसानी करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं माना जाता है। इन तमाम कठिनाइयों के बीच अब स्थानीय स्तर पर पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर औषधीय खेती की तरफ कदम बढ़ाए जा रहे हैं, जिसमें सोनामुखी की खेती किसानों के लिए एक बहुत ही लाभकारी विकल्प साबित हो रही है। यदि आप भी इस क्षेत्र में खेती की योजना बना रहे हैं, तो कुछ आसान तरीकों को अपनाकर इस बहुमूल्य फसल को आसानी से उगाया जा सकता है।

सोनामुखी की खासियत और बाजार में मांग

सोनामुखी मुख्य रूप से एक औषधीय पौधा है, जिसकी पत्तियों का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और विभिन्न प्रकार के औषधीय उत्पादों के निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसी उपयोगिता के कारण बाजार में इस उत्पाद की मांग हमेशा उच्च स्तर पर बनी रहती है। इस फसल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह महज तीन महीने के भीतर पूरी तरह से तैयार हो जाती है। चित्रकूट के पाठा इलाके की मिट्टी इस तरह की औषधीय फसलों के लिए बहुत उपजाऊ मानी गई है, जिसका लाभ उठाकर किसान अपनी आमदनी में उल्लेखनीय इजाफा कर सकते हैं।

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विशेषज्ञों की राय और उत्पादन से जुड़ी खास बातें

कृषि विशेषज्ञ विजय ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए बताया है कि सोनामुखी की खेती में एक बार पौधे लगा दिए जाएं, तो लगातार तीन साल तक इसका उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इस फसल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि अन्ना या आवारा जानवर इसे बिल्कुल नहीं खाते हैं, जिससे फसल के नष्ट होने का खतरा नहीं रहता है। यदि समय पर इसकी पत्तियों की तुड़ाई न की जाए, तो वे तीन से चार महीने के अंतराल पर अपने आप ही झड़ जाती हैं।

लागत, कमाई और उपयोग

इस औषधीय पौधे का उपयोग मुख्य रूप से पेट साफ करने वाले चूर्ण के साथ-साथ कई अन्य महत्वपूर्ण दवाइयों को बनाने में किया जाता है। यह फसल एक फुट तक की उथली मिट्टी वाली जमीन पर भी बहुत आसानी से पनप जाती है। इसका बीज बाजार में करीब 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक की दर से आसानी से उपलब्ध हो जाता है और एक बीघे के खेत में लगभग ढाई किलोग्राम बीज की आवश्यकता पड़ती है। बाजार में इसकी बिक्री कीमत की बात की जाए, तो यह आसानी से 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव तक बिक जाती है, जिससे किसानों को तगड़ा मुनाफा मिलता है।

सवाल-जवाब

चित्रकूट में सोनामुखी की खेती के लिए कौन सा क्षेत्र उपयुक्त है?
चित्रकूट का पाठा क्षेत्र इसकी खेती के लिए सबसे उपजाऊ माना गया है।
सोनामुखी की फसल कितने दिनों में तैयार हो जाती है?
यह फसल लगभग तीन महीने में पूरी तरह तैयार हो जाती है।
सोनामुखी के पौधे से कितने साल तक उत्पादन मिलता है?
एक बार पौधे लगाने पर इससे लगातार तीन साल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
क्या आवारा जानवर इस फसल को नुकसान पहुंचाते हैं?
नहीं, अन्ना या आवारा जानवर इस पौधे को नहीं खाते हैं।
बाजार में सोनामुखी का बीज किस भाव पर मिलता है?
इसका बीज बाजार में आसानी से डेढ़ सौ रुपये प्रति किलो तक मिल जाता है।
बाजार में सोनामुखी की पत्तियां किस कीमत पर बिकती हैं?
यह बाजार में आसानी से एक हजार रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिक जाती है।
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