खगोलीय दृष्टिकोण से सूर्य और चंद्र ग्रहण को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में इन घटनाओं को और भी खास स्थान दिया गया है। आने वाले सितंबर महीने में खगोलीय दुनिया में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है, क्योंकि महज पंद्रह दिनों के अंतराल पर दो ग्रहण लगने जा रहे हैं। महीने की शुरुआत में पहले चंद्र ग्रहण लगेगा और उसके ठीक पंद्रह दिन बाद सूर्य ग्रहण अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा। ज्योतिष ग्रंथों में एक ही महीने के भीतर दो ग्रहण लगने की इस स्थिति को बहुत अहम माना गया है और इसे कई बार बड़े संकट या आपदाओं से भी जोड़ा जाता है।
साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 7 सितंबर को
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर सुभाष पांडेय के अनुसार, सितंबर की 7 तारीख को साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना भारत समेत दुनिया के कई अन्य हिस्सों में भी साफ तौर पर दिखाई देगी। वैदिक पंचांग के मुताबिक इस दिन भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि है। भारतीय समयानुसार इस ग्रहण की शुरुआत रात 9 बजकर 57 मिनट पर होगी। इसका मध्यकाल रात 11 बजकर 41 मिनट पर आएगा, जबकि इस चंद्र ग्रहण का समापन रात्रि 1 बजकर 27 मिनट पर होगा।
21 सितंबर को लगेगा सूर्य ग्रहण
इसके ठीक बाद अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि यानी 21 सितंबर को सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। वैदिक पंचांग के अनुसार इस दिन पितृ अमावस्या का संयोग है। प्रोफेसर सुभाष पांडेय ने जानकारी दी कि 21 सितंबर को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण एक खंड ग्रास ग्रहण है, जिसका असर पूरी पृथ्वी पर नहीं पड़ेगा यानी यह चुनिंदा देशों में ही नजर आएगा। पंचांग के अनुसार यह ग्रहण न्यूजीलैंड, पूर्वी मलेशिया, दक्षिणी पोलिनेशिया और पश्चिमी अंटार्कटिका के क्षेत्रों में दिखाई देगा। खास बात यह है कि यह सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा। भारतीय समयानुसार इस ग्रहण की शुरुआत रात 11 बजे होगी और इसका मोक्ष रात्रि 3 बजकर 24 मिनट पर होगा।
प्राकृतिक आपदाओं और संकट का संकेत
महान खगोलशास्त्री वराहमिहिर द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रंथ बृहत्संहिता में इस बात का विस्तार से उल्लेख मिलता है कि जब एक ही महीने में दो ग्रहण पड़ते हैं, तो इसके क्या परिणाम हो सकते हैं। इस प्राचीन ग्रंथ के अनुसार ऐसी खगोलीय स्थिति बनने पर भूकंप, सुनामी, भयंकर तूफान और किसी बड़ी जनहानि की आशंका काफी हद तक बढ़ जाती है। इसके अलावा इस अवधि में दो देशों के बीच आपसी तनाव बढ़ने की भी संभावना जताई गई है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो सकता है और लोगों के बीच अफरा-तफरा का माहौल बन सकता है।



















